भारतीय कर्मचारियों के गीता-सूत्र

अण्णा! (केवल) तुम संघर्ष करो वाली मेरी पोस्ट पर मुझे एक एसएमएस मिला। भेजनेवाले सज्जन केन्द्र सरकार के कर्मचारी हैं और नौकरी कुछ ऐसी ‘घुमन्तू’ जैसी है कि अपने कार्यालय में कम ही बैठ पाते हैं। दिन भर, केन्द्र और राज्य सरकार के कार्यालयो में घूमते रहते हैं शाम को जब सारे कार्यालय बन्द हो जाते हैं तब इनका कार्यालय शुरु होता है। जाहिर है कि मेरे ये मित्र दिन भर में जितने कर्मचारियों से मिलते हैं, उतना शायद ही कोई और मिलता होगा। सो, कर्मचारियों को, उनके आचरण को और नौकरी के प्रति उनके व्यवहार को लेकर मेरे ये मित्र प्रतिदिन, घण्टे-दो घण्टे का, धाराप्रवाह व्याख्यान दे सकते हैं।


एसएमएस करने के बाद इन्होंने मुझे फोन किया और कहा - ‘मेरे इस सन्देश को अपने ब्लॉग पर स्थान अवश्य दें किन्तु मेरा नाम न आए। इसीलिए आपके ब्लॉग पर टिप्पणी नहीं की और न ही आपको ई-मेल किया है। एसएमएस किया है और अपना काम हो जाने के बाद कृपया इसे भी डीलिट कर दें।’

सो, उनका कहा पहले माना और बाद में इसे आपकी सेवा में प्रस्तुत कर रहा हूँ। कर्मचारियों के दैनन्दिन आचरण के प्रत्यक्षदर्शी और अनुभवी के निष्कर्ष निम्नानुसार हैं -


नौकरी में मजे करने और बने रहने के लिए सफलता के सात सूत्र -
1. बने रहो पगला, काम करेगा अगला।
2. बने रहो लुल, सेलेरी मिलेगी फुल।
3. जिसने ली टेंशन, उसकी वाइफ लेगी पेंशन।
4. काम से डरों नहीं ओर काम को करो नहीं।
5. काम करो या न करो, काम की फिक्र जरूर करो।
6. फिक्र करो या न करो, फिक्र का जिक्र बॉस से जरूर करो।
7. जो काम करे, उसे अंगुली करो और जो काम न करे उसकी चुगली करो।



12 comments:

  1. सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रम में जान लगाकर काम किया है। अधिकांश बातें कमोबेश सुनी हुई हैं। फिर भी ऐसे अनेकों उपक्रम न सिर्फ खुद चले बल्कि निजी क्षेत्र के (भ्रष्टाचार व अन्धेरगर्दी द्वारा) मरे हुए उपक्रमों के शवों को बेहे श्मशान तक पहुँचाया है। निष्कर्ष: अपने काम के साथ-साथ इस वर्ग के काम को निबटाने वाला एक अति-सक्षम अल्पसंख्यक वर्ग भी है नौकरी में "काम करेगा अगला" वाला।

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  2. भोपाल राजधानी दिनों में राज्‍य शासन के एक अधिकारी कहा करते थे-
    'पूजा करो या अर्चना, कुछ नहीं आने वाला काम.
    जिनसे खुश भोपाल है, उनसे खुश गोपाल'

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  3. सचमुच भारतीय कर्मचारियों की सफलता के ये सात सूत्र बेहद कामयाब हैं।
    बढिया पोस्ट, आभार

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  4. इसे कहते है अनुभव से मिला ज्ञान। सफलता के सात सूत्र उनकी पूरी ज़िंदगी और काम का निचोड़ मालूम होते है।

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  5. इस पोस्ट में लिखें हुए सात अनमोल वचनों में से तीन मैंने अपने फेसबुक प्रोफ़ाइल के लिए उधार लिए है। क्योंकि ये तीन मुझे ऐसे लगे जोकि किसी भी मीडिया संस्थान के लिए एकदम उपयुक्त है।

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  6. Sir,
    It is really well wrote....There is a small group of honest worker in institutions like society,family ,govt sectors /private sector etc..Such persons love to work honestly and the respective systems depend upon them and they are the ones who are managing the very survival of these systems... The men have become materialistic and want to gain most by giving least , naturally in such sorry state of affairs, conflicts are bound to occur.....Sir, keep up the good work and continue to inspire the youth like us inspired....Thanks ...Presently i m in Patna ...Ajay Shankar....Gd Nite

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  7. हम तो रिटायर हो चुके... हाय! देर से सलाह मिली :)

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  8. सभी सुत्र सच मे भारतियो पर सटीक हे, एक सुत्र यहां जर्मन मे भी कभी कभी चलता हे*फिक्र करो या न करो, फिक्र का जिक्र बॉस से जरूर करो। धन्यवाद

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  9. @Dipti

    तुम बहुत स्‍वार्थी हो। यदि बता देती कि तीन सूत्र कौन से हैं तो 'राजा' का क्‍या जाता? दूसरों को जानकारी भी मिल जाती और उनकी उपयागिता विस्‍तारित भी हो जाती।

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  10. एक महत्वपूर्ण बात तो उन्होंने बताई ही नहीं. हम भी उसका प्रयोग बढ़िया करते थे, जब सरकारी नौकर हुआ करते थे -

    गेंद को हमेशा दूसरे के पाले में डाले रक्खो!

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