एकोऽहम्

पार्टी हाईकमान याने.....

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मौसम चुनाव का। एक पद पर अनेक दावेदार। प्रत्येक दावेदार खुद को पार्टी हाईकमान का अधिकृत उम्मीदवार बताए। ऐसे में लोगों को लगने लगता है कि पार्...
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बिगाड़ के खाद से सुधार की फसल

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जयन्त बोहरा और अशोक ताँतेड़ यह सब पढ़कर खूब खुश होंगे। दोनों को गुदगुदी होगी और कोई ताज्जुब नहीं कि दोनों एक दूसरे को बधाई भी दें। दोनों ने, स...
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पार्टी निष्ठा का वाजिब दाम

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सोमेश भिया परेशान थे। बैठ नहीं पा रहे थे। दस बाय दस का कमरा छोटा पड़ रहा था चहलकदमी के लिए। बार-बार दरवाजे की ओर देख रहे थे। ऐसे, मानो किसी क...
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शहर का लोकतान्त्रिक भ्रम

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भले ही सारा शहर अच्छी तरह जानता हो कि वे चारों अनेक धन्धों में भागीदार हैं पर वे शहर मे एक साथ कहीं नजर नहीं आते। चारों अलग-अलग पार्टियों के...
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पत्राचार का अवसान

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‘आपका पोस्टकार्ड मिला। आपका काम तो कर ही रहा हूँ लेकिन मैंने बरसों बाद पोस्टकार्ड देखा। मेरे छोटे बेटे ने तो पोस्टकार्ड ही पहली बार देखा।’ उ...
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अथ अतिक्रमण आख्यान

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भैयाजी के साथ यह बड़ा आराम है। वे पार्टी में हैं जरूर किन्तु उनका कोई हाईकामन नहीं। सो, हाईकमान को अपना फैसला जब और जो लेना हो ले लेगी, भैयाज...
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रुढ़ी बन रही परम्परा

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एक परम्परा हमारे देखते-देखते रुढ़ी बन रही है। हमारे देखते-देखते ही नहीं, शायद हम सब मिल कर अत्यन्त प्रेपूर्वक और यत्नपूर्वक इसे रुढ़ी बना रहे ...
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मोहन भागवत के लिए ठीक समय

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मोहन भागवत, अब तक के सर संघ चालकों के मुकाबले तनिक अधिक मुखर, अधिक साहसी तथा अधिक पारदर्शी नजर आ रहे हैं। वे कहते अवश्य हैं कि भाजपा के माँग...
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सुनो! नेता

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बेशर्मी को अपना गहना कैसे बनाया जाए, यही सिखा रहे हैं हमारे नेता इन दिनों। यदि ऐसा नहीं है तो फिर इसका एक ही मतलब है कि वे हम, जन-सामान्य को...
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.....तो राज ठाकरे की ठुकाई हो जाती

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‘मराठी माणुस’ के लिए कुछ कर गुजरने के नाम राज ठाकरे की मूर्खतापूर्ण और निन्दनीय हरकतें देश भर के अखबारों और चैनलों पर छाई हुई हैं। उनकी इन ...
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यह सब करे गरीब आदमी

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8 नवम्बर 2009, रविवार। आगरा में मेरी यह दूसरी सुबह थी। भारतीय जीवन बीमा निगम के एजेण्टों के एकमात्र राष्ट्रीय संगठन ‘लाइफ इंश्योरेंस एजेण्ट्...
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ताजमहल और मेरा मन

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ताजमहल बिलकुल नहीं बदला होगा। वैसा का वैसा ही होगा जैसा कोई सत्ताईस बरस पहले रहा होगा, जब मैं ताज देखने नहीं गया था। वह शायद 1982 था। मेरी ...
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नौकरी और काम

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कोई तीन महीनों से देख रहा हूँ, सुमित रात में देर से लौट रहा है। पहले वह साढ़े सात और आठ बजे के बीच लौट आता था। इन दिनों रात साढ़े ग्यारह बजे स...
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ये अनूठे ‘अपनेवाले’

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‘आप तो अपनेवाले हैं’ जैसी ‘भावनात्मक भयादोहन’ (इमोशनल ब्लेकमेलिंग) करने वाली दुहाई देकर, अपनेवालों का, मुफ्तखोरी की सीमा छूने वाला, आर्थिक, ...
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भक्त भूखे: भगवान को अजीर्ण

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धर्म के नाम पर हमारे देश में कुछ भी हो सकता है और कुछ भी किया/कराया जा सकता है। हमारी राष्ट्रीय भावनाएँ अपवादस्वरूप भी आहत हो जाएँ तो बड़ी बा...
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गार्ड के डिब्बे में

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नहीं जानता कि यह अनुभव जीवन में कितना काम आएगा या कितना महत्वपूर्ण होगा या कि अविस्मरणीय संस्मरण बन पाएगा भी कि नहीं। किन्तु लोगों के कहे बि...
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मैं और मेरी घबराहट

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बारहवीं कक्षा में पढ़ रहे एक बच्चे ने कल मुझे व्याकुल कर दिया। परिचित परिवार की बच्ची कोई पाँच दिन पहले डेंगू का शिकार हो गई। मैं कुशल क्षेम ...
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विष्णु बैरागी
कुछ भी तो उल्लेखनीय नहीं। एक औसत आदमी जिसे अपने जैसे सड़कछापों की भीड़ में बड़ा आनन्द आता है। ‘मैं अपने घर का स्वामी हूँ लकिन यह कहने के लिए मुझे मेरी पत्नी की अनुमति की आवश्यकता होती है।’ - पूरी तरह अपनी पत्नी पर निर्भर। दो बच्चों का बाप। भारतीय जीवन बीमा निगम का पूर्णकालिक एजेण्ट। इस एजेन्सी के कारण धनपतियों की दुनिया में घूमने के बाद का निष्कर्ष कि पैसे से अधिक गरीब कोई नहीं। पैसा, जो खुद अकेले रहने को अभिशप्त तथा दूसरों को अकेला बनाने में माहिर। मेरा पता - ‘मित्र-धन’, 02 पत्रकार कॉलोनी, पोस्ट बॉक्स नम्बर-19, रतलाम - 457001 (मध्य प्रदेश) मोबाइल नम्बर - 098270 61799
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