एकोऽहम्
स्पष्टीकरण
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मालवा के एक प्रसिद्ध साहित्यकार हुए हैं - श्री मंगल मेहता । मालवांचल और मालवी बोली उनके रोम-रोम में बसी हुई थी। मालवा और मालवी पर उन्होंने न...
...और अब अश्वगन्धा
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वाणिज्यिक-औषधीय कृषोपज ‘ अश्वगन्धा ’ को लेकर दादा श्री बालकवि बैरागी का यह लेख, ‘आधारभूत लेख’ की श्रेणी में शामिल किए जाने की पात्रता रख...
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दादा की राज्य सभा सदस्यता: राजीवजी का वादा सोनियाजी ने निभाया
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दादा श्री बालकवि बैरागी देश के उन गिनती के लोगों में शामिल हैं जो तीनों विधायी सदनों (विधान सभा, लोक सभा और राज्य सभा) के सदस्य रहे। विधान स...
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जब बैरागीजी को थाने में कविता सुनानी पड़ी
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बी. एल. पावेचा सन् 1965 में मेरा तबादला, सिविल जज मनासा के पद पर हुआ। तब तक बैरागीजी देश के अच्छे कवि के रूप में स्थापित हो चुके थे और वे मे...
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क्या हमारे गाँव चिड़चिड़े हो गए हैं?
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बालकवि बैरागी (दादा का यह लेख, इन्दौर से प्रकाशित हो रहे दैनिक नईदुनिया के, वर्ष 1993 के दीपावली विशेषांक में, पृष्ठ 16-17 पर छपा था। इसे...
बैरागीजी ने मेरी नौकरी छुड़वा दी और कहा - ‘यह मर्द से मर्द का वादा है।’
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बी. एल. पावेचा श्री बी. एल. पावेचा: पूरा नाम बसन्ती लाल पावेचा। जन्म वर्ष 1940। विक्रम विश्व विद्यालय से 1962 में विधि स्नातक की परीक्षा के ...
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बोलपट के बैरागी
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डॉ. मुरलीधर जोशी चाँदनीवाला बात शुरु करूँ, तो वर्ष 1972 के वे दिन आँखों के सामने झूल जाते हैं, जब आचार्य श्री श्रीनिवास रथ विक्रम विश्वविद्...
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पत्र
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बालकवि बैरागी दादा की इस कहानी की जानकारी मुझे नहीं थी। यह कहानी, उज्जैन से, अनियतकालीन प्रकाशित होती रही कहानी पत्रिका ‘सांझी’ के कहानी...
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तोड़ दो यह बाँध
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दादा की यह कविता इसलिए तनिक अनूठी है कि यह उनके किसी संग्रह में नहीं है किन्तु यू ट्यूब पर इसके ढेरों वीडियो उपलब्ध हैं। इतने वीडियो, उनकी औ...
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