आयतन ही नहीं, अपना घनत्व भी बढ़ाया भारतीय जीवन बीमा निगम ने

भारत सरकार के कुबेर, भारतीय जीवन बीमा निगम ने, जीवन बीमा कारोबार में एक बार फिर न केवल अपना पहला स्थान पूर्ववत बनाए रखा है अपितु इसने जीवन बीमा का कारोबार कर रही निजी क्षेत्र की तमाम बीमा कम्पनियों को धक्का देकर बाजार में अपनी हिस्सेदारी बढ़ा कर 73.02 प्रतिशत कर ली है जो गत वर्ष 70.52 प्रतिशत थी। प्रथम प्रीमीयम आय के सन्दर्भ में यह हिस्सेदारी 64.86 प्रतिशत कर ली जो गए वर्ष 60.79 प्रतिशत थी।

पॉलिसियाँ बेचने के मामले में भारतीय जीवन बीमा निगम ने गत वर्ष के मुकाबले 8.21 प्रतिशत की शानदार वृध्दि करते हुए कुल 3.88 करोड़ पॉलिसियाँ बेच कर अपनी सकल ग्राहक संख्या 28 करोड़ से अधिक कर ली जो दुनिया के (तीन देशों को छोड़कर) किसी भी देश की जनसंख्या से अधिक है।

भारतीय जीवन बीमा निगम ने कामकाज के प्रत्येक पक्ष में अपनी कीर्ति पताका की ऊँचाई में बढ़ोतरी ही की है। वर्ष 2008-09 में ‘निगम’ की सकल प्रीमीयम आय 1,57,186 रुपये थी जो वर्ष 2009-10 मे बढ़कर 1,85,985 रुपये हो गई। अर्थात् ‘निगम’ ने सकल प्रीमीयम आय में 49.15 प्रतिशत की अभूतपूर्व वृद्धि दर्ज की। प्रथम प्रीमीयम आय में भी निगम ने 33.87 प्रतिशत की वृद्धि करते हुए 70,891 करोड़ रुपये संग्रह किए जो गत वर्ष 52,964 करोड़ रुपये थी।

किसी भी बीमा कम्पनी की विश्वसनीयता का पैमाना उसका भुगतान प्रदर्शन होता है। इस मामले में भारतीय जीवन बीमा निगम ने न केवल निजी क्षेत्र की तमाम बीमा कम्पनियों को चारों कोने चित्त कर दिया बल्कि खुद से ही प्रतियोगिता कर अपना पिछला रेकार्ड तोड़ दिया। वर्ष 2009-10 में ‘निगम’ ने, मृतक बीमाधारकों के परिजनों द्वारा प्रस्तुत कुल 6,64,619 मृत्यु दावों पर 7033.68 करोड़ रुपयों का भुगतान किया। वर्ष के दौरान प्राप्त सकल मृत्यु दावों के और निपटाए गए मृत्यु दावों के अन्तिम आँकड़े यद्यपि अभी आने बाकी हैं किन्तु विश्वास किया जा रहा है कि अपनी कीर्तिमानी परम्परा को बनाए रखते हुए ‘निगम’ ने 99 प्रतिशत से अधिक मृत्यु दावों का निपटान किया है। यहाँ यह उल्लेख समीचीन होगा कि लम्बित दावों में ऐसे दावे भी शामिल हैं जो मार्च 2010 के अन्तिम दिनों में प्रस्तुत किए गए हैं और जिन्हें निपटाने के लिए ‘निगम’ को न्यूनतम अनिवार्य समयावधि भी प्राप्त नहीं हुई होगी।

इसी क्रम में ‘निगम’ ने 2,05,17,870 पूर्णावधि दावों (अर्थात् पॉलिसी अवधि पूरी होने पर भुगतान की जानेवाली रकम) तथा प्रत्याशित दावों (अर्थात् विभिन्न मनी बेक तथ अन्य पॉलिसियों की अवधि के दौरान निर्धारित समय पर भुगतान की जानेवाली रकम) पर अपने पॉलिसीधारकों को 46921.22 करोड़ रुपयों का भुगतान किया।

बीमा करोबार करते हुए भारतीय जीवन बीमा निगम को अतिशेष (सरप्लस) के रूप में 23478 करोड़ रुपये प्राप्त हुए जिसकी 5 प्रतिशत रकम, 1029 करोड़ रुपये, लाभांश (डिविडेण्ट) के रूप में ‘निगम’ ने भारत सरकार को सौंप दी । भारत सरकार को दी गई डिविडेण्ट की यह रकम, गत वर्ष की रकम के मुकाबले 18.32 प्रतिशत अधिक है। अतिशेष (सरप्लस) की शेष रकम 22,449 करोड़ रुपये, ‘निगम’ के पॉलिसीधारकों को बोनस के रूपमें अर्पित कर दिए गए हैं।

वर्ष 2009-10 के वित्तीय परिणामों के अनुसार, भारत सरकार के इस कुबेर की सकल परिसम्पत्तियाँ, गत वर्ष के मुकाबले 31.88 प्रतिशत बढ़कर 11,52,057 करोड़ रुपये हो गई है।

किन्तु इससे भी अच्छी खबर अभी बाकी है। भारतीय जीवन बीमा निगम के एजेण्टों ने ‘अहर्निशं सेवामहे’ की उक्ति को चरितार्थ करते हुए, चालू वित्त वर्ष 2010-11 की पहली तिमाही (अप्रेल'10 से जून'10) में 18740 करोड़ रुपये प्रथम प्रीमीयम आय अर्जित कर दिखाई है। यह रकम, गत वर्ष की इसी तिमाही के मुकाबले 107.57 प्रतिशत अधिक तो है ही, पूरे देश में कार्यरत, तमाम बीमा कम्पनियों की प्रथम प्रीमीयम आय का 73.43 प्रतिशत है। अर्थात् देश के महानगरों से लेकर गाँव-खेड़ों की गलियों-पगडण्डियों में सक्रिय, भारत सरकार के इस कुबेर के कर्मठ एजेण्टों ने अपनी शानदार संस्था के कीर्तिमान को अक्षुण्ण बनाए रखने की पीठिका अभी से ही रच दी है।

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2 comments:

  1. जीवन बीमा निगम के सफल प्रदर्शन के बारे में पढकर प्रसन्नता हुई, आश्चर्य नहीं। आपको और अन्य कर्मठ एजेण्टों और कर्मचारियों को हार्दिक बधाई!

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