एकोऽहम्
जर्मनी में भी भारत के प्रति भ्रम
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‘बर्लिन से बब्बू को’ पाँचवाँ पत्र: दूसरा हिस्सा भारत के प्रति जिज्ञासाएँ और सवाल प्रायः सभी दूर एक जैसे ही हैं। कोई न कोई ऐसा प्र...
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भोजन में ऊपर से नमक डालने का मतलब
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भोजन करते समय ऊपर से नमक न डालने का अर्थ उच्च रक्त चाप को नियन्त्रित करने की कोशिश करने के अतिरिक्त और भी कुछ हो सकता है? शायद नहीं। मैं भ...
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जर्मन महिलाओं के मन में भारत की रोमाण्टिक छवि
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‘बर्लिन से बब्बू को’ पाँचवाँ पत्र: पहला हिस्सा पाँचवा पत्र बालकवि बैरागी बर...
दिल्ली आकर ट्रम्प क्या कहेंगे, क्या करेंगे?
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गए दिनों एक समाचार चेनल के पर्दे की निचली पट्टी पर पर समाचार नजर आया - ‘छब्बीस जनवरी को ट्रम्प भारत आएँगे।’ नजरें वहीं गड़ गईं। टुकड़ों-टुक...
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बच्चे पढ़ाए नहीं जाते, पढ़ते जाते हैं
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‘बर्लिन से बब्बू को’ चौथा पत्र: सातवाँ/अन्तिम हिस्सा एक संगोष्ठी में मैंने प्रश्न उठाया कि आखिर इस देश में नारी का इतना सम्मान क...
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हिटलर के ताबूत में आखिरी कील यहीं ठुकी थी
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‘बर्लिन से बब्बू को’ - चौथा पत्र: छठवाँ हिस्सा यों तो हमारा हर क्षण महत्वपूर्ण कामों में बीता, पर इस सप्ताह में सबसे अधिक महत्वपूर्...
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.....सूचना मन्त्री को सूचना नहीं मिली
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दो कवि मित्र। एक कवि सरकारी नौकर तो दूसरा राजनीति में। दोनों ने अनगिनत बार मंच साझा किया। एक दूसरे की कविताओं पर खूब दाद दी। हर बार दी। ...
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यहाँ पुलिस आती नहीं, प्रकट होती है
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'बर्लिन से बब्बू को' - चौथा पत्र: पाँचवाँ हिस्सा दफ्तर हो, कारखाना हो या कोई और संस्थान हर जगह तीन पदाधिकारी निश्चित तौर पर र...
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बर्लिन में भी ‘नमूने’ मिल ही गए
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‘बर्लिन से बब्बू को’ - चौथा पत्र: चौथा हिस्सा आज दिन में हम लोग खरीददारी के लिये बाजार में गए। खरीददारी क्या करनी थी, एक रस्म अदा...
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लोकतन्त्र का बीज और सार है लोगों के सवाल
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पहले एक कथा। ऋषि उद्दालक का बेटा श्वेतकेतु ज्ञान-क्षुधा ग्रस्त था। एक दिन ऋषि ने उससे वट वृक्ष का फल मँगाया। श्वेतकेतु फल ले आया। ऋषि ...
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बर्लिन की पहचान और आकर्षण: टेलीविजन टॉवर
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‘बर्लिन से बब्बू को’ - चौथा पत्र: तीसरा हिस्सा बर्लिन में मुख्य चौक पर वहाँ का आधुनिकतम विशाल टेलीविजन टॉवर है। यह टॉवर विज्ञा...
पूर्वी जर्मनी के सहज, समझदार स्कूली बच्चे
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‘बर्लिन से बब्बू को’ - चौथा पत्र: दूसरा हिस्सा बर्लिन आने से पहले हम लोग एक और काउण्टी के केन्द्रीय नगर में ले जाए गये। यहाँ हमें ज...
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