एकोऽहम्

जो ये आग पियेगा

›
श्री बालकवि बैरागी के कविता संग्रह ‘कोई तो समझे’  की चौंतीसवी कविता    यह कविता संग्रह (स्व.) श्री संजय गाँधी को  समर्पित किया गया है। जो ...

मर्दों की कविता

›
श्री बालकवि बैरागी के कविता संग्रह ‘रेत के रिश्ते’  की इकतीसवीं कविता  यह कविता संग्रह श्री पं. भवानी प्रसादजी मिश्र को  समर्पित किया गया ...
1 comment:

पता नहीं

›
श्री बालकवि बैरागी के कविता संग्रह ‘कोई तो समझे’  की तैंतीसवी कविता   यह कविता संग्रह (स्व.) श्री संजय गाँधी को  समर्पित किया गया है। पता ...
4 comments:

आत्म-स्वीकृति

›
श्री बालकवि बैरागी के कविता संग्रह ‘रेत के रिश्ते’  की तीसवीं कविता  यह कविता संग्रह श्री पं. भवानी प्रसादजी मिश्र को  समर्पित किया गया है...
8 comments:

सुलझ नहीं पाती है गुत्थी

›
श्री बालकवि बैरागी के कविता संग्रह ‘मैं उपस्थित हूँ यहाँ’  की एकसौदोवी/अन्तिम कविता यह कविता संग्रह पाठकों को समर्पित किया गया है। सुलझ नहीं...

विकृत (कहानी संग्रह ‘बिजूका बाबू’ की इक्कीसवीं/अन्तिम कहानी)

›
  श्री बालकवि बैरागी के कहानी संग्रह ‘बिजूका बाबू’ की इक्कीसवीं/अन्तिम कहानी यह संग्रह, इन कहानियों के पात्रों को समर्पित किया गया है। विकृत...

तीन कविताएँ ‘आसान’, ‘वही बीज’ और ‘दायित्व बोध’

›
श्री बालकवि बैरागी के कविता संग्रह ‘कोई तो समझे’  की तीन कविताएँ   यह कविता संग्रह (स्व.) श्री संजय गाँधी को  समर्पित किया गया है। तीसवी क...

ओ दिनकरों के वंशधर

›
श्री बालकवि बैरागी के कविता संग्रह ‘रेत के रिश्ते’  की उनतीसवीं कविता  यह कविता संग्रह श्री पं. भवानी प्रसादजी मिश्र को  समर्पित किया गया ...
5 comments:

पहाड़ की प्रार्थना

›
श्री बालकवि बैरागी के कविता संग्रह ‘मैं उपस्थित हूँ यहाँ’  की एकसौएकवी कविता यह कविता संग्रह पाठकों को समर्पित किया गया है। पहाड़ की प्रार्थन...

छात्र (श्री बालकवि बैरागी के कहानी संग्रह ‘बिजूका बाबू’ की बीसवीं कहानी)

›
  श्री बालकवि बैरागी के कहानी संग्रह ‘बिजूका बाबू’ की बीसवीं कहानी   यह संग्रह, इन कहानियों के पात्रों को समर्पित किया गया है। छात्र अब अगर ...

हे! लोकदेव नेहरू

›
श्री बालकवि बैरागी के कविता संग्रह ‘कोई तो समझे’  की उनतीसवी कविता  यह कविता संग्रह (स्व.) श्री संजय गाँधी को  समर्पित किया गया है। हे! लो...

‘वामन’ शास्त्रीजी ने विराटता और विनम्रता से बैरागीजी की अहमन्यता को शालीनता से क्षमा किया

›
मूल आलेख से पहले, कृपया इसकी अन्‍तर्कथा पढ़िए आदमी की संस्कारशीलता उसके सार्वजनिक आचरण से प्रकट होती है। ‘कुर्सी’ अच्छे-अच्छों का ‘दिमाग खराब...
‹
›
Home
View web version

मैं .....

My photo
विष्णु बैरागी
कुछ भी तो उल्लेखनीय नहीं। एक औसत आदमी जिसे अपने जैसे सड़कछापों की भीड़ में बड़ा आनन्द आता है। ‘मैं अपने घर का स्वामी हूँ लकिन यह कहने के लिए मुझे मेरी पत्नी की अनुमति की आवश्यकता होती है।’ - पूरी तरह अपनी पत्नी पर निर्भर। दो बच्चों का बाप। भारतीय जीवन बीमा निगम का पूर्णकालिक एजेण्ट। इस एजेन्सी के कारण धनपतियों की दुनिया में घूमने के बाद का निष्कर्ष कि पैसे से अधिक गरीब कोई नहीं। पैसा, जो खुद अकेले रहने को अभिशप्त तथा दूसरों को अकेला बनाने में माहिर। मेरा पता - ‘मित्र-धन’, 02 पत्रकार कॉलोनी, पोस्ट बॉक्स नम्बर-19, रतलाम - 457001 (मध्य प्रदेश) मोबाइल नम्बर - 098270 61799
View my complete profile
Powered by Blogger.