केंसर कवर: बीमा भी और पुण्य लाभ भी
आम आदमी की ‘जीवन रक्षक’
‘जीवन वृद्धि’ - एक तलाश खत्म
जीवन अंकुर : सम्भवतः दुनिया में प्रथम और एक मात्र
यूलिप पॉलिसियाँ: जन्नत की हकीकत
यूलिप पॉलिसियों पर ‘सेबी’ और ‘इरडा’( भारतीय बीमा विनिमायक एवम् विकास प्राधिकरण अर्थात् आई आर डी ए) के बीच मचे द्वन्द्व में कौन सही है और कौन गलत, इससे परे हटकर, यूलिप पॉलिसियों की संरचना और इनकी सामाजिक-आर्थिक भूमिका पर विचार करने का यह ठीक प्रसंग और अवसर है।
बीमा क्षेत्र में निजी कम्पनियों के आगमन से पहले यूलिप पॉलिसियाँ इतनी प्रचारित और चर्चित नहीं थीं। तब केवल भारतीय यूनिट ट्रस्ट ही ‘यूलिप’ नाम से अपनी एक योजना बेचा करता था। किन्तु बीमा क्षेत्र में आई निजी कम्पनियों ने समूचा परिदृश्य ही बदल दिया। इन कम्पनियों ने भारतीय जीवन बीमा निगम द्वारा बेची जा रही पारम्परिक जीवन बीमा योजनाओं को परे धकेल पर यूलिप पॉलिसियों का बोलबाला कायम कर दिया। ‘यूलिप’ में निवेशित राशि दो भागों में बँटती है। एक भाग होता है जीवन बीमा प्रीमीयम वाला जो नाम मात्र का होता है। शेष बड़ा भाग स्टॉक मार्केट में निवेश किया जाता है। मोटे तौर पर ‘यूलिप’ पूरी तरह से स्टॉक मार्केट आधारित और केन्द्रित होती हैं। इन पॉलिसियों के इसी ‘चरित्र’ के आधार पर सेबी ने इन पर प्रतिबन्ध लगाया।
इन पॉलिसियों के निवेशित राशि पर बाजार की जोखिम सदैव हावी रहती है जिसे ग्राहक वहन करता है, बीमा कम्पनियों की कोई जवाबदारी नहीं रहती। वे तो ग्राहक से पैसा लेकर उसे उसकी ओर से बाजार में लगा देती हैं। किन्तु कम्पनियाँ यह काम मुत में नहीं करतीं। इस काम के लिए वे फण्ड प्रबन्धन शुल्क, पॉलिसी प्रबन्धन शुल्क, फण्ड आबण्टन शुल्क जैसे विभिन्न शुल्क ग्राहक से वसूल करती हैं। इसके अतिरिक्त एजेण्ट को दिया जाने वाला कमीशन और निवेशित रकम को एक फण्ड से दूसरे फण्ड में स्थानान्तरित करने (स्विच ओव्हर) का शुल्क भी ग्राहक की जेब से ही जाता है। इनमें से कुछ शुल्कों की दर तो प्रति पॉलिसी के आधार पर होती है और कुछ की दर फण्ड की रकम के प्रतिशत के मान से। अधिकांश शुल्कों की रकम प्रथम वर्ष में सर्वाधिक, दूसरे और तीसरे वर्ष में उससे तनिक कम तथा चैथे वर्ष से लेकर शेष पॉलिसी अवधि तक उससे भी कम (अर्थात् सबसे कम) होती है। इसे यूँ समझा जा सकता है कि दस हजार रुपये निवेश करनेवाले ग्राहक की रकम में से पहले वर्ष लगभग तीन हजार रुपये काट लिए जाते हैं और शेष सात हजार रुपये ही निवेश के लिए उपलब्ध रहते हैं। ग्राहक दस हजार की गणित में रहता है जबकि वास्तविकता सात हजार की रह जाती है। जाहिर है कि ग्राहक की रकम में से प्रथम तीन वर्षों में सर्वाधिक कटौती होती है।
यूलिप पॉलिसियों के आक्रामक विपणन प्रचार के कारण, पॉलिसी शर्तों के मुताबिक न्यूनतम रकम निवेश करनेवाले औसत मध्यमवर्गीय लोग सर्वाधिक आकर्षित होते हैं। बीमा कम्पनियों के आँकड़े ही बता देंगे कि दस-दस हजार रुपये वाले निवेशक करोड़ों में और लाखों रुपये वाले निवेशक लाखों में होंगे। बीमा कम्पनियाँ जो आँकड़े प्रचारित करती हैं, वे लाखों के निवेशवाले होते हैं। दस-दस हजार रुपये लगानेवाला औसत मध्यमवर्गीय ग्राहक मान लेता है कि उसे बड़े ग्राहक के आनुपातिक लाभ मिलेंगे। वह रातों रात लखपति/करोड़पति बनने का सपना पाल लेता है। उस समय उसे पता ही नहीं होता कि विभिन्न शुल्कों के नाम पर उसके दस हजार रुपयों में से जितनी रकम काटी जाएगी, उतनी ही रकम एक लाख रुपये लगानेवाले ग्राहक से भी काटी जाएगी। इसके अतिरिक्त प्रति वर्ष बीमा प्रीमीयम भी काटी जाएगी जो निवेशक की बढ़ती उम्र के कारण प्रति वर्ष बढ़ती जाएगी। याने, स्टॉक मार्केट में लगाने के लिए छोटे निवेशक की रकम कम और बड़े निवेशक की रकम अधिक उपलब्ध रहेगी। इसी पेंच के कारण छोटा निवेशक सदैव मात खाता रहता है। बीमा एजेण्ट भी ग्राहकों को यह पेंच पूरी तरह नहीं समझाते। शायद वे खुद भी नहीं जानते हों। इस प्रकार यूलिप पॉलिसियाँ ‘पैसा पैसे को खींचता है’ पाली लोकोक्ति को ही साबित करती हैं।
किसी भी पॉलिसी को तीन वर्ष बाद बन्द कर ग्राहक अपना पैसा वापस ले सकता है। बीमा एजेण्ट इस स्थिति को अतिरिक्त आकर्षण के रूप में प्रस्तुत करते हैं। ग्राहक को लगता है कि उसे तो कुल तीन वर्ष तक ही रकम जमा करनी है। तीन वर्ष पूरे होते ही जब वह अपनी रकम लेने पहुँचता है तो उसके पैरों से जमीन खिसक जाती है जब उसे मालूम होता है कि उसे उसकी मूल रकम भी नहीं नहीं मिल पा रही है। प्रथम तीन वर्षों की शुल्क कटौती इतनी अधिक होती है कि ग्राहक की मूल पूँजी भी उसे मिल जाए तो गनीमत। वस्तुतः यूलिप पॉलिसियों का पूर्ण लाभ लेने के लिए ग्राहक को 6 से 9 वर्ष की अवधि का धैर्य रखना चाहिए। किन्तु इन पॉलिसियों की बिक्री ही तीन वर्षों की अवधि बताकर की जाती है। जबकि यूलिप पॉलिसियों का आधारभूत ‘फण्डा’ होता है - अपेक्षित लाभ लेने के लिए अधिक रकम, अधिक समय तक रखें और धैर्यपूर्वक प्रतीक्षा करें।
बीमा कम्पनियों को और सरकार को यूलिप पॉलिसियाँ सदैव ही अनुकूल रहती हैं। चूँकि सारी जोखिम ग्राहक ही वहन करता है सो कम्पनियाँ बेफिक्र रहती हैं। वे अपना स्थापना खर्च (अधिकारियों/कर्मचारियों के भारी भरकम पेकेज की रकम, वेतन-भत्ते) निकालने के बाद वाला लाभांश ही ग्राहक को देती हैं। इसे यूँ भी कहा जा सकता है कि इन कम्पनियों के अधिकारियों/कर्मचारियों के लाखों के पेकेज का भुगतान दस-दस हजार रुपये लगानेवाले छोटे निवेशक करते हैं। सरकार भी इन पाॅलिसियों को भरपूर प्रोत्साहित करती है क्यों कि इन पॉलिसियों का पैसा स्टाॅक मार्केट में लगता है और हम देख रहे हैं कि 1991 से लागू की गई ‘एलपीजी’ वाली हमारी आर्थिक नीतियाँ केवल बाजार को पोषित-पल्लवित कर रही हैं और बाजार पर ही निर्भर हैं। गोया, ‘धनवान अधिक धनवान और गरीब अधिक गरीब’ की अवधारण के तहत पूरे देश को बाजार में बदलने की सरकारी नीतियों का खर्चा देश के छोटे निवेशकों से वसूल किया जा रहा है।
यूलिप पॉलिसियों के लाभ-हानि का आकलन करने पर स्थिति बहुत उत्साहित करनेवाली नहीं लगती। इनके छोटे निवेशकों को लाभ कम और नुकसान अधिक मिलते दिखाई देते हैं। ये लोगों को रोतों रात लखपति बनने का सपना दिखाकर उन्हें लालची, सट्टेबाज और अकर्मण्य बनाती दिखती हैं। इनका सबसे बड़ा नुकसान यह है कि ये बीमा की मूलभूत अवधारण को ही निरस्त करती हैं जो कि किसी भी बीमा कम्पनी की प्रारम्भिक, मुख्य और एकमात्र गतिविधि होनी चाहिए। तीन वर्ष बाद अपनी रकम निकालने के लालच में ग्राहक बीमा सुरक्षा से वंचित हो जाता है। जब वह नई पॉलिसी लेता है तो उसकी उम्र बढ़ जाने के कारण उसकी बीमा प्रीमीयम भी बढ़ जाती है और तीन साल बाद पॉलिसी बन्द करने के क्रम के चलते एक स्थिति यह आ जाती है कि ग्राहक को बीमा मिलना ही सम्भव नहीं रह जाता।
तीन वर्ष बाद पॉलिसी बन्द कराने की सुविधा का उपयोग बीमा कम्पनियाँ प्रायः ही अपने पक्ष में करती रहती हैं। उनके पास पूरा रेकार्ड रहता है कि किस ग्राहक की पॉलिसी को तीन वर्ष पूरे हो रहे हैं। वे अपने एजेण्टों को ऐसे ग्राहकों के पास भेज कर उन्हें प्रेरित करती हैं कि ग्राहक अपनी मौजूदा पॉलिसी बन्द कर यही पैसा किसी नई यूलिप योजना में लगा दे। पॉलिसी की संरचना और चरित्र से अनजान ग्राहक अपने एजेण्ट पर भरोसा कर वैसा ही कर लेता है। ऐसे में कम्पनी को न तो नया ग्राहक मिला और न ही नया निवेश किन्तु उसकी बिक्री के आँकड़े बढ़ गए और एजेण्ट को पूरा कमीशन मिल गया। ग्राहक को तो पता ही नहीं चलता कि वह इस खेल में आर्थिक मोहरे के रूप में प्रयुक्त कर लिया गया है। बीमा क्षेत्रों में इसे ‘रिसायकलिंग’ (पुनर्निवेश) कहा जाता है। यदि इन कम्पनियों से आँकड़े लिए जाएँ तो मालूम पड़ेगा कि अस्सी प्रतिशत यूलिप पॉलिसियाँ इस प्रकार ‘रिसायकल’ (पुनर्निवेशित)कर दी गई हैं।
यूलिप पॉलिसियों की बिक्री के लिए बीमा कम्पनियाँ केवल इरडा के अधीन ही रहें या उन्हें सेबी से भी पंजीयन लेना पड़ेगा, इससे परे हटकर इन पॉलिसियों के सामाजिक प्रभाव और लोगों को बीमित किए जाने की मूल अवधारणा के परिप्रेक्ष्य में अवश्य ही विशद् विवेचन किया जाना चाहिए।
-----
आपकी बीमा जिज्ञासाओं/समस्याओं का समाधान उपलब्ध कराने हेतु मैं प्रस्तुत हूँ। यदि अपनी जिज्ञासा/समस्या को सार्वजनिक न करना चाहें तो मुझे bairagivishnu@gmail.com पर मेल कर दें। आप चाहेंगे तो आपकी पहचान पूर्णतः गुप्त रखी जाएगी। यदि पालिसी नम्बर देंगे तो अधिकाधिक सुनिश्चित समाधान प्रस्तुत करने में सहायता मिलेगी।
यदि कोई कृपालु इस सामग्री का उपयोग करें तो कृपया इस ब्लाग का सन्दर्भ अवश्य दें । यदि कोई इसे मुद्रित स्वरूप प्रदान करें तो कृपया सम्बन्धित प्रकाशन की एक प्रति मुझे अवश्य भेजें । मेरा पता है - विष्णु बैरागी, पोस्ट बाक्स नम्बर - 19, रतलाम (मध्य प्रदेश) 457001.
बच्चों की शिक्षा/ विवाह के लिए बीमा पॉलिसी
शिक्षा आज के सर्वाधिक मँहगी आवश्यकताओं में से एक है। परिवार में सन्तान के आते ही उसकी उच्च शिक्षा अथवा (कन्या जन्म के मामले में उसके) विवाह की चिन्ता सताने लगती है। ऐसे में, भारतीय जीवन बीमा निगम की ‘शिक्षा/विवाह बन्दोबस्ती पॉलिसी’ (तालिका 90) पिता/माता को इस चिन्ता से मुक्त करने में सहायक होती है। भारतीय जीवन बीमा निगम की यह पॉलिसी उन लोगों के लिये ‘आदर्श पॉलिसी’ है जो अपनी सन्तान की शिक्षा अथवा विवाह के लिये एक सुनिश्चित समय पर सुनिश्चित आर्थिक व्यवस्था करना चाहते हैं।
पॉलिसी अवधि के दौरान पॉलिसीधारक के जीवन पर बीमा धन के बराबर रिस्क कवरेज उपलब्ध रहता है और दुर्घटना-मृत्यु की स्थिति में यह कवरेज बीमा धन से दुगुना होता है । पॉलिसी अवधि पूरी होने पर पॉलिसीधारक को मूल बीमा धन की राशि तथा पॉलिसी अवधि की बोनस राशि (तथा अन्तिम-अतिरिक्त बोनस राशि, यदि कोई देय हो तो) का भुगतान किया जाता है ।
पॉलिसी अवधि के दौरान यदि दुर्भाग्यवश पॉलिसीधारक की मृत्यु हो जाए तो -
1. सामान्य मृत्यु की दशा में नामित व्यक्ति को तत्काल तो कोई भुगतान नहीं मिलेगा किन्तु पॉलिसी की अवधि पूरी होने के दिनांक को उपरोक्त वर्णित समस्त धन राशि (अर्थात् मूल बीमा धन की रकम तथा सम्पूर्ण पॉलिसी अवधि की बोनस राशि तथा अन्तिम-अतिरिक्त बोनस राशि (यदि कोई देय हो तो) का भुगतान नामित व्यक्ति को मिलेगा ।
2. दुर्घटना मृत्यु की दशा में मूल बीमा धन के बराबर राशि का भुगतान नामित व्यक्ति को तत्काल किया जाएगा तथा पॉलिसी अवधि पूरी होने पर उपरोक्त वर्णित समस्त रकम नामित व्यक्ति को पुनः भुगतान की जाएगी ।
अर्थात्, पॉलिसी अवधि पूरी होने से पहले, पॉलिसीधारक की अकस्मात मृत्यु के बाद उसकी सन्तान की शिक्षा/विवाह के लिये पॉलिसीधारक द्वारा निर्धारित की गई अवधि पर एक सुनिश्चित रकम उपलब्ध कराने की सुनिश्चित व्यवस्था यह पॉलिसी उपलब्ध कराती है ।
उदाहरण - 27 वर्षीय ‘श्रीमान् क’ आज एक बिटिया के बाप बने हैं। उनका अनुमान है कि उसके 23वें वर्ष में वे उसका विवाह कर देंगे। इस हेतु वे 23 वर्ष की अवधि के लिए 5 लाख रुपये बीमाधन की यह पॉलिसी लेते हैं। इसकी वार्षिक प्रीमीयम होगी रुपये 20,088/- अर्थात् वे 23 वर्षों तक, 20,088/- रुपये प्रति वर्ष चुकाएँगे। पॉलिसी अवधि पूरी होने पर उन्हें परिपक्वता राशि रुपये 13,37,000 (अनुमानित) का भुगतान मिलेगा। इस राशि में मूल बीमाधन की रकम रुपये 5 लाख, 23 वर्षों के बोनस की अनुमानित रकम रुपये 5,52,000 तथा अन्तिम-अतिरिक्त बोनस की अनुमानित रकम रुपये 2,85,000 शामिल है। (बोनस की गणना, भारतीय जीवन बीमा निगम द्वारा वर्ष 2007-08 के लिए घोषित बोनस दरों के आधार पर की गई है।)
‘श्रीमान् क’ को, किश्तों की रकम पर आय कर अधिनियम की धारा 80 सी के अन्तर्गत आय कर छूट मिलेगी तथा परिपक्वता पर मिलने वाली सम्पूर्ण राशि, आय कर अधिनियिम की धारा 10 (10) (डी) के अन्तर्गत आय कर से मुक्त होगी।
इस 23 वर्षों की अवधि के दौरान ‘श्रीमान् क’ के जीवन पर सामान्य मृत्यु की दशा में 5 लाख रुपयों का तथा दुर्घटना मृत्यु की दशा में 10 लाख रुपयों का रिस्क कवरेज उपलब्ध रहेगा। अर्थात् 23 वर्ष की अवधि पूरी होने से पहले यदि, परिवार के दुर्भाग्य से ‘श्रीमान् क’ की मृत्यु हो गई तो -
(1) सामान्य मृत्यु होने पर, ‘श्रीमान् क’ के नामित व्यक्ति को तत्काल कोई भुगतान नहीं मिलेगा। चूँकि बीमित व्यक्ति (अर्थात् ‘श्रीमान् क’) की मृत्यु हो चुकी है सो प्रीमीयम जमा कराने का कोई प्रश्न ही नहीं उठता। किन्तु शेष अवधि के लिए पॉलिसी पूरी तरह प्रभावी मानी जाएगी (अर्थात्, उसे बोनस की पात्रता मिलती रहेगी) और निर्धारित परिपक्वता दिनांक को, ‘श्रीमान् क’ के नामित व्यक्ति को उपरोल्लेखित राशि (अनुमानित 13 लाख 37 हजार रुपये) का भुगतान किया जाएगा।
(2) यदि ‘श्रीमान् क’ की मृत्यु किसी दुर्घटना के कारण हुई है तो मूल बीमा धन (रुपये 5 लाख) के बराबर की रकम का भुगतान, ‘श्रीमान् क’ के नामित व्यक्ति को तुरन्त कर दिया जाएगा और पॉलिसी की निर्धारित परिपक्वता दिनांक को, ‘श्रीमान् क’ के नामित व्यक्ति को उपरोल्लेखित राशि (अनुमानित 13 लाख 37 हजार रुपये) का भुगतान फिर से किया जाएगा।
विशेषता -
इस पॉलिसी का भुगतान या तो (परिपक्वता पर) स्वयम् पॉलिसीधारक को मिलेगा या फिर (पॉलिसीधारक की मृत्यु हो जाने की दशा में) उसके नामित व्यक्ति को मिलेगा।
सामान्य मृत्यु के बाद तत्काल भुगतान न मिलने से, बीमा से मिलने वाली रकम के अनुचति उपयोग (यथा मृत्यु-भोज जैसी उत्तर क्रियाओं में) होने की आशंका नहीं रह पाती है।
भुगतान सन्तान को न मिलने से भी, उसके अनुचित उपयोग की आशंक स्वतः नष्ट हो जाती है।
सन्तान के विवाह के लिए अवधि का अनुमान ही लगाया जा सकता है। यदि बीमा पुत्री का हो और पॉलिसी परिपक्वता से पहले ही उसका विवाह हो जाए तो, विवाहोपरान्त, पॉलिसी की परिपक्वता रकम पर पुत्री का ससुराल पक्ष अधिकार जता सकता है। किन्तु इस पॉलिसी में बीमा चूँकि पिता अथवा माता का होता है, सन्तान का नहीं, इसलिए, इस पॉलिसी की परिपक्वता राशि पर, पुत्री के ससुराल पक्ष द्वारा अधिकार जताने की आशंकाएँ भी स्वतः ही नष्ट हो जाती हैं।
उच्च शिक्षा में सहायक -
बच्चों की उच्च शिक्षा हेतु सुनिश्चित आर्थिक व्यवस्थाएँ इस पॉलिसी के माध्यम से की जा सकती हैं।
आयु के 17वें वर्ष में बच्चा, उच्च शिक्षा के दरवाजे पर खड़ा होता है। आज के चलन के अनुसार उसे अगले 6 वर्ष तो पढ़ना ही है - बी।ई. (अथवा ऐसे ही किसी स्नातक पाठ्यक्रम के लिए) 4 वर्ष और एम. बी. ए. के लिए 2 वर्ष। ऐसे मामलों में व्यक्ति को एक-एक लाख रुपये बीमा धन की 6 पॉलिसियाँ लेनी चाहिए (क्षमता तथा आवश्यकतानुसार अधिक बीमा धन की पॉलिसियाँ भी ली जा सकती हैं) जिनकी अवधि क्रमशः 17 वर्ष, 18 वर्ष, 19 वर्ष, 20 वर्ष, 21 वर्ष और 22 वर्ष होंगी।
17 वर्ष पूरे होने पर लगभग 1 लाख 71 हजार रुपये, 18 वर्ष पूरे होने पर लगभग 1 लाख 73 हजार रुपये, 19 वर्ष पूरे होने पर लगभग 1 लाख 78 हजार रुपये 20 वर्ष पूरे होने पर लगभग 1 लाख 78 हजार 500 रुपये, 21 वर्ष पूरे होने पर लगभग 1 लाख 83 हजार रुपये और 22 वर्ष पूरे होने पर लगभग 1 लाख 85 हजार 500 रुपये मिलेंगे। (अधिक बीमा धन की पॉलिसियाँ लेने पर यह रकम उसी अनुपात में अधिक मिलेगी।) अर्थात् बच्चे की शिक्षा के लिए न केवल प्रति वर्ष रकम उपलब्ध रहेगी अपितु प्रति वर्ष यह बढ़ती ही जाएगी।
जैसा कि पहले बताया जा चुका है, पॉलिसीधारक रहे या न रहे, रकम की यह उपलब्धता सुनिश्चित है।
उपरोक्तानुसार पॉलिसियाँ लेने पर पॉलिसीधारक को पहले 17 वर्षों तक 6 पॉलिसियों की प्रीमीयम चुकानी पड़ेगी। उसके बाद प्रति वर्ष, जैसे-जैसे एक-एक पॉलिसी पूरी होती जाएगी, प्रीमीयम की रकम कम होती जाएगी। अर्थात् 17 वर्षों के बाद मिलने वाली रकम में जहाँ प्रति वर्ष वृद्धि होगी वहीं प्रीमीयम भुगतान का वजन प्रति वर्ष कम होता जाएगा।
इसी के समानान्तर, 17वें वर्ष से, जैसे-जैसे पॉलिसी पूरी होती जाएगी, पॉलिसीधारक का रिस्क कवरेज भी प्रति वर्ष कम होता जाएगा।
पॉलिसी से सम्बन्धित कुछ महत्वपूर्ण बातें -
(2) पॉलिसी की न्यूनतम अवधि 5 वर्ष तथा अधिकतम अवधि 25 वर्ष है। किन्तु परिपक्वता के समय पॉलिसीधारक की अधिकतम आयु 70 वर्ष तक होनी चाहिए। अर्थात् 60 वर्ष के व्यक्ति को यह पॉलिसी अधिकतम 10 वर्ष की अवधि के लिए मिल सकेगी।
(3) न्यूनतम बीमा धन रुपये 50,000। उसके बाद रुपये 5000 के गुणांक में। अधिकतम बीमाधन का निर्धारण व्यक्ति की आयु तथा आय के आधार पर होगा।
(4) दुर्घटना हित लाभ -‘निगम’ की समस्त पॉलिसियों सहित, अधिकतम 50 लाख रुपये।
(5) किश्त भुगतान विधि - वार्षिक, अर्द्ध वार्षिक, तिमाही, मासिक तथा वेतन बचत योजना।
(6) पॉलिसी पर ‘पॉलिसी ऋण’ लिया जा सकता है।
(7) पॉलिसी समनुदेशित की जा सकती है।
जिन परिवारों में बच्चे अभी एक वर्ष के नहीं हुए हैं उन्हें यह पॉलिसी लेने पर अवश्य ही विचार करना चाहिए।
-----
आपकी बीमा जिज्ञासाओं/समस्याओं का समाधान उपलब्ध कराने हेतु मैं प्रस्तुत हूँ। यदि अपनी जिज्ञासा/समस्या को सार्वजनिक न करना चाहें तो मुझे bairagivishnu@gmail.com पर मेल कर दें। आप चाहेंगे तो आपकी पहचान पूर्णतः गुप्त रखी जाएगी। यदि पालिसी नम्बर देंगे तो अधिकाधिक सुनिश्चित समाधान प्रस्तुत करने में सहायता मिलेगी।
यदि कोई कृपालु इस सामग्री का उपयोग करें तो कृपया इस ब्लाग का सन्दर्भ अवश्य दें । यदि कोई इसे मुद्रित स्वरूप प्रदान करें तो कृपया सम्बन्धित प्रकाशन की एक प्रति मुझे अवश्य भेजें । मेरा पता है - विष्णु बैरागी, पोस्ट बाक्स नम्बर - 19, रतलाम (मध्य प्रदेश) 457001.
'वर्षा' आ गई फागुन में : इसे सहेज लीजिए
कल, 16 फरवरी को, भारतीय जीवन बीमा निगम (एल. आई. सी.) एक बार फिर अपने स्थापित, जग-जाहिर और पारम्परिक आत्म विश्वास का परिचय देते हुए अपनी नई पालिसी ‘जीवन वर्षा’ बाजार में प्रस्तुत कर रहा है। मन्दी की उथल-पुथल से त्रस्त इस ‘भीषण विकट आर्थिक समय’ में एल. आई. सी. एक बार फिर सुनिश्चित लाभ (ग्यारण्टीड एडीशन) देने वाली पालिसी प्रस्तुत कर, देश के असंख्य मझोले निवेशकों को ‘बीमा सुरक्षा और सुनिश्चित लाभ’ एक साथ उपलब्ध कराने का ‘अविश्वसनीय कारनामा’ ही कर रही है।
‘जीवन वर्षा’ (तालिका 196) की महत्वपूर्ण बातें इस प्रकार हैं -
- यह एल. आई. सी. की ऐसी पहली ‘धन वापसी योजना’ (मनी बेक पालिसी) है जिसमें तीन-तीन वर्षों के अन्तराल पर धन वापसी का प्रावधान है। अन्यथा, एल. आई. सी. की अब तक उपलब्ध ‘धन वापसी योजनाओं’ (मनी बेक पालिसियों) में चार-चार अथवा पाँच-पाँच वर्षों के बाद ‘धन वापसी’ का प्रावधान है।
- यह योजना सीमित अवधि, 31 मार्च 2009 तक के लिए ही उपलब्ध है।
- यह योजना, 15 वर्ष (पूर्ण) से 66 वर्ष की आयु समूह के लोगों के लिए है।
- परिपक्वता आयु अधिकतम 75 वर्ष।
- योजना दो अवधियों (9 वर्ष तथा 12 वर्ष)के लिए उपलब्ध है।
- प्रीमीयम भुगतान अवधि - 9 वर्ष। यह अवधि दोनों पालिसी अवधियों के लिए समान है। अर्थात् 12 वर्ष की पालिसी अवधि का विकल्प लेने पर भी किश्त भुगतान 9 वर्ष तक ही करना है। 9 वर्ष पालिसी अवधि विकल्प में तो किश्त भुगतान अवधि 9 वर्ष है ही।
सुनिश्चित लाभ (ग्यारण्टीड एडीशन)
(अ) 9 वर्ष पालिसी अवधि वाली योजना के लिए 65 रुपये प्रति वर्ष प्रति हजार। तथा
(ब) 12 वर्ष पालिसी अवधि वाली योजना के लिए 70 रुपये प्रति वर्ष प्रति हजार।
- इसके अतिरिक्त, परिपक्वता भुगतान के साथ ‘निष्ठा आधिक्य’ (लायल्टी एडीशन) भुगतान
का भी प्रावधान।
योजना के लाभ -
(1) 9 वर्ष पालिसी अवधि वाली योजना में, पालिसी के -
- 3 वर्ष पूरे होने पर बीमा धन की 15 प्रतिशत राशि का भुगतान।
- 6 वर्ष पूरे होने पर बीमा धन की 25 प्रतिशत राशि का भुगतान।
- 9 वर्ष पूरे होने पर (अर्थात् परिपक्वता के समय) बीमाधन की शेष 60 प्रतिशत राशि के साथ सुनिश्चित लाभ की राशि तथा निष्ठा आधिक्य की राशि का भुगतान।
(2) 12 वर्ष पालिसी अवधि वाली योजना में, पालिसी के -
- 3 वर्ष पूरे होने पर बीमा धन की 10 प्रतिशत राशि का भुगतान।
- 6 वर्ष पूरे होने पर बीमा धन की 20 प्रतिशत राशि का भुगतान।
- 9 वर्ष पूरे होने पर बीमा धन की 30 प्रतिशत राशि का भुगतान।
- 12 वर्ष पूरे होने पर (अर्थात् परिपक्वता के समय) बीमा धन की शेष 40 प्रतिशत राशि के साथ, सुनिश्चित लाभ की राशि तथा निष्ठा आधिक्य की राशि का भुगतान।
बीमा सुरक्षा
-पालिसी प्रारम्भ दिनांक से, पालिसी के अन्तिम वर्ष से पहले वाले वर्ष तक की अवधि में मृत्य होने पर - बीमा धन की रकम तथा मृत्यु के समय तक की पालिसी अवधि के सुनिश्चित लाभ की रकम का भुगतान।
- पालिसी के अन्तिम वर्ष में (परिपक्वता दिनांक से पहले) मृत्यु होने की दशा में बीमा धन की रकम तथा सुनिश्चित लाभ की रकम तथा निष्ठा आधिक्य की रकम का भुगतान।
विशेष - मृत्यु दावे की रकम में से, 3-3 वर्षों के अन्तराल में किए गए भुगतान की रकम कम नहीं की जाएगी। यह प्रावधान, एल. आई. सी. की पहले से चली आ रही मनी बेक पाॅलिसियों में भी उपलब्ध है।
न्यूनतम बीमा धन - रुपये 50,000/-उसके बाद रुपये 5,000/- के गुणक में।
अधिकतम बीमा धन - कोई सीमा नहीं। (किन्तु प्रस्तावक की आयु और सकल आय के आधार पर निर्धारित अनुपात के अनुसार।)
प्रीमीयम निर्धारण में उपलब्ध रियायतें
भुगतान विधि छूट -
-वार्षिक भुगतान विधि पर मूल प्रीमीयम दर पर 2 प्रतिशत की और अध्र्द वार्षिक भुगतान विधि पर मूल प्रीमीयम दर पर 1 प्रतिशत की छूट।
बीमा धन छूट -
95,000/- तक - कोई छूट नहीं।
1 लाख से 1,95,000/- तक - मूल प्रीमीयम दर पर 2 रुपये प्रति हजार।
2 लाख से 4,95,000/- तक - मूल प्रीमीयम दर पर 3.50 रुपये प्रति हजार।
5 लाख तथा अधिक पर - 5 रुपये प्रति हजार।
(बीमा एजेण्ट जब आपको उदाहरण देते हुए प्रीमीयम बताता है तो उसमें समस्त रियायतें देने के बाद ही रकम बताता है।)
किश्त भुगतान विधि - वार्षिक, अध्र्द वार्षिक और तिमाही।
आय कर प्रावधान -
- चुकाई गई प्रीमीयम की रकम पर, आय कर अधिनियम की धारा 80 (सी) के अन्तर्गत कर छूट मिलेगी।
- पालिसी से मिलने वाली समस्त रकम, आय कर की धारा 10 (10) (डी) के अन्तर्गत आय कर से पूर्णतः मुक्त रहेगी।
प्राप्तियों का ‘लाभ-प्रतिशत’
- 30 वर्ष की आयु वाले व्यक्ति के जीवन पर ली गई, 9 वर्ष अवधि वाली, रुपये 5 लाख बीमा धन की पालिसी पर, आय कर छूट न लेने की दशा में लगभग 9 प्रतिशत की दर से तथा आय कर छूट लेने की दशा में लगभग 17 प्रतिशत की दर से लाभ प्राप्ति अनुमानित है।
- उपरोक्तानुसार ही, 12 वर्ष अवधि का विकल्प लेने पर यह लाभ प्रतिशत, आय कर छूट न लेने की दशा में लगभग 10 प्रतिशत तथा आय कर छूट लेने की दशा में 23 प्रतिशत अनुमानित है।
- यदि मिलने वाली रकम पर आय कर की छूट को भी शरीक कर लिया जाए तो यह लाभ-प्रतिशत और अधिक हो जाता है।
मेरी सलाह -
यह पालिसी उन समस्त लोगों के लिए ‘बिल्ली के भाग से टूटा छींका’ है जो 55 वर्ष से अधिक आयु के हो चुके हैं। 62 पार कर चुके लोगों के लिए तो यह ‘मनी बेक सुविधा सहित, छप्पर फाड़ बीमा सुरक्षा वर्षा’ है।
एल.आई.सी. की वर्तमान मनी बेक पालिसियों में, परिपक्वता की अधिकतम आयु 70 वर्ष निर्धारित की हुई है। अर्थात् 46 वर्ष का व्यक्ति 25 वर्षीय मनी बेक पालिसी, 51 वर्ष आयु का व्यक्ति 20 वर्षीय मनी बेक पालिसी और 56 वर्षीय व्यक्ति 15 वर्षीय मनी बेक पालिसी नहीं ले सकता। 12 वर्ष अवधि वाली कोई मनी बेक पालिसी एल.आई.सी. के पास उपलब्ध है ही नहीं।
किन्तु ‘जीवन वर्षा’ पालिसी में परिपक्वता आयु 75 वर्ष तक कर दी गई है। अर्थात् यह पॅलिसी 66 वर्ष तक की आयु वाले लोगों के लिए उपलब्ध है। वे 9 वर्ष अवधि वाली ‘जीवन वर्षा’ ले सकते हैं और 63 वर्ष की आयु वाले तो 12 वर्ष अवधि वाली ‘जीवन वर्षा’ ले सकते हैं।
जाहिर है कि ‘उच्च जोखिम क्षेत्र’ (हाई रिस्क झोन) में जी रहे जो वरिष्ठजन बीमा सुरक्षा लेने को उत्सुक हैं, उनके लिए तो यह ‘लपक लेने वाला प्रतीक्षित सुनहरा मौका’ ही है।
ऐसे लोगों को तो यह पालिसी, अपनी भुगतान क्षमता के अनुरूप, ‘बिना विचारे’ ही ले लेना चाहिए
- आर्थिक परिदृश्य पर छाया मन्दी का प्रभाव जल्दी दूर होता अनुभव नहीं हो रहा है। सरकार बार-बार भरोसा दिला रही है और अर्थ विशेषज्ञ चेतावनियाँ दे रहे हैं। बैंकों की ब्याज दरें कम होने की आशंका चारों ओर पसरी हुई है। ऐसे में ‘ग्यारण्टीड रिटर्न’ अपने आप में सबसे बड़ा आकर्षण है। कहा जा सकता है कि ‘जीवन वर्षा’ पालिसी लेकर, मन्दी के खतरे से बेफिक्र होकर, टाँगे पसार कर सोया जा सकता है।
- ‘जीवन आस्था’ के समय जो दो बातें मैं ने कही थीं, वे दानों ही दुहरा रहा हूँ। - यह योजना भले ही 31 मार्च तक उपलब्ध है किन्तु अन्तिम तारीख की प्रतीक्षा न करें। यदि यह योजना अनुकूल अनुभव होती है तो तत्काल ही खरीद लें।
- यथा सम्भव, 12 वर्ष अवधि की योजाना लें।
सदैव की तरह कृपया याद रखें - यह विवरण मुझे मिली अब तक की तानकारियों के आधार पर हैं। इन्हें भारतीय जीवन बीमा निगम की अधिकृत जानकारियां न समझें।
जीवन बीमा से जुड़ी कुछ छोटी-छोटी जानकारियाँ, गुरुवार को।
-----
इस ब्लाग पर, प्रत्येक गुरुवार को, जीवन बीमा से सम्बन्धित जानकारियाँ उपलब्ध कराई जा रही हैं। (इस स्थिति के अपवाद सम्भव हैं।) आपकी बीमा जिज्ञासाओं/समस्याओं का समाधान उपलब्ध कराने का यथा सम्भव प्रयास करूँगा। अपनी जिज्ञासा/समस्या को सार्वजनिक न करना चाहें तो मुझे bairagivishnu@gmail.com पर मेल कर दें। आप चाहेंगे तो आपकी पहचान पूर्णतः गुप्त रखी जाएगी। यदि पालिसी नम्बर देंगे तो अधिकाधिक सुनिश्चित समाधान प्रस्तुत करने में सहायता मिलेगी। यह सुविधा पूर्णतः निःशुल्क है।
यदि कोई कृपालु इस सामग्री का उपयोग करें तो कृपया इस ब्लाग का सन्दर्भ अवश्य दें । यदि कोई इसे मुद्रित स्वरूप प्रदान करें तो कृपया सम्बन्धित प्रकाशन की एक प्रति मुझे अवश्य भेजें । मेरा पता है - विष्णु बैरागी, पोस्ट बाक्स नम्बर - 19, रतलाम (मध्य प्रदेश) 457001.
कृपया मेरे ब्लाग ‘मित्र-धन’ http://mitradhan.blogspot.com पर भी एक नजर डालें ।
‘आस्था’ बिक रही है, तत्काल खरीद लें
‘जीवन - आस्था’
भारतीय जीवन बीमा निगम ने, 8 दिसम्बर को ‘जीवन आस्था’ नामकी नई योजना बाजार में प्रस्तुत की है । फिलहाल यह योजना कुल 45 दिनों के लिए उपलब्ध है - अर्थात् 21 जनवरी 2009 तक ।
मन्दी के दौर में यह आकर्षक योजना है । इसमें बोनस कम होने की कोई आशंका नहीं है और शेयर बाजार की ऊँच-नीच के प्रभाव की आशंका तो सपने में भी नहीं है । इसमें ‘सुनिश्चित लाभ’ (गारण्टीड एडीशन) का प्रावधान किया गया है और यही इसकी सबसे बड़ी विशेषता भी है और आकर्षण भी ।
यह योजना 13 से 60 वर्ष तक की आयु वर्ग के लिए है और न्यूनतम निवेश, मोटे तौर पर 25 हजार रुपये है । निवेश की रकम, आयु के आधार पर निर्धारित होती है सो कम आयु वालों के लिए यह राशि 25 हजार से कम और अधिक आयु वालों के लिए 25 हजार से तनिक अधिक हो सकती है ।
यह एकल (सिंगल) प्रीमीयम योजना है । अर्थात् निवेशक को एक बार ही भुगतान करना है-प्रति वर्ष नहीं ।
यह योजना दो अवधियों के लिए उपलब्ध है - 5 वर्ष और 10 वर्ष ।
‘सुनिश्चित लाभ’ की दर दोनों अवधियों के लिए अलग-अलग है - 5 वर्ष अवधि के लिए 90 रुपये प्रति हजार प्रति वर्ष तथा 10 वर्ष अवधि के लिए 100 रुपये प्रति हजार प्रति वर्ष ।
इसमें निवेश की गई रकम पर, आयकर अधिनियिम की धारा 80 (सी) के अन्तर्गत छूट मिलेगी जबकि परिवपक्वता राशि, आयकर अधिनियिम की धारा 10 (10)(सी) के अधीन आय कर मुक्त होगी । प्राप्तियों का आयकर मुक्त होना इसका बहुत बड़ा आकर्षण है ।
इसके साथ ही साथ, इसमें जीवन बीमा सुरक्षा भी उपलब्ध है । यह सुरक्षा (रिस्क कवर) प्रथम पालिसी वर्ष में न्यूनतम डेड़ लाख रुपये तथा शेष पालिसी अवधि में न्यूनतम 50 हजार रुपये है । परिपक्वता बीमा धन, न्यूनतम 25 हजार रुपये है । इसके अतिरिक्त, पालिसी की पूर्णता पर 'निष्ठा आधिक्य' (लायल्टी एडीशन) के भुगतान का भी प्रावधान है ।
इसकी प्राप्तियाँ, बाजार में वर्तमान में उपलब्ध किसी भी योजना से अधिक ही आकर्षक और लाभदायक अनुभव होती हैं । 5 वर्ष अवधि वाली पालिसी की परिपक्वता राशि, निवेशित राशि की ड्ययोड़ी से अधिक तथा 10 वर्ष अवधि वाली पालिसी में दुगुनी से अधिक होगी ।
इन सारी बातों को इन उदाहरणों से आसानी से समझा जा सकता है -
पहला उदाहरण
पालिसीधारक की आयु - 30 वर्ष ।
पालिसी अवधि - 10 वर्ष ।
मूल बीमा धन - रुपये 1,50,000
प्रीमीयम (निवेश की रकम) - रुपये 24,825/-
परिपक्वता राशि -
परिपक्वता बीमा धन - रुपये 25,000/-
सुनिश्चित लाभ - रुपये 25,000/-
लायल्टी एडीशन (सम्भावित) - रुपये 7,500/-
योग - रुपये 57,500/-
लाभांश की दर - 9 प्रतिशत ।
इसमें यदि आय कर की बचत का प्रभाव शामिल कर लें तो लाभांश की दर इस प्रकार होगी -
आयकर छूट 10 प्रतिशत पर - 10 प्रतिशत
आय कर छूट 20 प्रतिशत पर - 11 प्रतिशत
आय कर छूट 30 प्रतिशत पर - 13
दूसरा उदाहरण
पालिसीधारक की आयु - 30 वर्ष ।
पालिसी अवधि - 5 वर्ष ।
मूल बीमा धन - रुपये 1,50,000
प्रीमीयम (निवेश की रकम) - रुपये 26,205/-
परिपक्वता राशि -
परिपक्वता बीमा धन - रुपये 25,000/-
सुनिश्चित लाभ - रुपये 11,250/-
लायल्टी एडीशन (सम्भावित) - रुपये 3,750/-
योग - रुपये 40,000/-
लाभांश की दर - 9 प्रतिशत ।
इसमें यदि आय कर की बचत का प्रभाव शामिल कर लें तो लाभांश की दर इस प्रकार होगी -
आयकर छूट 10 प्रतिशत पर - 11 प्रतिशत
आयकर छूट 30 प्रतिशत पर - 17 प्रतिशत
इसके अतिरिक्त इस योजना में निम्नांकित सुविधाएँ भी उपलब्ध हैं -
- प्रथम पालिसी वर्ष पूर्ण होने पर सरेण्डर मूल्य प्राप्त किया जा सकता है जो निवेशित राशि का 90 प्रतिशत होगा ।
- प्रथम पालिसी वर्ष पूर्ण होने के पश्चात पालिसी पर लोन लिया जा सकता है ।
- पालिसी को तत्काल ही समनुदेशित किया जा सकता है अर्थात् गिरवी रखा जा सकता है ।
भारतीय जीवन बीमा निगम ने एक लम्बे समय से ‘सुनिश्चित लाभ’ (गारण्टीड एडीशन) वाली योजनाएं बन्द कर रखी थीं ।
मन्दी और शेयर बाजार के उतार-चढ़ाव से उपजे आर्थिक दहशत के इस वातावरण में ‘सुनिश्चित लाभ’ (गारण्टीड एडीशन) वाली यह योजना बाजार में उतार कर भारतीय जीवन बीमा निगम ने अपूर्व साहस का परिचय दिया है ।
मैं निम्नानुसार अनुशंसा करता हूं -
- इसे तत्काल खरीद लिया जाना चाहिए । ‘आय कर नियोजन’ से परे हटकर भी यह, बाजार में उपलब्ध अन्य समान योजनाओं से काफी बेहतर है ।
- सम्भव हो तो अपने परिवार के 13 से 40 वर्ष आयु वर्ग के सदस्यों के लिए खरीदेंगे तो अधिक लाभ होगा ।
- लोग ‘अल्पावधि निवेश’ को प्राथमिकता देते हैं किन्तु मेरी सलाह है कि इसे 10 वर्ष के लिए लें ।
- इसकी अन्तिम दिनांक की प्रतीक्षा न करें । तत्काल ही ले लें ।
मैं केवल परामर्श नहीं दे रहा हूं । मेरे छोटे बेटे तथागत (अवस्था 19 वर्ष) के लिए मैं यह पालिसी ले रहा हूं । अर्थात् आपको उसी खरीदी की सलाह दे रहा हूं जो खरीदी मैं खुद कर रहा हूं ।
(कृपया मेरी इस प्रस्तुति को भारतीय जीवन बीमा निगम की प्रस्तुति न समझें ।)
---
यदि कोई कृपालु इस सामग्री का उपयोग करें तो कृपया इस ब्लाग का सन्दर्भ अवश्य दें । यदि कोई इसे मुद्रित स्वरूप प्रदान करें तो कृपया सम्बन्धित प्रकाशन की एक प्रति मुझे अवश्य भेजें । मेरा पता है - विष्णु बैरागी, पोस्ट बाक्स नम्बर - 19, रतलाम (मध्य प्रदेश) 457001.
कृपया मेरे ब्लाग
‘मित्र-धन’ http://mitradhan.blogspot.com
पर भी एक नजर डालें ।




