एकोऽहम्

सबसे गरीब और नितान्‍त अकेला

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बेंगलुरु स्थित मेरे एक परिचित ने कल पहली बार मेरा यह चिट्ठा पढ़ा और चिट्ठे पर टिप्पणी करने के बजाय ‘मेल‘ कर पूछा कि चिट्ठे पर आत्म परिचय में ...
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ज्योतिष : मात्र जिज्ञासा, प्रश्न नहीं

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(अपने एक अनुभव से उपजी जिज्ञासा प्रस्तुत कर रहा हूँ। यह प्रश्न नहीं है और ‘चुनौती‘ जैसा भाव और मनःस्थिति तो ‘कल्पनातीत‘ या कि ‘स्वप्नातीत‘ ह...
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दावा छूट और पुनर्चलित पालिसियाँ

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गत गुरुवार को अपनी पोस्ट बीमा किश्त भुगतान की रियायती अवधि में मैंने कहा था: '' पालिसी लेप्स होने पर उसे चालू कराने के साथ ही ग्रा...
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इन्दौर के सिन्धी समुदाय को सलाम

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सिन्धी समुदाय ने एक बार फिर मुझे अपना ‘मुरीद’ बना लिया है। ‘एक बार फिर’ से ही स्पष्ट है कि मैं पहले से ही इस समुदाय का ‘मुरीद’ बना हुआ हूँ-क...
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चिट्ठाकारों! मुझे रास्ता दिखाओ

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कल पूरे दिन और कोई आधी रात भर से मैं असमंजस में हूँ। ‘चिट्ठा‘ और ‘चिट्ठाकारी’ को सर्वोच्च न्यायालय द्वारा अखबार और पत्रकारिता के समान ही, अभ...
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‘स्माइल पिंकी’ की जय हो

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‘स्माइल पिंकी’ और उससे जुड़े तमाम लोगों को सलाम। इस तथ्य के बाद भी कि ‘स्लमडाग’ को श्रेष्ठ फिल्म का ‘आस्कर’ पुरुस्कार मिल चुका है। मैं उन ‘अल...
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विवश कर दिया भुवनेश ने

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गई रात काम-काज निपटाते-निपटाते कुछ अधिक ही देर हो गई। सवेरे तीन बजे बिस्तर पर जा पाया। तय किया था कि आज ब्लाग पर कुछ भी नहीं लिखूँगा। किन्त...
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मिठास को उकेरती कसक

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खेत में रखे अपने अण्डों की तरफ बढ़ते साँप को देखकर टिटहरी जो क्रन्दन करती है, वह मैंने आज तक नहीं सुना। किताबों में पढ़ा और लोक कथाओं, लोकोक्...
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संस्‍कृति और धर्म रक्षा : व्यापार बनाम उद्यम

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कल रात कोई सवा ग्यारह बजे यह समाचार एक चैनल पर देखा था और आज प्रातः अखबारों में देख रहा हूँ। ‘आश्चर्यचकित’ तो क्षणांश को भी नहीं हुआ किन्तु ...
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बीमा किश्त भुगतान की रियायती अवधि

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बीमा किश्तों के भुगतान के लिए भा.जी.बी.नि. अपने ग्राहकों को रियायती अवधि (ग्रेस पीरीयड) उपलब्ध कराता है। यह अवधि, सामान्यतः देय दिनांक से एक...
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यशोविजय सूरिश्वरजी महाराज से मेरी याचना

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'बर्ग वार्ता' की आज की पोस्ट दिमागी जर्राही बरास्ता नाक [इस्पात नगरी से - खंड 9] पढ़ कर (और टिप्पणी के रूप में ‘बिन माँगी सलाह’ देक...
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'वर्षा' आ गई फागुन में : इसे सहेज लीजिए

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‘जीवन वर्षा’ भारतीय जीवन बीमा निगम की नई योजना (पालिसी) कल, 16 फरवरी को, भारतीय जीवन बीमा निगम (एल. आई. सी.) एक बार फिर अपने स्थापित, जग-...
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वेलेण्टाईन डे का विरोध : एक 'कुविचार'

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मेरे लेप टाप की घड़ी के मुताबिक इस समय 12 और 13 फरवरी की दरमियानी रात के दो बजने वाले हैं। ‘ब्लागवाणी’ के जरिए ढेर सारे ब्लागों की सैर की। क...
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विष्णु बैरागी
कुछ भी तो उल्लेखनीय नहीं। एक औसत आदमी जिसे अपने जैसे सड़कछापों की भीड़ में बड़ा आनन्द आता है। ‘मैं अपने घर का स्वामी हूँ लकिन यह कहने के लिए मुझे मेरी पत्नी की अनुमति की आवश्यकता होती है।’ - पूरी तरह अपनी पत्नी पर निर्भर। दो बच्चों का बाप। भारतीय जीवन बीमा निगम का पूर्णकालिक एजेण्ट। इस एजेन्सी के कारण धनपतियों की दुनिया में घूमने के बाद का निष्कर्ष कि पैसे से अधिक गरीब कोई नहीं। पैसा, जो खुद अकेले रहने को अभिशप्त तथा दूसरों को अकेला बनाने में माहिर। मेरा पता - ‘मित्र-धन’, 02 पत्रकार कॉलोनी, पोस्ट बॉक्स नम्बर-19, रतलाम - 457001 (मध्य प्रदेश) मोबाइल नम्बर - 098270 61799
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