एकोऽहम्

ओछी पूँजी, बड़ी दुकान, इसीलिए यह राधा नहीं नाचेगी - 3

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यह राधा नहीं नाचेगी - 1 यह राधा नहीं नाचेगी - 2 भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष राजनाथसिंह ने पार्टी के तमाम नेताओं-कार्यकर्ताओं को हड़क...
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मैं और मेरा शहर

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(वसन्त पंचमी, रतलाम का स्थापना दिवस था। इस प्रसंग पर मुझसे ‘कुछ’ लिखने को कहा गया था। मैंने ‘यह’ लिखा। इसे ‘केवल सुरक्षित रखने के लिए’ ब्लॉ...
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मैं इस पर विश्वास नहीं करना चाहता

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पन्द्रह फरवरी की रात को एक विवाह-भोज में हुई इस बात को यहाँ लिखने में मुझे (बात होने से लेकर यहाँ लिख देने तक) बार-बार खुद से जूझना पड़ा ...
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असहमतियों और दुःखों का आनन्द

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‘पत्नी से अधिक पैना और विश्वस्त मित्र और कोई नहीं होता।’ यही लिखा था दादा ने। विवाह के कोई डेड़ बरस बाद, अपनी गृहस्थी की जिम्मेदारी निभान...
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वेलेण्टाइन डे: संस्कृति रक्षा का पुनीत प्रतीक्षित अवसर

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बन्धु! यह क्या? वेलण्टाइन डे में चौबीस घण्टे भी नहीं बचे हैं और तुम बिस्तर में ही हो? ऐसा कैसे चलेगा? ऐसे तो भारतीय संस्कृति की रक्षा का ...
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कवि नहीं, मेरे अग्रज : सरोज भाई

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(यह आलेख, सरोज भाई के 75वें जन्म दिन, 02 जनवरी 2013 पर प्रकाशन हेतु, आग्रह पर लिखा था।)   अब तो यह भी याद नहीं आ रहा कि सरोज भाई से...
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मोदी याने अमरबेल याने यह राधा नहीं नाचेगी - 2

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इस श्रृंखला की पहली कडी यहॉं पढिए यह राधा नहीं नाचेगी - 3 अब यह भी कोई रहस्योद्घाटन नहीं है कि रंच मात्र भी राजनीतिक जिम्मेदारी और जो...
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यह राधा नहीं नाचेगी - 1

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यह राधा नहीं नाचेगी - 2 यह राधा नहीं नाचेगी - 3   खुश होनेवाले खुश हो जाएँ और दुःखी होनेवाले दुःखी। अपनी सीमाओं से परे जाकर मैं घोषण...
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अहा! क्या चीज है राष्ट्रीय अस्मिता!

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राष्ट्रीय अस्मिता बड़े काम की चीज है। काम की होने के साथ-साथ यह मजेदार और सुविधाजनक भी है। बाजार में वो एक किसम की मिट्टी मिलती है ना - ज...
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बड़ी देर कर दी मेहरबाँ आते-आते

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गडकरी को यदि यही करना था तो पहले ही दिन कर लेते! तब न केवल खुद की इज्जत बचती बल्कि पार्टी की इज्जत भी बढ़ती। ‘नैतिकता’ शब्द को सार्थकता म...
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अच्छी शुरुआत का आशावाद

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जब आप अपनी कमजोरियाँ और कमियाँ सार्वजनिक रूप से स्वीकार करते हैं, वह भी तब, जब आप किसी पद पर आने के बाद पहली बार ऐसा कर रहे हों, तब कुछ...
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शरद जोशी: आज की जरूरत

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कल ‘उन्होंने ’  अनायास ही श्रद्धेय शरद भाई (स्वर्गीय शरद जोशी) की बात याद दिला दी। ‘वे ’  मेरे कस्बे के, मझौले स्तर के ठीक-ठीक व्या...
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डिश टीवी की सीनाजोर दादागिरी

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आज मेरा यह भ्रम दूर हो गया कि मैंने अपने लिए, अपनी सुविधा के लिए डिश टीवी का कनेक्शन लिया हुआ है। डिश टीवीवालों ने आज मुझे जता दिया कि वे...
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एलआईसी एजेण्टों का वार्षिक संकट

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अलग-अलग समय पर सच लग रही दो बातें एक साथ सामने आने पर या तो सच नहीं लगतीं या फिर आधा सच लगती हैं। मेरे अभिकर्ता मित्रों ने कल यही प्रतीति...
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विष्णु बैरागी
कुछ भी तो उल्लेखनीय नहीं। एक औसत आदमी जिसे अपने जैसे सड़कछापों की भीड़ में बड़ा आनन्द आता है। ‘मैं अपने घर का स्वामी हूँ लकिन यह कहने के लिए मुझे मेरी पत्नी की अनुमति की आवश्यकता होती है।’ - पूरी तरह अपनी पत्नी पर निर्भर। दो बच्चों का बाप। भारतीय जीवन बीमा निगम का पूर्णकालिक एजेण्ट। इस एजेन्सी के कारण धनपतियों की दुनिया में घूमने के बाद का निष्कर्ष कि पैसे से अधिक गरीब कोई नहीं। पैसा, जो खुद अकेले रहने को अभिशप्त तथा दूसरों को अकेला बनाने में माहिर। मेरा पता - ‘मित्र-धन’, 02 पत्रकार कॉलोनी, पोस्ट बॉक्स नम्बर-19, रतलाम - 457001 (मध्य प्रदेश) मोबाइल नम्बर - 098270 61799
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