जीवन अंकुर : सम्भवतः दुनिया में प्रथम और एक मात्र

अपने बच्चों की उच्च शिक्षा और सुदृढ़ भविष्य की सुनिश्चितता के लिए चिन्तित पालकों के लिए, भारतीय जीवन बीमा निगम आज, 23 जनवरी 2012 को, एक रामबाण बीमा पॉलिसी बाजार में पेश कर रहा है। इस अनूठी पॉलिसी का नाम है - जीवन अंकुर।

बीमा अभिकर्ता के रूप में मेरा बाईसवाँ वर्ष चल रहा है और अपने अब तक के ज्ञान, सूचनाओं और विश्वास के आधार पर कहने का साहस कर रहा हूँ कि ऐसी बीमा पॉलिसी दुनिया में किसी और बीमा कम्पनी के पास नहीं है। भारतीय जीवन बीमा निगम सहित तमाम बीमा कम्पनियों की तमाम बीमा पॉलिसियों में, पॉलिसीधारक की मृत्यु के बाद, पॉलिसी में नामित व्यक्ति को दावा राशि का भुगतान करने के बाद पॉलिसी समाप्त हो जाती है। किन्तु ‘जीवन अंकुर’ में पहली बार यह प्रावधान किया गया है कि पॉलिसीधारक की मृत्यु के बाद, नामित को पॉलिसी की रकम का भुगतान जारी रहने के दौरान यदि नामित व्यक्ति की भी मृत्यु हो जाए तो, स्वर्गवासी पॉलिसीधारक के विधिसम्मत उत्तराधिकारी को दावे की रकम का भुगतान किया जाए।

यह पॉलिसी, बच्चों की आर्थिक सुरक्षा के लिए अभिकल्पित (डिजाइन) की गई है। इसमें, बीमा सुरक्षा पिता/माता को प्रदान की जाती है जबकि भुगतान बच्चे को किया जाता है। पॉलिसी में नामित (नामिनी) के रूप में बच्चे का नामांकन अनिवार्य किया गया है।18 से 50 वर्ष की आयुवाले समस्त माता-पिता, अपने, 17 वर्ष तक की आयुवाले बच्चे/बच्चों के लिए यह पॉलिसी ले सकते हैं। पॉलिसी (और किश्त भुगतान) की न्यूनतम अवधि 8 वर्ष तथा अधिकतम अवधि 25 वर्ष है। न्यूनतम अवधि का निर्धारण, 18 में से बच्चे की वर्तमान आयु कम करके किया जाता है। उदाहरणार्थ यदि किसी बच्चे की आयु 3 वर्ष है तो पॉलिसी (और किश्त भुगतान) अवधि 15 वर्ष हो सकती है। ग्राहक चाहे तो यह अवधि कम की जा सकेगी किन्तु यह अवधि 8 वर्ष से कम नहीं होगी। इसे यूँ भी समझा जा सकता है कि यदि कोई पिता अपने 17 वर्षीय बच्चे के लिए यह पॉलिसी लेना चाहता है तो उसे 8 वर्ष के लिए ही यह पॉलिसी मिल सकेगी। यहाँ 18 में से बच्चे की आयु (17 वर्ष) करने पर एक वर्ष की अवधि की सुविधा पिता को नहीं मिल सकेगी। इसी प्रकार, यदि कोई बच्चा अभी पहले ही वर्ष में है तो उसका पिता अधिकतम 25 वर्ष की अवधि के लिए यह पॉलिसी ले सकता है किन्तु यदि वह चाहे तो इससे कम की अवधि भी तय कर सकता है किन्तु यह अवधि 8 वर्ष से कम नहीं होगी। जाहिर है कि बच्चे की अधिकतम आयु 25 वर्ष होते-होते पॉलिसी परिपक्व हो जाएगी।

पॉलिसी अवधि के दौरान पात्र पिता/माता के जीवन पर बीमा धन के बराबर जोखिम सुरक्षा उपलब्ध रहेगी। पॉलिसी अवधि पूरी होने पर, पॉलिसीधारक को बीमा धन की रकम तथा पॉलिसी अवधि के लिए घोषित निष्ठा आधिक्य (लॉयल्टी एडीशन) की रकम का भुगतान कर दिया जाएगा।

किन्तु पॉलिसी अवधि पूरी होने से पहले ही यदि पॉलिसीधारक की मृत्यु हो जाती है तो बीमा धन की रकम का भुगतान नामित (नामिनी) बच्चे को तत्काल किया जाएगा। यदि मृत्यु दुर्घटना से हुई है तो मूल बीमा धन के बराबर रकम का अतिरिक्त भुगतान भी किया जाएगा।

यहीं से पॉलिसी की उल्लेखनीय विशेषताएँ शुरु होती हैं।

पॉलिसीधारक की मृत्यु के बाद उपरोक्तानुसार भुगतान कर देने के बाद, पॉलिसीधारक की मृत्यु के बाद आनेवाली, पॉलिसी की वार्षिक तारीख से पॉलिसी परिपक्व होने से पहले वर्ष तक की, पॉलिसी की वार्षिक तारीख पर, प्रति वर्ष, बीमा धन की दस प्रतिशत रकम का भुगतान, नामित बच्चे को किया जाता रहेगा और पॉलिसी परिपक्वता दिनांक को सम्पूर्ण बीमा धन तथा पॉलिसी अवधि के निष्ठा आधिक्य (लॉयल्टी एडीशन) की रकम का भुगतान, नामित बच्चे को एक बार फिर किया जाएगा।

पॉलिसी पूरी होने से पहले यदि नामित बच्चे की मृत्यु हो जाए तो पॉलिसीधारक अपने दूसरे बच्चे को अथवा अन्य किसी व्यक्ति को नामित (नामिनी) बना सकता है जो, पॉलिसीधारक की मृत्यु के बाद उपरोक्तानुसार रकम प्राप्त करने का अधिकारी होगा। पॉलिसीधारक की मृत्यु के बाद, पॉलिसी में उल्लेखित बीमा धन की रकम प्राप्त करने के बाद और प्रति पॉलिसी वर्ष पर, बीमा धन की दस प्रतिशत रकम प्राप्त करना शुरु करने के बाद यदि नामित बच्चे अथवा नामित अन्य व्यक्ति की भी मृत्यु हो जाए तो पॉलिसीधारक के विधिसम्मत उत्तराधिकारी को शेष अवधि के लिए उल्लेखित वार्षिक किश्तों की रकम तथा परिपक्वता पर बीमा धन और निष्ठा आधिक्य (लॉयल्टी एडीशन) की रकम का भुगतान किया जाएगा। याने, पॉलिसीधारक की मृत्यु के बाद, पॉलिसी में नामित बच्चा जीवित रहे तो वह लाभान्वित होगा और दुर्भाग्य से वह भी जीवित न रह पाया तो पॉलिसीधारक के विधिसम्मत उत्तराधिकारी को शेष सारी रकम का भुगतान सुनिश्चित रूप से मिलेगा ही मिलेगा। यही व्यवस्था, इस पॉलिसी को दुनिया की सारी बीमा कम्पनियों की तमाम पॉलिसियों से अलग बनाती है।

इसे उदाहरण से इस प्रकार समझा जा सकता है -

अपने तीन वर्षीय बेटे के लिए मैंने एक लाख रुपयों की यह पॉलिसी ली। मेरी इच्छा रही कि जब मेरा बेटा, 17 वर्ष की उम्र में बारहवी पास कर उच्च शिक्षा के लिए किसी कॉलेज का दरवाजा खटखटाए तब उसके लिए मेरे पास यह रकम उपलब्ध हो। इसलिए मैंने पॉलिसी की अवधि 14 वर्ष तय की। 14 वर्षों बाद मुझे मूल बीमाधन एक लाख रुपये तथा 14 वर्षों की, निष्ठा आधिक्य (लॉयल्टी एडीशन) की रकम (अनुमानित 60 हजार रुपये) मिल जाएगी।

यदि इन 14 वर्षों के दौरान मेरी मृत्यु हो जाती है तो मूल बीमाधन की रकम एक लाख रुपयों का भुगतान मेरे बेटे को हो जाएगा। यदि मेरी मृत्यु दुर्घटना से होती है तो एक लाख रुपयों का अतिरिक्त भुगतान (याने कुल दो लाख रुपये) मेरे बेटे को कर दिया जाएगा। मान लें कि पॉलिसी लेने के चार वर्षों बाद मेरी मृत्यु हुई। याने पॉलिसी के 10 वर्ष बाकी रहे। चूँकि मेरी मृत्यु हो चुकी है इसलिए प्रीमीयम तो बन्द हो ही जाएगी किन्तु मेरी मृत्यु के बाद आनेवाली, पॉलिसी की प्रत्येक वार्षिक तारीख पर मेरे बेटे को 10 हजार रुपयों का भुगतान मिलेगा और जिस दिन पॉलिसी पूरी होगी उस दिन मूल बीमाधन एक लाख रुपये तथा 14 वर्षों की, निष्ठा आधिक्य (लॉयल्टी एडीशन) की रकम (जो मैंने 60 हजार अनुमानित बताई है) का भुगतान मेरे बेटे को किया जाएगा।

किन्तु, पॉलिसी अवधि पूरी होने से पहले और पॉलिसी की प्रत्येक वार्षिक तारीख को उपरोक्तानुसार भुगतान लेते हुए यदि मेरे बेटे की भी मृत्यु हो जाती है तो शेष वर्षों के लिए, मेरे कानूनी वारिस को, पॉलिसी की प्रत्येक वार्षिक तारीख को दस हजार रुपयों का भुगतान मिलेगा और पॉलिसी पूरी होने की तारीख पर उपरोक्तानुसार लगभग 1 लाख 60 हजार रुपयों का भुगतान मिलेगा।

पॉलिसी पूरी होने से पहले, मेरे जीते जी यदि मेरे बेटे की मृत्यु हो जाए तो मैं अपने किसी अन्य बच्चे को या अपने किसी रिश्तेदार को नामित (नामिनी) बना सकता हूँ जो मेरे बेटे के अनुसार ही, उपरोक्तानुसार समूचा भुगतान प्राप्त करने का अधिकारी होगा और पॉलिसी पूरी होने से पहले उसकी मृत्यु हो जाने की दशा में मेरा कानूनी वारिस उपरोक्तानुसार भुगतान प्राप्त कर सकेगा।

इस पॉलिसी के लिए न्यूनतम बीमाधन एक लाख रुपये है। अधिकतम की कोई सीमा नहीं है किन्तु वह आपकी आय और आयु से सम्बद्ध होगी। किश्त भुगतान वार्षिक, छःमाही, तिमाही, मासिक (वेतन बचत योजना और ई सी एस) आधार पर किया जा सकता है। चुकाई गई किश्तों की रकम पर आय कर की छूट मिलेगी और पॉलिसी से प्राप्त होनेवाली रकम पूरी तरह आयकर से मुक्त होगी।

हाँ, भारतीय जीवन बीमा निगम के ग्राहकों को पहली बार अपनी किश्त के अतिरिक्त ‘सेवा शुल्क’ चुकाना पड़ेगा। सेवा शुल्क की दर इस समय 10.3 प्रतिशत है। इस पर भा. जी. बी. नि. का कोई नियन्त्रण नहीं है क्यों कि इसे बढ़ाना, कम करना, आगे जारी रखना न रखना - सब कुछ केन्द्र सरकार के नियन्त्रण में है।

यदि आपकी आयु 50 वर्ष के भीतर है और आपके बच्चे/बच्चों की आयु 17 वर्ष से कम है तो अपनी आर्थिक क्षमतानुसार यह पॉलिसी लेने पर विचार अवश्य कीजिए।

आपकी कोई जिज्ञासा हो तो अवश्य सूचित कीजिएगा। ब्लॉग पर तो मैं उपलब्ध हूँ ही। आप चाहें तो ई-मेल पर अथवा मोबाइल नम्बर 098270 61799 पर भी मुझसे पूछताछ कर सकते हैं।

7 comments:

  1. एक बार पुनः पढ़कर समझते हैं, रोचक लग रही है।

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  2. जानकारी के लिए आभार. हमारी पात्रता तो कब की समाप्त हो चली है.

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  3. इस 'तथाकथित' पॉलिसी का बड़ा-बड़ा, अखबारों में पूरे पृष्ठ का विज्ञापन देखा था तो एक घेला समझ में नहीं आया था कि इस नई पॉलिसी में है क्या बला!

    आपने इसे स्पष्ट कर दिया धन्यवाद.

    इतनी अच्छी सुविधाओं वाली पॉलिसी को विज्ञापित करते समय, आपने जैसे उदाहरण से समझाया है, वैसा ये क्यों नहीं करते?

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  4. वाह ......आपने तो बड़े बढ़िया तरीके से समझाया!

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  5. Good Policy thx

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  6. vishnu ji,maine may 2012 me jivan ankur liya, parantu mere bete ka sex unhone daughter likh diya, agent ke pichhe pade pade ab jaa kar 13 june 2013 ko unhone hath se use son likh kar de diya aur ek latter sath me de diya ki (we have registered nomination/change of nomination in favore of azaan relationship son)
    kya ye uchit hai ?ya isake liye mujhe aage koi karvahi karane ki zarurat hai?
    kyuki mujhe nahi pata file me chenge kiya ya nahi?
    meri policy number 894806612 lic mumbai) hai
    kripya apani rai den

    dhanyavad


    javed ahmed
    javedcry@gmail.com

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  7. यदि सब कुछ वैसा ही है जैसा आपने लिखा है तो बिलकुल चिन्‍ता मत कीजिए। बस, वह पत्र सुरक्षित रखिएगा जिसमें इस परिवर्तन की सूचना दी गई है।

    ऐसा पत्र तभी जारी किया जाता है जब मूल अभिलेख में तदनुसार परिवर्तन कर लिया गया हो।

    और कुछ जानना हो और लम्‍बी बात करनी हो तो मुझे मोबाइल नम्‍बर 098270 61799 पर सम्‍पर्क कर लें।

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