एकोऽहम्

मिलना अपने ‘बीमा उस्ताद’ से -1

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‘बैरागीजी! आप तो क्या, प्रत्येक बीमा एजेण्ट, सोने की खदान के ऊपर खड़ा रहता है। जितना जी चाहे, हासिल कर ले।’ साहनी साहब ने यही कहा था मुझसे। ...
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दिल्‍ली मेट्रो: स्वर्ग भी, नरक भी

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दिल्ली में, ‘लियाफी’ (लाइफ इंश्योरेंस एजेण्ट्स फेडरेशन ऑफ इण्डिया) की बैठक के अतिरिक्त मेरे लिए एक ही आकर्षण था - मेट्रो यात्रा। 25 नवम्‍बर...
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जान लेना अपने आप को

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यदि आप ऐसे (महान्) व्यक्ति की तलाश में हैं जिसने अपने आपको जान लिया हो, तो आपकी तलाश खत्म। मुझसे मिल लीजिए। मैंने अपने आप को जान लिया है। मै...
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.....और पैसे ने चारों को अकेला कर दिया

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मर्मान्तक पीड़ा झेलते हुए यह पोस्ट लिख रहा हूँ। यह मेरे धन्धे की विशेषता भी है और विवशता भी कि मुझे जीवन के इन्द्रधनुष के सारे रंगों का आनन्...
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अन्नकूट: मेरी कमीज से उसकी कमीज ज्यादा सफेद कैसे

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तय कर पाना मुश्किल हो रहा है कि यह धर्म है, धर्म का विस्तार है या अधर्म? मेरे कस्बे में अन्नकूट अभी-अभी समाप्त हुआ है, कार्तिक पूर्णिमा, 21 ...
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....और विवाह हो गया मेरीवाली ‘इस लड़की’ का

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2 फरवरी 2009 को ‘सम्बन्ध’ तोड़ दिया मेरी वाली ‘इस लड़की’ ने शीर्षक पोस्ट में मैं वचनबद्ध हुआ था कि मेरीवाली ‘इस लड़की’ का विवाह होने पर मैं...
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विवेकवान प्रतिभा: प्रतिभावान विवेक

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‘ऐसा न तो पहली बार हुआ है और न ही आखिरी बार। यह तो आपके जन्म से ही आपके साथ लगा हुआ है। इसलिए पेरशान मत होईए और जिस मिनिट आपका मन बन जाए, उस...
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स्सालों ने ठग लिया

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बहनजी बहुत दुःखी हैं। इतनी दुःखी कि चार महीने हो गए, किन्तु आघात से उपजे दुःख से अब तक नहीं उबर पाई हैं। इतनी दुःखी कि भूल ही गईं कि वे दीपा...
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मेरे यहाँ तो कब की आ गई दीपावली

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सबके यहाँ तो दीपावली आज आई किन्तु मेरे यहाँ तो रविवार, इकतीस अक्टूबर की शाम से आने लगी थी। तीन और चार नवम्बर की सेतु-रात्रि दो बजे से तो दीप...
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सच में यह इतनी बड़ी बात है?

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मुझे आश्चर्य हो रहा है। यह वास्तव में इतनी बड़ी बात है? मुझे तो पल भर भी नहीं लगा! अभी भी नहीं लग रहा। मुझे भरपूर एसएमएस मिलते हैं। व्यापारि...
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मुझे आपसे ईर्ष्‍या हो रही है

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अखबारों और पत्र/पत्रिकाओं में आए दिनों कभी ‘हिंगलिश’ के पक्ष में सीनाजोरी से दिए तर्क सामने आते हैं तो कभी हिन्दी के पक्ष में, गाँव-खेड़ों,...
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यूलीप पॉलिसी लूँ या कोई और?

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अपना नाम न छापने का आग्रह करते हुए, मेरे एक नियमित कृपालु पाठक ने पूछा है - ‘सरकारी नौकरी में हूँ और मेरी उम्र इस समय 45 वर्ष है। मैंने अब त...
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मैं .....

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विष्णु बैरागी
कुछ भी तो उल्लेखनीय नहीं। एक औसत आदमी जिसे अपने जैसे सड़कछापों की भीड़ में बड़ा आनन्द आता है। ‘मैं अपने घर का स्वामी हूँ लकिन यह कहने के लिए मुझे मेरी पत्नी की अनुमति की आवश्यकता होती है।’ - पूरी तरह अपनी पत्नी पर निर्भर। दो बच्चों का बाप। भारतीय जीवन बीमा निगम का पूर्णकालिक एजेण्ट। इस एजेन्सी के कारण धनपतियों की दुनिया में घूमने के बाद का निष्कर्ष कि पैसे से अधिक गरीब कोई नहीं। पैसा, जो खुद अकेले रहने को अभिशप्त तथा दूसरों को अकेला बनाने में माहिर। मेरा पता - ‘मित्र-धन’, 02 पत्रकार कॉलोनी, पोस्ट बॉक्स नम्बर-19, रतलाम - 457001 (मध्य प्रदेश) मोबाइल नम्बर - 098270 61799
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