एकोऽहम्

मेरी तो हो गई दीवाली

›
लोगों को दीपावली की रात को लक्ष्मी मिलती है । मुझे तो दीपावली की ऐन सवेरे-सवेरे ही मिल गई । 'अनवरत' से प्रेरित हो, मैं अपने ब्लाग की...
4 comments:

लक्ष्मी-पति बनाम लक्ष्मी-पुत्र

›
इस दीपावली, मैं एक विचित्र किन्तु रोचक दुर्घटना का शिकार होता रहा - पूरे दिन भर । कल मेरी पूछ-परख नाम मात्र को ही हुई, मानो मजबूरी में या फि...
7 comments:

अभिनन्‍दन

›
दीपावली एवं नव वर्ष के मंगल प्रसंग पर हार्दिक अभिनन्दन एवम् आत्मीय शुभ-कामनाएँ । जातियों, धर्मों, वर्गों, वर्णों से ऊपर उठकर हम भारतीय बन सक...
6 comments:

अर्श और फर्श की विसंगत दीपावली

›
व्‍यक्तित्‍व विकास और कार्यकुशलता बढ़ाने के लिए ‘सकारात्मक दृष्टिकोण’ इन दिनों मुहावरे की तरह प्रचलन में है । लेकिन यह सब अब तक पूरी तरह व्यक...
5 comments:

अनूठा देनदार

›
कल की मेरी पोस्ट पर श्रीयुत अज्ञात (एनोनीमस) ने अपनी टिप्पणी के चैथे बिन्दु में वह बात कह दी है जिसे विषय बना कर मैं कल की पोस्ट लिखना चाहता...
4 comments:

भारत सरकार का कुबेर : भाजीबीनि

›
भारतीय जीवन बीमा निगम देश के सबसे बड़े वित्तीय उपक्रमों में अग्रणी है । इसे लेकर आए दिनों अखबारों में ‘कुछ न कुछ’ छपता ही रहता है । इस ‘कुछ न...
7 comments:

नरेश गोयल की जमीन

›
कल रात मैं ने, जेट एयरवेज के चेयरमेन नरेश गोयल को, पत्रकारों से बात करते देखा । जो कुछ वे कह रहे थे वह सुन-सुन कर मुझे अपने देहातीपन पर गर्व...
1 comment:

एक अपराध-बोध से मुक्ति

›
गए दो दिनों से मैं बहुत हलका अनुभव कर रहा हूँ । एक अपराध-बोध से मुक्ति मिल गई है मुझे । तनिक अलंकारिक भाषा का उपयोग करुँ और शब्दाडम्बर रचूँ ...
12 comments:

हाँ, यह मैं ही हूं

›
मै हर्षातिरेक में गोते लगा रहा हूँ । दिल्ली और मुम्बई के अखबार, रतलाम में चैबीस घण्टे बाद मिलते हैं । 3 अक्टूबर का ‘जनसत्ता’ (दिल्ली) मुझे...
7 comments:

आप तो जानते ही हो

›
मेरे एक आदरणीय मित्र भोपाल स्थानान्तरित हो गए । वे अत्यधिक संकोची, आत्मकेन्द्रित और ‘चुप्पा’ किस्म के हैं । अपना नाम तक बताने में संकोच कर ...
9 comments:

अमिताभ बच्चन मेरे घर में

›
मेराछोटा बेटा तथागत अभी, दो दिनों के लिए घर आया था । वह इन्दौर में, बी. ई. द्वितीय वर्ष का नियमित छात्र है । वह इन्दौर जाने लगा तो उसे छोड़न...
7 comments:

कपडे : इस मन्‍त्री के, उस मन्‍त्री के

›
आतंकवाद और हमारे गृह मन्‍त्रीजी के कपडे इन दिनों अखबारों और समाचार चैनलों के प्रमुख समाचार बने हुए हैं । व्‍यंग्‍य चित्रकारों को बहुत दिनों ...
7 comments:

बरसों बाद ऐसा हुआ कि........

›
‘वे’ कितने थे, गिन पाना असम्भव ही था । ‘वे’ हजारों भी हो सकते थे, लाखों भी या शायद करोड़ भी । ‘वे’ जितने भी थे, सबके सब काम में लगे ...
6 comments:

विजय माल्या की शर्तों पर जी रहा इण्डिया

›
दिल्ली से इन्दौर तक की यह हवाई यात्रा, मेरी तीसरी हवाई यात्रा थी । ‘भारत‘ और ‘इण्डिया’ का, अब तक अखबारों और पत्र-पत्रिकाओं में पढ़ता रहा ...
5 comments:

हिन्दी दिवस : शुकताल में और हवाई अड्डे पर

›
मैं हिन्दी दिवस को सरकारी चोंचला मानता हूँ सो इस दिन होने वाले औपचारिक आयोजनों से बचने का यथा-सम्भव प्रयास करता हूँ । यह अलग बात है कि हर सा...
4 comments:

एक फतवा मीडीया के लिए

›
सलमान खान द्वारा अपने निवास पर विनायक स्थापना और पूजा को लेकर जामा मस्जिद के मौलाना अंजारिया द्वारा जारी फतवे को लेकर एक टीवी समाचार चैनल ने...
13 comments:

सत्ता, राजनीति और विश्‍वसनीयता

›
सत्ता और राजनीति अपनी विश्‍वसनीयता कैसे खोती हैं, इसकी छोटी सी बानगी गए दिनों मेरे शहर में देखने को मिली । एक सौ वर्ष से अधिक पुराने एक चर्च...
8 comments:

अथ बीमा एजेण्ट कथा

›
यह पोस्ट दिनेशरायजी द्विवेदी को समर्पित है । बीमा प्रशिक्षण लेने के लिए दो सितम्बर को भोपाल के लिए निकलने से पहले ‘भोपाल में मिलिए’ श...
3 comments:

भालेरावजी

›
यह कविता नहीं है । बीमा प्रशिक्षण प्राप्त करने के लिए मैं 3 से 5 सितम्बर तक, भारतीय जीवन बीमा निगम के, भोपाल स्थित मध्य क्षेत्रीय कार्यालय...
5 comments:

भोपाल में मिलिए

›
बीमा प्रशिक्षण प्राप्त करने के लिए मैं 2 सितम्बर की शाम को भोपाल पहुँचूँगा और 5 सितम्बर की शाम को रतलाम के लिए निकलूँगा । भोपाल में मेरा आवा...
1 comment:
‹
›
Home
View web version

मैं .....

My photo
विष्णु बैरागी
कुछ भी तो उल्लेखनीय नहीं। एक औसत आदमी जिसे अपने जैसे सड़कछापों की भीड़ में बड़ा आनन्द आता है। ‘मैं अपने घर का स्वामी हूँ लकिन यह कहने के लिए मुझे मेरी पत्नी की अनुमति की आवश्यकता होती है।’ - पूरी तरह अपनी पत्नी पर निर्भर। दो बच्चों का बाप। भारतीय जीवन बीमा निगम का पूर्णकालिक एजेण्ट। इस एजेन्सी के कारण धनपतियों की दुनिया में घूमने के बाद का निष्कर्ष कि पैसे से अधिक गरीब कोई नहीं। पैसा, जो खुद अकेले रहने को अभिशप्त तथा दूसरों को अकेला बनाने में माहिर। मेरा पता - ‘मित्र-धन’, 02 पत्रकार कॉलोनी, पोस्ट बॉक्स नम्बर-19, रतलाम - 457001 (मध्य प्रदेश) मोबाइल नम्बर - 098270 61799
View my complete profile
Powered by Blogger.