एकोऽहम्
प्रतिभा पाटिल बनाम झमकू
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मेरे जिले की, जनजातीय (भील) समाज की सागुड़ी, रुपली, भागूड़ी, झमकू, दरली, तीजड़ी, फुन्दी और ऐसी ही अन्य कई स्त्रियों ने अनायास और अचानक ही, राष्...
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मालवा का महाकाल
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याद नहीं आता कि निगम साहब से इस बार का मिलना कितने बरसों बाद हुआ। लेकिन मिलने पर पाया कि वे वैसे के वैसे ही हैं जैसे कि कुछ बरस पहले मिले थे...
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गाँधी विचार पर पुनर्विचार: एक दृष्टिकोण
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रोटरी अन्तरराष्ट्रीय के पूर्व मण्डलाध्यक्ष श्री आलोक बिल्लोरे का यह लेख मुझे श्री रमेश चोपड़ा (बदनावर, जिला धार, मध्यप्रदेश) ने ई-मेल से भे...
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मैं अकेला तो नहीं?
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जीवन में सब कुछ प्रिय और मनोनुकूल नहीं होता। आपका नियन्त्रण केवल आप पर ही होता है, अन्य पर नहीं। ऐसे में, आप कितने ही ‘समय-पालनकर्ता’ हों, द...
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मोदी की प्रशंसनीय पहल
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अब नरेन्द्र मोदी केवल, राज्य द्वारा प्रेरित, प्रोत्साहित ओर संरक्षित सामूहिक नस्लवादी नर संहार के लिए ही नहीं, भारतीय लोकतन्त्र की श्रेष्ठ स...
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सड़कछाप आदमी आदमी की बातें
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‘जब खुद ही ऐसे प्रपंच करते हैं तो वे झूठ और भ्रष्टाचार का विरोध किस मुँह से करते हैं?’ यह सवाल दाग कर वह चला गया। यह सत्रह दिसम्बर की बात है...
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एकान्त के बुनकर
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उस दोपहर तेज बरसात हो रही थी। बरसात के तेवर देखने बाहर आया तो देखा-आचार्यजी सामनेवाले मकान के बरामदे में खड़े हैं। आचार्यजी याने सेवा निवृत्त...
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धन्यवाद ब्लॉग! धन्यवाद मित्रों!
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बाँटने से खुशी बढ़ती है और दुःख कम होता है। सो, अपनी खुशी में बढ़ोतरी के लालच के वशीभूत मैं, आज अपनी खुशी आप सबके साथ बाँट रहा हूँ। बरसों से म...
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चुनाव आगमन के संकेत
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(मेरे कस्बे में नगर निगम के चुनाव चल रहे हैं। यह पोस्ट, उसी सन्दर्भ में दैनिक भास्कर के लिए लिखी गई है।) सखि! मुझे क्यों लग रहा है कि नगर चु...
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यह मूर्खता अब नहीं करूँगा
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सुने, बोले, लिखे, पढ़े गए शब्दों के साकार होने की प्रक्रिया का भागीदार बनना रोमांचक अनुभव है। मैं अभी-अभी ऐसी ही अनुभूति से गुजरा हूँ। सम्भव ...
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चुनाव चिह्न: जी का जंजाल
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खुलकर खेलनेवाले भाऊ के निशाने पर आज फिर निर्दलीय आ गए थे। सबको एक घाट निपटा रहे थे। लग रहा था आज सबको दिगम्बर स्नान करवा कर ही छोड़ेंगे। बोले...
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सैंतीसवीं कौम
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कहते हैं, भगवान ने छत्तीस कौमें बनाई। यह गिनती किसने लगाई, पता नहीं। यदि यह सच है तो मानना पड़ेगा कि मनुष्य ने ईश्वर को परास्त कर दिया। उसने ...
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दण्डित हो रही भारत माता
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दो दिन पहले, ‘नईदुनिया’ (इन्दौर) में छपा समाचार हमारी सरकारों के ‘कृषक हितकारी’ दावों की की और इस मामले में उनकी कथनी और करनी के अन्तर को उ...
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अमीबा और अमरबेल : दद्दू
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(मेरे कस्बे में नगर निगम के चुनाव चल रहे हैं। यह पोस्ट, उसी सन्दर्भ में लिखी गई है।) लोग सोचते, मानते और कहते हैं कि दद्दू राजनीति में हैं। ...
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चुनाव और उस्तादी दाँव
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(मेरे कस्बे में नगर निगम के चुनाव चल रहे हैं। उसी सन्दर्भ में लिखी यह पोस्ट, सम्पादित स्वरूप में, दैनिक भास्कर के रतलाम संस्करण में दिनांक 0...
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पार्टी हाईकमान याने.....
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मौसम चुनाव का। एक पद पर अनेक दावेदार। प्रत्येक दावेदार खुद को पार्टी हाईकमान का अधिकृत उम्मीदवार बताए। ऐसे में लोगों को लगने लगता है कि पार्...
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बिगाड़ के खाद से सुधार की फसल
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जयन्त बोहरा और अशोक ताँतेड़ यह सब पढ़कर खूब खुश होंगे। दोनों को गुदगुदी होगी और कोई ताज्जुब नहीं कि दोनों एक दूसरे को बधाई भी दें। दोनों ने, स...
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पार्टी निष्ठा का वाजिब दाम
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सोमेश भिया परेशान थे। बैठ नहीं पा रहे थे। दस बाय दस का कमरा छोटा पड़ रहा था चहलकदमी के लिए। बार-बार दरवाजे की ओर देख रहे थे। ऐसे, मानो किसी क...
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शहर का लोकतान्त्रिक भ्रम
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भले ही सारा शहर अच्छी तरह जानता हो कि वे चारों अनेक धन्धों में भागीदार हैं पर वे शहर मे एक साथ कहीं नजर नहीं आते। चारों अलग-अलग पार्टियों के...
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पत्राचार का अवसान
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‘आपका पोस्टकार्ड मिला। आपका काम तो कर ही रहा हूँ लेकिन मैंने बरसों बाद पोस्टकार्ड देखा। मेरे छोटे बेटे ने तो पोस्टकार्ड ही पहली बार देखा।’ उ...
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