एकोऽहम्

पिछड़े हुए लोग

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लगभग 18 बरस पहले, चन्दूलालजी गर्ग ने माँगीलालजी यादव से, काटजू नगर में एक मकान खरीदा था । सौदा पक्का होते ही भुगतान भी कर दिया गया था और चन्...
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‘विस्फोट‘ बना अखबारों का नायक

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हिन्दी चिट्ठाकारों को ‘लख-लख बधाइयां’ । हिन्दी ब्लाग अब तक तो समग्र रूप से अखबारों के स्तम्भ का विषय होते रहे हैं लेकिन कोई एक ब्लाग पहली बा...
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ओल्ड होम का पता दीजिए

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अन्ततः वह हो ही गया जिसके लिए मैं सवेरे से ही आशंकित था और जिसके न होने के लिए मैं ईश्वर से प्रार्थना कर रहा था । आज ‘फादर्स डे’ है और मैं ...
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मुम्बई में जावरा का ओटला

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मुम्बई में आवास समस्या की विकरालता जताने-बताने के लिए बरसों से कहावत सुनता आ रहा हूँ - मुम्बई में खाने को रोटला मिल जाता है पर सोने को ओटला ...
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सास-बहू की पहली होली की पहेली

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परिवार में आए विवाह प्रसंग पर हम लोगों ने कई परम्पराओं के अर्थ जानने के प्रयत्न किए । खूब देर तक विमर्श और विचार किया, तर्क-कुतर्क जुटाए, औच...
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पाँखी की छुट्टियाँ

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गर्मी की छुट्टियाँ आधी से ज्यादा बीत गई हैं लेकिन पाँखी मुझे अब तक घर में ही नजर आ रही है । हर बार की तरह इस बार वह मामा-बुआ के यहाँ नहीं ...
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जलजजी का नम्बर

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टेलीफोन का चोंगा थामे, मैं यद्यपि शून्य में देख रहा था लेकिन सच तो यह था कि मैं खुद से नजरें चुरा रहा था । उधर, टेलीफोन पर दूसरी ओर, जुझारसि...
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पत्रकार, पत्रकारिता और संकट

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टाइम्‍स आफ इण्डिया (अहमदाबाद) के सम्वाददाताओं पर राष्ट्रद्रोह का मुकदमा दायर किए जाने के खिलाफ, देश के अन्य भागों की तरह ही मेरे नगर (जो ...

गाँधी को कूड़ेदान में हम फेंकेंगे

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खबर यह नहीं है कि लन्दन स्थित, मैडम तुसाद के विश्व विख्यात संग्रहालय में, महात्मा गाँधी की मोम-मूर्ति को, विश्व प्रसिध्द नेताओं की मूर्तिय...
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सुगन्ध के दुर्व्‍यसनी

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सुख-दुःख की बातें तो हम, सावधानी और सजगता बरतते हुए एक-दूसरे को पहुँचाते हैं लेकिन अच्छी बातें और अच्छेपन की बातें अपने आप तक रख लेते हैं। ...

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निर्झरजी का `मृत्यु-वरण' साहित्यकारों से जुड़ी, सार्वजनिक उपयोग की निजी सूचनाएँ देने वाली, भोपाल से प्रकाशित हो रही मासिक पत्रिका `आसपा...

नामली में लोकतन्त्र

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नामली और उसके आसपास के देहातों के शूरवीर लोगों को सलाम । मैं उन पर न्यौछावर । लोकतन्त्र की परिभाषा ‘जनता का शासन, जनता के लिए, जनता द्वारा...
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असली बैरागी

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मैं बैरागी हूँ जरूर लेकिन कहने भर को । कोई बाल-बच्चेदार आदमी बैरागी कैसे हो सकता है ? अपने ‘ऐसे बैरागीपन’ के मजे मैं खुद लेता रहता हूँ । लेक...
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भिखारी की जूठन

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शुक्रवार, 30 मई की शाम से मैं विकल, व्यथित और क्षुब्ध हूँ । खुद को साक्षी भाव से देखने का मेरा प्रत्येक प्रयास मुझे मेरी ही नजरों में लज्जि...
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'शब्‍द' के सम्‍मान की वापसी

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‘दैनिक भास्कर’ के, प्रति शनिवार को प्रकाशित होने वाले सिनेमा परिशिष्‍ट ‘रसरंग’ में ‘स्वर पंचमी’ शीर्षक से यूनुस भाई का स्तम्भ प्रकाशित ह...
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अर्जुन का समाचार

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‘‘आज के इस आतंकी आकाश में फैली दहशत भरी हवाओं में और इस विसंगत समय में, जब सुरक्षा का भरोसा देने वाला हर बाजू विकलांग हो चुका हो और जबकि देश...
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इन्हें कैसे रोकें ?

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कर्नाटक विधान सभा के चुनाव परिणामों के राजनीतिक विश्‍लेषण तो होते रहेंगे लेकिन परास्त हुई कांग्रेस के नेता एस. एम. क्रष्‍णा और जद (यू) के न...
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नासमझी का सुख

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हम अतीत की मरम्मत नहीं कर सकते । इसलिए समझदारी इसी में है कि उसे केवल यादों के झरोखों से ही देख जाए, उसे वर्तमान से जोड़ने की मूर्खता कर हम द...
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विष्णु बैरागी
कुछ भी तो उल्लेखनीय नहीं। एक औसत आदमी जिसे अपने जैसे सड़कछापों की भीड़ में बड़ा आनन्द आता है। ‘मैं अपने घर का स्वामी हूँ लकिन यह कहने के लिए मुझे मेरी पत्नी की अनुमति की आवश्यकता होती है।’ - पूरी तरह अपनी पत्नी पर निर्भर। दो बच्चों का बाप। भारतीय जीवन बीमा निगम का पूर्णकालिक एजेण्ट। इस एजेन्सी के कारण धनपतियों की दुनिया में घूमने के बाद का निष्कर्ष कि पैसे से अधिक गरीब कोई नहीं। पैसा, जो खुद अकेले रहने को अभिशप्त तथा दूसरों को अकेला बनाने में माहिर। मेरा पता - ‘मित्र-धन’, 02 पत्रकार कॉलोनी, पोस्ट बॉक्स नम्बर-19, रतलाम - 457001 (मध्य प्रदेश) मोबाइल नम्बर - 098270 61799
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