एकोऽहम्

दल बदलना याने माँ की कोख बदलना

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दादा श्री बालकवि  बैरागी ने नियमित रूप से डायरी कभी नहीं लिखी। किन्तु सन् 2004 में अकस्मात ही उन्होंने प्रकट किया कि उन्होंने सन् 2001 की, प...
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‘सुब्बा राव’ नहीं, ‘सुब्ब राव’ थे वे

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सारी दुनिया के ‘सुब्बा रावजी’, मेरे ‘भाई साहब’ और देश की जवान पीढ़ी के ‘भाईजी’, ‘सुब्ब रावजी’ नहीं रहे। कल रात फेस बुक पर उनकी एक तस्वीर देखी...

‘मंगते से मिनिस्टर’ की अन्तर्कथा

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यह मेरी, 22 अक्टूबर 2019 को, फेस बुक पर प्रकाशित हुई पोस्ट है। आज श्री राजशेखरजी व्यास ने इसे, दो बरस पहले की याद के रूप में साझा किया। उसका...
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हर बरस तम से लड़ाई

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श्री बालकवि बैरागी के कविता संग्रह ‘रेत के रिश्ते’  की सैंतीसवीं/अन्तिम कविता  यह कविता संग्रह श्री पं. भवानी प्रसादजी मिश्र को  समर्पित क...

भाई देवदार!

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श्री बालकवि बैरागी के कविता संग्रह ‘रेत के रिश्ते’  की छत्तीसवीं कविता  यह कविता संग्रह श्री पं. भवानी प्रसादजी मिश्र को  समर्पित किया गया...
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चौराहे सूने हो सकते हैं

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श्री बालकवि बैरागी के कविता संग्रह ‘रेत के रिश्ते’  की पैंतीसवीं कविता  यह कविता संग्रह श्री पं. भवानी प्रसादजी मिश्र को  समर्पित किया गया...

उमड़-घुमड़ कर आओ रे

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श्री बालकवि बैरागी के कविता संग्रह ‘कोई तो समझे’  की सैंतीसवी/अन्तिम कविता   यह कविता संग्रह (स्व.) श्री संजय गाँधी को  समर्पित किया गया ह...

नाक की शोक शैली

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श्री बालकवि बैरागी के कविता संग्रह ‘रेत के रिश्ते’  की चौंतीसवीं कविता  यह कविता संग्रह श्री पं. भवानी प्रसादजी मिश्र को  समर्पित किया गया...

मेघ मल्हारें बन्द करो

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श्री बालकवि बैरागी के कविता संग्रह ‘कोई तो समझे’  की छत्तीसवी कविता   यह कविता संग्रह (स्व.) श्री संजय गाँधी को  समर्पित किया गया है। मेघ ...
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आज के दिन

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श्री बालकवि बैरागी के कविता संग्रह ‘रेत के रिश्ते’  की तैंतीसवीं कविता  यह कविता संग्रह श्री पं. भवानी प्रसादजी मिश्र को  समर्पित किया गया...
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विष्णु बैरागी
कुछ भी तो उल्लेखनीय नहीं। एक औसत आदमी जिसे अपने जैसे सड़कछापों की भीड़ में बड़ा आनन्द आता है। ‘मैं अपने घर का स्वामी हूँ लकिन यह कहने के लिए मुझे मेरी पत्नी की अनुमति की आवश्यकता होती है।’ - पूरी तरह अपनी पत्नी पर निर्भर। दो बच्चों का बाप। भारतीय जीवन बीमा निगम का पूर्णकालिक एजेण्ट। इस एजेन्सी के कारण धनपतियों की दुनिया में घूमने के बाद का निष्कर्ष कि पैसे से अधिक गरीब कोई नहीं। पैसा, जो खुद अकेले रहने को अभिशप्त तथा दूसरों को अकेला बनाने में माहिर। मेरा पता - ‘मित्र-धन’, 02 पत्रकार कॉलोनी, पोस्ट बॉक्स नम्बर-19, रतलाम - 457001 (मध्य प्रदेश) मोबाइल नम्बर - 098270 61799
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