इन्दौर के सिन्धी समुदाय को सलाम

सिन्धी समुदाय ने एक बार फिर मुझे अपना ‘मुरीद’ बना लिया है। ‘एक बार फिर’ से ही स्पष्ट है कि मैं पहले से ही इस समुदाय का ‘मुरीद’ बना हुआ हूँ-कम से कम दो बातों के लिए।

पहली - इस समुदाय का पुरुषार्थ। विभाजन से विस्थापित इस समुदाय ने जीवन संघर्ष की जो जिजीविषा बरती, वह सदैव मुझे रोमांचित करती रही है। दूसरी - इस समुदाय के लोगों का शुध्द हिन्दी उच्चारण। अधिसंख्य हिन्दी फिल्मों में कोई न कोई ‘सिन्धी चरित्र’ हमारे सामने परोसा जाता रहा है और उस चरित्र का उच्चारण ‘हास्य’ पैदा करने का निमित्त बनाया जाता है। ऐसे प्रत्येक चरित्र ने, प्रत्येक फिल्म में, प्रत्येक बार मुझे अपनी ही नजरों में शर्मिन्दा किया है। जिस ‘सिन्धी उच्चारण’ को हम उपहास का विषय बनाते हैं, वही उच्चारण ‘हिन्दी का शुध्द उच्चारण’ है, हममें से कितने लोग इस बात को जानते हैं?

हिन्दी की अहमन्यता से ग्रस्त हम हिन्दी भाषी, हिन्दी के अशुध्द उच्चारण के स्थायी अपराधी हैं, इस ओर हमने कभी ध्यान दिया? हम हिन्दी की दुहाइयाँ देते हैं, उसके ध्वज वाहक बनते हैं और उसकी दुर्दशा पर दुख व्यक्त करते हैं। किन्तु हमारा दोगलापन यही है कि जो सिन्धी समुदाय हिन्दी का शुध्द उच्चारण करता है, उसे उपहास भाव से देखते हैं! अपने अपराध को छिपाने का यह अनूठा उपाय हमने स्थायी रूप से अपना रखा है।

‘रामलाल’ को हम हिन्दी भाषी कभी ‘रामलाल’ नहीं बोलते। हम सदैव ही ‘राम्लाल्’ उच्चारित करते हैं। इसके सर्वथा विपरीत, समूचा सिन्धी समुदाय ‘रा म ला ल’ उच्चारित करता है। प्रत्येक अक्षर पर किया गया उनका ‘शब्दाघात’ हमारे लिए हास्य का विषय होता है। मेरा आश्चर्य तो यह कि अपनी इस विशेषता से खुद सिन्धी समुदाय के लोग परिचित नहीं हैंै। अपने सिन्धी मित्रों को जब मैं यह विशेषता बताता हूँ तो वे मुझे आश्चर्य से देखते हैं। सो, सिन्धी समुदाय की इस विशेषता का मुरीद मैं पहले ही दिन से बना हुआ हूँ।

इसी समुदाय ने अभी-अभी, एक बार फिर मुझे अपना मुरीद बनाया है। कल के सान्ध्य अखबारों ने सूचना दी कि इन्दौर के सिन्धी समुदाय की समस्त पंचायतों ने निर्णय लिया है कि राजनीतिक व्यक्तियों को समाज की संस्थाओं का पदाधिकारी नहीं बनाया जाएगा। अर्थात् विभिन्न दलों में ‘दिग्गज‘ की हैसियत प्राप्त सिन्धी सज्जन अब न तो समाज के निर्णयों को प्रभावित कर पाएँगे और न ही सिन्धी समुदाय के आयोजनों/कार्यक्रमों में, मंचों पर नजर आएँगे। वे अब मंचों के सामने बिछी जाजम/कुर्सियों पर बैठे नजर आएँगे।


मेरे तईं यह ‘क्रान्तिकारी निर्णय’ है। राजनीति को उसकी औकात बताने की दिशा में इन्दौर के सिन्धी समुदाय ने यह ऐसा कदम उठाया है जो सारे देश को न केवल प्रेरित करेगा अपितु ‘राजनीति और राजनेताओं से उपजे त्रास’ से मुक्ति दिलाने की कामना कर रहे लोगों को हौसला भी देगा।


राजनीति को हमने वह सर्वोच्च प्राथमिकता और महत्ता दे दी कि वह आज सबसे बड़ा प्रदूषण बन कर, ‘अमरबेल’ की तरह छा गई है। अपने ही बनाए नेताओं को हम ही इतनी स्वच्छन्दता दे देते हैं कि वे उच्छृंखल बन कर कब हमारे नासूर बन जाते हैं, पता ही नहीं चलता। इसका एक ही उपाय होता है - अपने नेताओं को नियन्त्रित करना, उन पर अंकुश लगाना।

इन्दौर के सिन्धी समुदाय का यह निर्णय मुझे इसी दिशा में बढ़ाया कदम अनुभव हो रहा है। नेता को जन सामान्य की तरह, भीड़ का हिस्सा बनना कभी पसन्द नहीं होता। आम आदमी की दुहाई दे कर वह सदैव ही प्रमुखता प्राप्त करना चाहता है। सो, इन्दौर के सिन्धी समुदाय के इस निर्णय के बाद, ‘नेता’ को आम आदमी की तरह शरीक होना पड़ेगा जिसके लिए ‘वह’ शायद ही तैयार हो। इस ‘जलालत’ से बचने का एक ही रास्ता रहता है - ऐसे आयोजन/कार्यक्रम में जाओ ही मत। याने, अब ‘नेता’ अनुपस्थित रहेगा। नेता की अनुपस्थिति कितनी सुविधाएँ, कितनी अनुकूलताएँ प्रदान करती है, यह हम सब जानते हैं।


सो, मैं तो इन्दौर के सिन्धी समुदाय को प्रणाम करता हूँ। राजनीति को परे धकेल कर उसे उसकी औकात बताना आज का सबसे बड़ा और सर्वाधिक दुरुह ‘पुरुषार्थ‘ बन गया है।

इन्दौर के सिन्धी समुदाय ने इस पुरुषार्थ का प्रारम्भ कर दिया है।

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5 comments:

  1. सिन्धी समुदाय के इस पहल की जितनी भी प्रशंशा की जाए कम है. जहाँ तक उच्चारण का प्रश्न है हिंदी भाषी राम के म में जो अ है उसे खा जाते हैं. यही हाल अंतिम अक्षर का भी होता है. ऊपर से तुर्रा यह कि हम सही हैं.

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  2. यद्यपि सवच्छन्द एवं उचछ्रांखल इन शिव-गाणों ( नन्दिओ ) पर नियंत्रण संदेहास्पद है . फिर भी
    आशा की जाना चाहिए कि इस क्रांतिकारी निर्णय कॅया परिपालन अपने संपूर्ण अर्थों मे होगा
    और दहेज-विरोधी संकल्पों-सी गति इस क्रांतिकारी संकल्प की नहीं होने दी जाएगी .

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  3. यद्यपि सवच्छन्द एवं उचछ्रांखल इन शिव-गाणों ( नन्दिओ ) पर नियंत्रण संदेहास्पद है . फिर भी
    आशा की जाना चाहिए कि इस क्रांतिकारी निर्णय कॅया परिपालन अपने संपूर्ण अर्थों मे होगा
    और दहेज-विरोधी संकल्पों-सी गति इस क्रांतिकारी संकल्प की नहीं होने दी जाएगी .

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  4. इन्दौर के सिन्धी समुदाय की समस्त पंचायतों की ओर से अच्‍छी पहल हुई है .... इससे सबको सीख लेनी चाहिए।

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