एकोऽहम्

दादा की राज्य सभा सदस्यता: राजीवजी का वादा सोनियाजी ने निभाया

›
दादा श्री बालकवि बैरागी देश के उन गिनती के लोगों में शामिल हैं जो तीनों विधायी सदनों (विधान सभा, लोक सभा और राज्य सभा) के सदस्य रहे। विधान स...
1 comment:

जब बैरागीजी को थाने में कविता सुनानी पड़ी

›
बी. एल. पावेचा सन् 1965 में मेरा तबादला, सिविल जज मनासा के पद पर हुआ। तब तक बैरागीजी देश के अच्छे कवि के रूप में स्थापित हो चुके थे और वे मे...
2 comments:

क्या हमारे गाँव चिड़चिड़े हो गए हैं?

›
  बालकवि बैरागी (दादा का यह लेख, इन्दौर से प्रकाशित हो रहे दैनिक नईदुनिया के, वर्ष 1993 के दीपावली विशेषांक में, पृष्ठ 16-17 पर छपा था। इसे...

बैरागीजी ने मेरी नौकरी छुड़वा दी और कहा - ‘यह मर्द से मर्द का वादा है।’

›
बी. एल. पावेचा श्री बी. एल. पावेचा: पूरा नाम बसन्ती लाल पावेचा। जन्म वर्ष 1940। विक्रम विश्व विद्यालय से 1962 में विधि स्नातक की परीक्षा के ...
2 comments:

बोलपट के बैरागी

›
डॉ. मुरलीधर जोशी चाँदनीवाला बात शुरु करूँ, तो वर्ष 1972 के वे दिन आँखों के सामने झूल जाते हैं, जब आचार्य श्री श्रीनिवास रथ विक्रम विश्वविद्...
1 comment:

पत्र

›
  बालकवि बैरागी दादा की इस कहानी की जानकारी मुझे नहीं थी। यह कहानी, उज्जैन से, अनियतकालीन प्रकाशित होती रही कहानी पत्रिका ‘सांझी’ के  कहानी...
5 comments:

तोड़ दो यह बाँध

›
दादा की यह कविता इसलिए तनिक अनूठी है कि यह उनके किसी संग्रह में नहीं है किन्तु यू ट्यूब पर इसके ढेरों वीडियो उपलब्ध हैं। इतने वीडियो, उनकी औ...
5 comments:

महल से नीचे पधारो

›
  बालकवि बैरागी महल से नीचे पधारो, देश फिर वन्दन करेगा फिर वही अर्चन करेगा, और अभिनन्दन करेगा महल से नीचे पधारो..... 00000 बहुत दिन पहले कहा...

पाँच बाल-कविताएँ

›
बालकवि बैरागी एक गोरे-गोरे चाँद में धब्बा, दिखता है जो काला-काला। उस धब्बे का मतलब हमने, बड़े मजे से खोज निकाला। वहाँ नहीं है गुड़िया-बुढ़िया, ...
2 comments:

दिल्ली अलोनी हो गई बाबू सा’ब!

›
बालकवि बैरागी 26 जुलाई को इस बार फिर दिल्ली पहुँच गया। ठीक एक महीने बाद। इस बार काम का बोझ ज्यादा रहा। कुछ सरकारी काम काज कुछ गैर सरकारी मित...
2 comments:

नेपथ्य का सच

›
  बालकवि बैरागी मेरी पगडण्डी पर बिछाने के लिए उन्होंने बेरी से बबूलों तक, कैर से करौंदियो तक से उधार लिए काँटे और बड़ी सावधानी से मेरे रास्ते...
‹
›
Home
View web version

मैं .....

My photo
विष्णु बैरागी
कुछ भी तो उल्लेखनीय नहीं। एक औसत आदमी जिसे अपने जैसे सड़कछापों की भीड़ में बड़ा आनन्द आता है। ‘मैं अपने घर का स्वामी हूँ लकिन यह कहने के लिए मुझे मेरी पत्नी की अनुमति की आवश्यकता होती है।’ - पूरी तरह अपनी पत्नी पर निर्भर। दो बच्चों का बाप। भारतीय जीवन बीमा निगम का पूर्णकालिक एजेण्ट। इस एजेन्सी के कारण धनपतियों की दुनिया में घूमने के बाद का निष्कर्ष कि पैसे से अधिक गरीब कोई नहीं। पैसा, जो खुद अकेले रहने को अभिशप्त तथा दूसरों को अकेला बनाने में माहिर। मेरा पता - ‘मित्र-धन’, 02 पत्रकार कॉलोनी, पोस्ट बॉक्स नम्बर-19, रतलाम - 457001 (मध्य प्रदेश) मोबाइल नम्बर - 098270 61799
View my complete profile
Powered by Blogger.