एकोऽहम्

हमारा कृष्ण तो वहीं, कहीं....

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बहुत लम्बा/बड़ा है दादा श्री बालकवि बैरागी का यह लेख। किन्तु मुझे आकण्ठ विश्वास है कि आपने यदि पढ़ना शुरू कर दिया तो अन्तिम शब्द तक पढ़ने के बा...
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अपनी-अपनी रेपुटेशन है

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दादा श्री बालकवि बैरागी के लेखन का यह रंग भी है। साप्ताहिक धर्मयुग के, 4 मई 1980 के अंक के पृष्ठ 41 पर प्रकाशित यह कतरन, वर्तमान में आदीपुर...

नन्दराम से बालकवि तक

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  (अपनी आयु के 60 वर्ष पूरे करने के प्रसंग पर बकलम खुद) दादा श्री बालकवि बैरागी की आज छियानवेवीं जन्म तारीख और पिच्यानवेवी जन्म वर्ष-गाँठ है...

बालकवि की ललकार और महाकवि का मर्म

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श्री बालकवि बैरागी और डॉ. शिव चौरसिया डॉ. विवेक चौरसिया आज दादा श्री बालकवि बैरागी की 94वीं वर्ष-गाँठ है। दादा होते तो आज अपने जीवन के 95वे...
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               महाकाल के महाशय - बालकवि बैरागी पुण्य-स्मृति पण्डित श्री सूर्यनारायणजी व्यास की पुण्य-तिथि ( 22 जून 1999) प्रसंग पर लिखा, दा...
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विष्णु बैरागी
कुछ भी तो उल्लेखनीय नहीं। एक औसत आदमी जिसे अपने जैसे सड़कछापों की भीड़ में बड़ा आनन्द आता है। ‘मैं अपने घर का स्वामी हूँ लकिन यह कहने के लिए मुझे मेरी पत्नी की अनुमति की आवश्यकता होती है।’ - पूरी तरह अपनी पत्नी पर निर्भर। दो बच्चों का बाप। भारतीय जीवन बीमा निगम का पूर्णकालिक एजेण्ट। इस एजेन्सी के कारण धनपतियों की दुनिया में घूमने के बाद का निष्कर्ष कि पैसे से अधिक गरीब कोई नहीं। पैसा, जो खुद अकेले रहने को अभिशप्त तथा दूसरों को अकेला बनाने में माहिर। मेरा पता - ‘मित्र-धन’, 02 पत्रकार कॉलोनी, पोस्ट बॉक्स नम्बर-19, रतलाम - 457001 (मध्य प्रदेश) मोबाइल नम्बर - 098270 61799
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