एकोऽहम्

......हम नहीं, बेकवर्ड तो आप हो

›
आज मुझे एक उलाहना मिला। इस उलाहने ने मेरे जाले झाड़ दिए।  मैं खुद को प्रगतिशील मानता, कहता हूँ और यथासम्भव तदनुसार ही व्यवहार करने की क...
10 comments:

ये चमत्कारी प्रेरणा-पुंज

›
(दिनांक 18 मार्च  2016 को मैंने यह आलेख, भारतीय जीवन बीमा निगम की गृह पत्रिका ‘योगक्षेम’ में प्रकाशनार्थ भेजा था। अब तक इस पर किसी निर्...
2 comments:

सम्बन्ध काम में आते हैं

›
(यह लेख मैंने, 27 सितम्बर 2014 को, भारतीय जीवन बीमा निगम की गृह पत्रिका ‘योगक्षेम’ में प्रकाशनार्थ भेजा था। अब तक इस पर किसी निर्णय की सू...
1 comment:

एके साधे सब सधे

›
(दिनांक 20 दिसम्बर 2013 को मैंने यह लेख, भारतीय जीवन बीमा निगम की गृह पत्रिका ‘योगक्षेम’ में प्रकाशनार्थ भेजा था। अब तक इस पर किसी निर्ण...
4 comments:

‘अधिक’ को बेचने के बजाय बाँट कर भी कृतज्ञ

›
आज मेरा दिन जब शुरु हुआ तब तक मुहल्ले में, सब्जियों के बघार और सिकती रोटियों की गन्ध ने कुनकुनी धूप के साथ चहलकदमी शुरु कर दी थी। मैं लेण्...
3 comments:

तनुजा और काजल की सुन्दरता: औरत की नजर

›
सुन्दरता की कोई सुनिश्चित और सुस्पष्ट परिभाषा अब तक तय नहीं हो पाई है। सबके पास अपनी-अपनी परिभाषा है। वह उक्ति ही ठीक लगती है कि सुन्दरता ...
9 comments:

खुशियों की खीर में ‘पुरवाई’ का नींबू

›
नगर निगमों, नगर पालिकाओं, नगर परिषदों और ग्राम पंचायतों के कर्मचारी बने हुए लगभग पौने तीन लाख अध्यापक अब पक्के सरकारी कर्मचारी बन गए। अब य...
7 comments:

वह धर्म जताता रहा, बीमे चले गए

›
और आखिकार वह हो ही हो गया जिसके लिये मैं मन ही मन मना रहा था कि ऐसा न हो। कभी न हो। अपने धार्मिक आग्रहों का आक्रामक प्रकटीकरण आदमी को ...
2 comments:

फिक्र तो स्कूल ही करेंगे, हम फिक्र का जिक्र करेंगे

›
मेरा यह आलेख, दैनिक ‘सुबह सवेरे’ (भोपाल/इन्दौर) में 11 जनवरी 2017 को प्रकाशित हुआ था।  इन्दौर में स्कूल बस की भीषण दुर्घटना में चार अब...

अनूठा नजदीकी रिश्तेदार

›
पूरे एक बरस पहले, 11 जनवरी 2017 को उन्हें देखा था। उस दिन सुबह ग्यारह बजे मेरे दा ’  साहब माणक भाई अग्रवाल का दाह संस्कार था। उससे बहुत प...
7 comments:
‹
›
Home
View web version

मैं .....

My photo
विष्णु बैरागी
कुछ भी तो उल्लेखनीय नहीं। एक औसत आदमी जिसे अपने जैसे सड़कछापों की भीड़ में बड़ा आनन्द आता है। ‘मैं अपने घर का स्वामी हूँ लकिन यह कहने के लिए मुझे मेरी पत्नी की अनुमति की आवश्यकता होती है।’ - पूरी तरह अपनी पत्नी पर निर्भर। दो बच्चों का बाप। भारतीय जीवन बीमा निगम का पूर्णकालिक एजेण्ट। इस एजेन्सी के कारण धनपतियों की दुनिया में घूमने के बाद का निष्कर्ष कि पैसे से अधिक गरीब कोई नहीं। पैसा, जो खुद अकेले रहने को अभिशप्त तथा दूसरों को अकेला बनाने में माहिर। मेरा पता - ‘मित्र-धन’, 02 पत्रकार कॉलोनी, पोस्ट बॉक्स नम्बर-19, रतलाम - 457001 (मध्य प्रदेश) मोबाइल नम्बर - 098270 61799
View my complete profile
Powered by Blogger.