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केंसर कवर: बीमा भी और पुण्य लाभ भी

‘राष्ट्रीय केंसर रोकथाम एवम् अनुसन्धान संस्थान’ (एनआईसीपीआर) तथा विश्व स्वास्थ्य संगठन द्वारा जारी कुछ आँकड़े अत्यधिक भयावह हैं -

- प्रति वर्ष 7,00,000 नए केंसर रोगी सामने आ रहे हैं। 

- केंसर मौतों की संख्या 5,56,400 प्रति वर्ष हो गई है।  

- महिला केंसर रोगियों के मामले में चीन और  अमरीका के बाद भारत तीसरे नम्बर पर है। 

- 2017 की एक रिपोर्ट के अनुसार लगभग 14,00,000 महिलाएँ केंसरग्रस्त पाई गईं। डॉक्टरों तक नहीं पहुँच पाई महिलाएँ इनमें शरीक नहीं हैं। 

- प्रसव मृत्यु के मुकाबले केंसर मृत्यु लगभग पौने दो गुना अधिक हो रही हैं। 

- स्तन केंसर और सर्वाइकल केंसर मृत्यु के मामले में भारत विश्व में प्रथम स्थान पर है।

- बच्चादानी केंसर के मामले में भारत विश्व में दूसरे स्थान पर है। 

- प्रति दिन 2,000 महिलाएँ केंसर रोगी के रूप में चिह्नित होती हैं। इनमें से 1,200 महिलाएँ ‘लास्ट स्टेज’ पर होती हैं।

- केंसर से मरनेवाले 70 प्रतिशत रोगी, निम्न तथा मध्यम आय वर्ग के होते हैं।

केंसर का ईलाज अत्यधिक मँहगा अपितु लम्बे समय तक चलता है। केवल रोगी ही नहीं, रोगी के समूचे परिवार के धैर्य की परीक्षा हो जाती है और आर्थिक कचूमर निकल जाता है।


ऐसे में, भारतीय जीवन बीमा निगम की ‘केंसर कवर’ पॉलिसी (तालिका 905) औसत मध्यमवर्गीय परिवारों के लिए ‘निर्बल के बल राम’ की तरह सहायक हो सकती है। 

इस पॉलिसी की सामान्य जानकारियाँ निम्नानुसार हैं -

- यह स्वास्थ्य बीमा है।

- यह केवल केंसर की बीमारी के लिए है।

- इसमें मोटे तौर पर त्वचा केंसर के अतिरिक्त समस्त प्रकार के केंसर शरीक हैं।  

- न्यूनतम आयु 20 वर्ष (पूर्ण) तथा अधिकतम आयु 65 वर्ष (निकटतम जन्म दिनांक)।

- पॉलिसी पूर्णता अवधि पर अधिकतक आयु 75 वर्ष।

- पॉलिसी अवधि न्यूनतम 10 वर्ष तथा अधिकतम 30 वर्ष। किन्तु पॉलिसी अवधि ऐसी रहेगी कि पूरी होने पर बीमाधारक की आयु 50 वर्ष या अधिक रहे। अर्थात् 20 वर्ष आयु वाले व्यक्ति को 30 वर्ष से कम अवधि की पॉलिसी नहीं मिल सकेगी।

- न्यूनत बीमा धन रुपये 10,00,000/- (रुपये दस लाख) और अधिकतम बीमा धन रुपये 50,00,000/- (रुपये पचास लाख)। बीमा धन एक लाख रुपयों के गुणक में लिया जा सकेगा। 

- पॉलिसी शुरु होने के बाद, शुरु के 180 दिनों तक ही पॉलिसी के लाभ शुरु होंगे। अर्थात्, पॉलिसी शुरु होने के बाद, 180 दिनों की अवधि में यदि केंसर हो जाता है तो पॉलिसी के लाभ नहीं मिलेंगे और पॉलिसी स्वतः निरस्त/अप्रभावी हो जाएगी।

- यह पॉलिसी पिछली तारीख से शुरु नहीं होगी।

इस पॉलिसी में बीमित राशि के दो विकल्प उपलब्ध हैं -

पहला विकल्प - स्थिर बीमित राशि। अर्थात्, जितने का बीमा लिया गया है, उतनी ही रकम का बीमा पॉलिसी के अन्तिम दिनांक तक चलेगा।

दूसरा विकल्प - बढ़ती हुई बीमित राशि। इस विकल्प में, पॉलिसी का एक वर्ष पूरा होने के बाद, अगले पाँच वर्षों तक, या पहली बार केंसर चिह्नित (डायग्नोसिस) होने तक (जो भी स्थिति पहले आए तब तक) बीमित राशि में, प्रति वर्ष, मूल बीमित राशि की 10 प्रतिशत बढ़ोतरी होगी। अर्थात्, उदाहरणार्थ, यदि किसी ने 10,00,000/- रुपयों का बीमा लिया है और अगले 6 वर्षों तक केंसर चिह्नित नहीं हुआ है तो उसकी बीमित राशि 15,00,000/- रुपये हो जाएगी।

कब-कब, कितना भुगतान और क्या लाभ मिलेंगे?

पहली बार (अर्ली स्टेज) विर्निदिष्ट केंसर चिह्नित होने पर -

- बीमित राशि की 25 प्रतिशत राशि का एक मुश्त भुगतान किया जाएगा।

- अगले तीन वर्षों की प्रीमीयम माफ कर दी जाएगी।

अगली बार (मेजर स्टेज) विर्निदिष्ट केंसर होने पर -

- बीमित राशि की शेष 75 प्रतिशत राशि का भुगतान किया जाएगा।

- शेष वर्षों की प्रीमीयम माफ कर दी जाएगी।

- अगले दस वर्षों तक या पालिसी समाप्त होने तक (जो भी अवधि पहले पूरी हो) बीमित राशि की 01 (एक) प्रतिशत राशि प्रति माह भुगतान की जाएगी।

कृपया ध्यान दें - विर्निदिष्ट केंसर का चिकित्सकीय प्रमाणीकरण सुस्पष्ट, सुनिश्चित और असंदिग्ध रूप से किया जाना चाहिए। केंसर निर्धारण में ‘किन्तु’, ‘परन्तु’, ‘शायद’, ‘सम्भव है’ जैसी शब्दावली स्वीकार नहीं की जाएगी।

कुछ विशेष बातें -

- प्रीमीयम भुगतान के लिए एक माह की अवधि (जो तीस दिन से कम नहीं होगी) की रियायती छूट दी जाएगी। इस अवधि में प्रीमीयम जमा नहीं करने पर पॉलिसी कालातीत (लेप्स हो जाएगी)। बकाया सारी किश्तें जमा कराने पर कालातीत पॉलिसी चालू (पुनर्चलित/रिवाइव) कराई जा सकेगी किन्तु पुनर्चलन/रिवाईवल दिनांक से 180 दिनों का प्रतिबन्ध फिर से लागू हो जाएगा। 

- यह पालिसी लेने के लिए किसी भी प्रकार की कोई डॉक्टरी या खून-पेशाब, ईसीजी, एक्स-रे आदि जाँच आवश्यक नहीं है।

- इस पॉलिसी में दावा भुगतान के लिए दावेदार से चिकित्सा खर्च के बिल, रिपोर्टें आदि की मूल प्रतियाँ नहीं माँगी जाएँगी। अर्थात् यदि आपने दूसरी मेडिक्लेम पॉलिसी ले रखी है तो उसके लाभ भी आप ले सकते हैं। किन्तु, असामान्य स्थिति अनुभव होने पर, समुचित चिकित्सा कराये जाने के प्रमण माँगे जा सकते हैं। 

- किसी भी स्थिति में (अर्ली स्टेज अथवा मेजर स्टेज में), केंसर चिह्नित होने के दिनांक से सात दिनों की अवधि में यदि केंसर रोगी की मृत्यु हो जाती है तो दावा स्वीकार नहीं होगा। 

- इस पॉलिसी में पुरुषों के मुकाबले महिलओं की प्रीमीय अधिक है।

- जैसा कि शुरु में ही कहा गया है, यह स्वास्थ्य बीमा है, इसलिए इसमें केंसर होने पर ही दावा भुगतान किया जाएगा। पॉलिसी पूरी होने पर परिपक्वता भुगतान नहीं मिलेगा। 

- प्रीमीयम की रकम पर, आय-कर अधिनियम की धारा 80 (डी) मे छूट मिलेगी।

मुझे पहली नजर में यह पॉलिसी युवा वर्ग के लिए उपयुक्त और आश्वस्तिदायक लगी है। अपने दोनों बेटों और बहुओं के लिए मैं यह पॉलिसी ले रहा हूँ।

मैंने यथा सम्भव अधिकाधिक जानकारी देने की कोशिश की है। लेकिन चूँकि मूल परिपत्र अंग्रेजी में है और मेरा अंग्रेजी ज्ञान शून्यवत है। इसलिए चूक की और अन्यथा व्याख्यायित किए जाने की आशंका की गुंजाइश है। इसलिए, यदि आपकी कोई जिज्ञासा हो तो अपने एजेण्ट से या आपके यहाँ स्थित एलआईसी कार्यालय से सम्पर्क कर लें। चाहें तो मुझसे भी मोबाइल नम्बर 098270 61799 पर सम्पर्क कर लें। मैं यथासम्भव जिज्ञासा का समाधान करने की कोशिश करूँगा। 

इस पॉलिसी के मूल परिपत्र के पृष्ठ क्रमांक 3 और 4 मुझे महत्वूपर्ण अनुभव हुए हैं। आपकी सुविधा के लिए इनकी स्केन प्रतियाँ  यहाँ दे रहा हूँ। 

‘सर्वे भवन्तु सुखिनः, सर्वे सन्तु निरामयः’ की कामना सहित एक बात मुझे विशेष रूप से कहनी है। 

ईश्वर आप सबको दीर्घायु प्रदान करे और आजीवन पूर्ण स्वस्थ बनाए रखे। इस पॉलिसी के (आय-कर लाभ के अतिरिक्त) लाभ उठाने की आवश्यकता कभी न पड़े। लेकिन चूँकि इस पॉलिसी के अन्तर्गत केवल केंसर रोगी को ही भुगतान किया जाएगा, इसलिए आप खुद के लिए सुरक्षा जुटाने के साथ-साथ अनजाने में ही, किसी न किसी केंसर रोगी की सहायता करने का पुण्य लाभ भी अर्जित करेंगे ही। न आप जान पाएँगे कि आपने किसकी सहायता की न ही सहायता पानेवाला जान पाएगा कि उसने किससे सहायता ली। ऐसी मूक और अज्ञात सेवा ही वास्तविक ईश्वर सेवा होती है। लिहाजा, यह पॉलिसी, मात्र एक बीमा पॉलिसी नहीं है। इससे कहीं आगे बढ़कर काफी-कुछ और भी है - अनूठा, अवर्णनीय, केवल महसूस होनेवाला आनन्ददायी, आत्म-सन्तोष।
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परिपत्र पेज - 3

परिपत्र पेज - 4

आम आदमी की ‘जीवन रक्षक’

अभी-अभी, 19 अगस्त 2014 को भारतीय जीवन बीमा निगम (एलआईसी) ने ‘जीवन रक्षक’ (तालिका 827) नाम से नई बीमा योजना बाजार में प्रस्तुत की है। एलआईसी की मौजूदा बीमा योजनाओं के मुकाबले इसे ‘आम आदमी की बीमा पॉलिसी’ कहा जा सकता है।

इस पॉलिसी की प्रमुख बातें इस प्रकार है -

- अपनी आयु के 08 वर्ष पूर्ण कर चुके व्यक्तियों से लेकर 55 वर्ष तक की आयु के व्यक्ति यह पॉलिसी ले सकते हैं।
(यहाँ 55 वर्ष का अर्थ है, जिसकी आयु आज 55 वर्ष, 05 महीने और 29 दिन है।)

- इस पॉलिसी में पूर्व दिनांकन (बेक डेटिंग) की सुविधा भी उपलब्ध है। अर्थात् इस पॉलिसी को खरीदें भले ही आज किन्तु इसका प्रारम्भ दिनांक 01-04-2014 से भी लिया जा सकता है। इसका लाभ यह है कि जो आदमी आज 55 वर्ष 06 महीने से अधिक आयु का हो चुका है (ऐसा आदमी एलआईसी के हिसाब से 56 वर्ष का हो कर यह पॉलिसी लेने की पात्रता खो चुका है), वह भी उस पिछली तारीख से यह बीमा ले सकता है जिस तारीख को वह 55 वर्ष 05 माह 29 दिन की सीमा में आ जाता हो।

- पूर्व दिनांकन की सुविधा लेने पर प्रीमीयम की रकम पर 9.5 प्रतिशत की साधारण दर से ब्याज देय होगा।

 - पॉलिसी की अवधि न्यूनतम 10 वर्ष और अधिकतम 20 वर्ष होगी। 

इसमें महत्वपूर्ण बात यह है कि इस पॉलिसी के अन्तर्गत एक व्यक्ति को अधिकतम 2,00,000/- रुपयों का ही बीमा मिल सकेगा। इस भ्रम मे बिलकुल न रहें कि दो-दो लाख की, एक से अधिक पॉलिसियाँ ली जा सकेंगी। अधिकतम बीमा धन की यह सीमा ‘प्रति जीवन’ है, ‘प्रति पॉलिसी’ नहीं। हमें बताया गया है कि इस आशय की सूचना, आपको जारी की जानेवाली रसीद पर भी अंकित होगी और पॉलिसी पर भी। यदि आपने जाने-अनजाने (किसी एजेण्ट की चूक से भी) इस योजना के तहत दो लाख रुपयों से अधिक का बीमा ले लिया तो भुगतान (यह भुगतान पॉलिसी पूरी होने पर मिलनेवाला हो या मृत्यु होने पर मिलनेवाला) केवल दो लाख रुपयों का (और पात्रता होने पर लॉयल्टी एडीशन) ही मिलेगा।

- प्रीमीयम का भुगतान पूरी पॉलिसी अवधि तक करना होगा। अर्थात्, जितने वर्षों के लिए पॉलिसी ली है, उतने वर्षाें तक प्रीमीयम चुकानी पड़ेगी।

- पॉलिसी की पूर्णावधि आयु 70 वर्ष है। अर्थात् आयु के 70 वर्ष तक के लिए ही यह पॉलिसी मिल सकेगी। अर्थात्, 55 वर्ष के व्यक्ति को अधिकतक 15 वर्ष की अवधि के लिए यह पॉलिसी मिल सकेगी।

- प्रीमीयम का भुगतान वार्षिक, अर्द्ध वार्षिक, तिमाही, वेतन से/ईसीएस से मासिक रूप से किया जा सकेगा।

- न्यूनतम बीमा धन 75,000/- रुपये तथा अधिकतक बीमा धन 2,00,000/- रुपये है। बीमा-धन, 5000/- रुपयों के गुणक में होगा। अर्थात् 75,000/- के बाद 80 हजार, 85 हजार आदि आदि।

- 50 पैसे प्रति हजार बीमा धन की दर से ‘दुर्घटना हित लाभ’ उपलब्ध है।

- तीन वर्षों की प्रीमीयम चुकाने के बाद इस पॉलिसी पर लोन लिया जा सकेगा, सरेण्डर भी किया जा सकेगा।

- इस पॉलिसी में वार्षिक बोनस का प्रावधान नहीं है। किन्तु पूर्णावधि पर ‘निष्ठा आधिक्य’ (लॉयल्टी एडीशन) का भुगतान किया जाएगा।

- पाँच वर्ष पूरे हो जाने के बाद (अर्थात् पाँच वर्षों की प्रीमीयम जमा करने के बाद) ही पॉलिसी को ‘निष्ठा आधिक्य’ की पात्रता प्राप्त होगी। 

- प्रीमीयम की रकम पर सेवा कर तथा सर चार्ज अलग से देय होगा। पहले वर्ष इनकी दर 3.09 प्रतिशत होगी। बाद के वर्षों में यह दर 1.545 प्रतिशत होगी।

- प्रीमीयम की रकम पर आय कर की धारा 80-सी के अन्तर्गत कर-छूट मिलेगी।

- सेवा कर तथा सर चार्ज की रकम पर आय-कर-छूट नहीं मिलेगी।

- पॉलिसी से मिलनेवाली रकम, आय कर अधिनियम की धारा 10 (10)-डी के अन्तर्गत कर-मुक्त होगी।

प्राप्तियाँ

पॉलिसी से मिलनेवाला भुगतान निम्नानुसार होगा -

- पूर्णावधि (अर्थात् पॉलिसी पूरी होने) पर बीमा धन तथा लायल्टी एडीशन की रकम मिलेगी।

- पॉलिसी अवधि पूरी होने से पहले मृत्यु की दशा में बीमा धन तथा लॉयल्टी एडीशन की रकम का भुगतान, नामित व्यक्ति (नामिनी) को किया जाएगा।

- दुर्घटना मृत्यु की दशा में बीमा धन की दोगुनी रकम तथा लॉयल्टी एडीशन की रकम का भुगतान, नामित व्यक्ति (नामिनी) को किया जाएगा। 

- किन्तु लॉयल्टी एडीशन की रकम का भुगतान तभी किया जा सकेगा जबकि पॉलिसी पाँच वर्ष चल चुकी होगी। क्योंकि जैसा कि पहले ही बताया जा चुका है, पॉलिसी को लॉयल्टी एडीशन की पात्रता, पॉलिसी के पाँच वर्ष पूरे करने के बाद ही प्राप्त होगी।

- अर्थात्, यदि किसी पॉलिसीधारक की मृत्यु, पॉलिसी के पाँच वर्ष पूरे होने से पहले होती है तो उसके नामिनी को केवल बीमा धन की रकम का भुगतान होगा और यदि मृत्यु दुर्घटना से हुई होगी तो यह भुगतान, बीमा धन की दोगुनी रकम के बराबर होगा।
विशेषता
- चूँकि इस पॉलिसी में वार्षिक बोनस का प्रावधान नहीं है इसलिए इसकी प्रीमीयम, एलआईसी की मौजूदा अन्य पॉलिसियों की प्रीमीयम की अपेक्षा उल्लेखनीय रूप से कम है।

- न्यूनतम बीमा धन 75,000/- रुपये होने से (और, जैसा कि कहा गया है,  प्रीमीयम भी कम होने से) वे लोग भी बीमा सुरक्षा प्राप्त कर सकेंगे जो अभी एलआईसी की कोई अन्य पॉलिसी नहीं ले पा रहे हैं। एलआईसी की मौजूदा तमाम पॉलिसियों में कम से कम 1,00,000/- का बीमा लेना अनिवार्य है और चूँकि उनमें वार्षिक बोनस का प्रावधान है, इसलिए उनकी प्रीमीयम अपेक्षया तनिक अधिक आती है। इन दो कारणों से ही इसे ‘आम आदमी की बीमा पॉलिसी’ कहा जा सकता है।

उदाहरण 

30 वर्ष की आयु वाले एक व्यक्ति ने 2,00,000/- रुपये बीमा धन की ‘जीवन रक्षक’ पालिसी ली।

- उसकी वार्षिक प्रीमीयम पहले वर्ष रुपये 7,058/- तथा अगले 19 वर्षों के लिए रुपये 6,952/- प्रति वर्ष होगी। इन दोनों ही रकमों में, सेवा कर तथा सर चार्ज की रकम शामिल है।

- पॉलिसी पूरी होने पर, मेरे हिसाब से मिलनेवाला सम्भावित भुगतान 2,50,000/- रुपये (2,00,000/- रुपये मूल बीमा धन तथा 50,000/- रुपये लॉयल्टी एडीशन) होगा।

- उपरोक्त रकम में बीमा धन 2,00,000/- का भुगतान सुनिश्चित है जबकि 50,000/- रुपयों का लॉयल्टी एडीशन का भुगतान अनुमानित है।

- हिसाब करें तो पायेंगे कि इस आदमी ने 20 वार्षिक किश्तों में कुल 1,40,046/- चुकाए। अर्थात् बीमा धन से 60 हजार रुपये कम (अर्थात् बीमा धन की 70 प्रतिशत रकम) दिए जबकि प्राप्तियाँ, जमा की गई रकम से लगभग एक लाख रुपये अधिक हो रही है।

- यदि, दुर्भाग्यवश इस आदमी की मृत्यु, पॉलिसी के पाँच वर्ष पूरे होने के बाद किसी भी समय होती है तो भी उसके नामिनी को लगभग इतनी ही रकम मिलेगी। और यह मृत्यु यदि दुर्घटना से हुई तो इसमे दो लाख रुपये और जुड़ जाएँगे।

- यदि यह मृत्यु, पॉलिसी के पाँच वर्ष पूरे होने से पहले हुई तो नामिनी को बीमा धन की रकम मिलेगी। दुर्घटना मृत्यु की दशा में, बीमा धन की दोगुनी रकम मिलेगी।

लॉयल्टी एडीशन की गणना

लॉयल्टी एडीशन की गणना मैंने अत्यधिक कंजूसी से की है। एलआईसी की, लॉयल्टी एडीशन के प्रावधानवाली मौजूदा पॉलिसियों में, 10 वर्ष की अवधिवाली पॉलिसियों के लिए 250 रुपये प्रति हजार बीमा धन के हिसाब से (अर्थात्, एक लाख रुपये बीमा धन पर 25,000/- रुपये के हिसाब से) लॉयल्टी एडीशन का भुगतान किया गया है। 20 वर्षों की अवधि के लिए यह दर 600-700 रुपयों तक (अर्थात् एक लाख की पॉलिसी पर 70 हजार रुपये) की दर से भुगतान का प्रावधान है। चूँकि मैं तनिक ‘भयभीत’ आदमी हूँ इसलिए, ऊँची-ऊँची तथा लम्बी-चौड़ी बातें करने की हिम्मत नहीं जुटा पाता। लेकिन तय मानिए कि लॉयल्टी एडीशन की रकम, मेरी बताई गई, 250 रुपये प्रति हजार बीमा धन से अधिक ही होगी और अच्छी-खासी अधिक होगी। किन्तु, कानूनी नुक्तों के मद-ए-नजर, मेरी बताई दर को भी ग्यारण्टी बिलकुल न मानें। हाँ, बीमा धन की रकम की ग्यारण्टी तो बराबर है।

मेरी (बिना माँगी) सलाह है कि यदि आप कम से कम भाव में ‘जोखिम सुरक्षा’ खरीदने में विश्वास करते हैं तो आपके लिए यह निश्चय ही ‘उपयुक्त पॉलिसी’ है। खुद के लिए, अपने परिजनों के लिए तो लीजिए ही, अपने परिचितों, मित्रों को भी इसके लिए प्रेरित और प्रोत्साहित करें। आपके संस्थान के और घरेलू कर्मचारियों के लिए भी यह आदर्श पॉलिसी है।

मैंने इसे ‘आम आदमी की बीमा पॉलिसी’ कहा है। लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि ‘खास आदमी‘ इसे नहीं ले सकते। वस्तुतः यह पॉलिसी आम-ओ-खास, सबके लिए समान रूप से आदर्श पॉलिसी भी है और समान रूप से उपलब्ध भी है। 

‘जीवन वृद्धि’ - एक तलाश खत्म

अपने निवेश को अनिश्चितता की जोखिम से बचाने और सुनिश्चित लाभ की प्राप्ति की तलाश करनेवाले लोग अब आराम की साँस ले लें। 01 मार्च 2012 से बाजार में आई, भारतीय जीवन बीमा निगम की ‘जीवन वृद्धि’ पॉलिसी ने उनकी तलाश खत्म कर दी है। किन्तु सावधान! यह पॉलिसी 120 दिनों के लिए (अर्थात्, 30 जून 2012 तक) ही उपलब्ध है।

देखने-सुनने और समझने में इससे अधिक आसान और सीध-सादी पॉलिसी शायद ही कोई और हो। इसमें ‘किन्तु-परन्तु’ अपवादस्वरूप ही हैं।

यह पॉलिसी 8 वर्ष (पूर्ण) से लेकर 50 वर्ष की निकटतम आयुवालों के लिए उपलब्ध है।

पॉलिसी की अवधि 10 वर्ष है और इसकी प्रीमीयम दस वर्षों में एक ही बार देनी है। अर्थात् यह एकल (सिंगल) प्रीमीयम पॉलिसी है।

निवेश की न्यूनतम रकम 30,000/- (तीस हजार) रुपये है जबकि अधिकतम निवेश राशि की कोई सीमा नहीं है। तीस हजार के बाद एक हजार रुपयों के गुणक में राशि निवेश की जा सकती है। किन्तु याद रखिए! इस प्रीमीमय राशि पर सेवा शुल्क (सर्विस टैक्स) अतिरिक्त रूप से चुकाना पड़ेगा।

इसमें बीमा धन की गणना दो स्तर पर की गई है - आधारभूत बीमा राशि (बेसिक सम अश्योर्ड) तथा सुनिश्चित परिवक्वता बीमा राशि (ग्यारण्टीड मेच्यूरिटी सम अश्योर्ड)।

आधार भूत बीमा राशि (बेसिक सम अश्योर्ड) की गणना बहुत ही आसान है - प्रीमीयम का पाँच गुना। अर्थात् यदि किसी ने एक लाख रुपये प्रीमीयम जमा की है तो उसे पाँच लाख की बीमा सुरक्षा मिलेगी। याने, किसी भी आयु के व्यक्ति ने यदि 1,00,000/- रुपये निवेश किए हैं और पॉलिसी अवधि (10 वर्ष) के दौरान उसकी मृत्यु हो जाती है तो उसके नामित व्यक्ति को 5,00,000/- रुपयों की बीमा राशि का भुगतान किया जाएगा जो सुनिश्चित परिवक्वता बीमा राशि (ग्यारण्टीड मेच्यूरिटी सम अश्योर्ड) की रकम से कहीं अधिक होगी।

सुनिश्चित परिवक्वता बीमा राशि (ग्यारण्टीड मेच्यूरिटी सम अश्योर्ड) की रकम आयु के आधार पर निर्धारित की गई है जो प्रत्येक आयु के अनुसार सुनिश्चित है। कम आयुवाले व्यक्ति चूँकि ‘जोखिम क्षेत्र’ (रिस्क झोन) में कम समय तक रहेंगे इसलिए उन्हें अधिक राशि मिलेगी जबकि अधिक आयुवाले को कम राशि मिलेगी क्योंकि वे ‘जोखिम क्षेत्र’ (रिस्क झोन) में जल्दी प्रवेश करेंगे (मुमकिन है, पॉलिसी लेते समय ही) और कम आयुवालों की अपेक्षा अधिक समय तक ‘जोखिम क्षेत्र’ (रिस्क झोन) में बने रहेंगे। उदाहरण के लिए - एक लाख रुपयों के निवेश पर 8 वर्ष की आयुवाले व्यक्ति को 1,98,460/- रुपये, 20 वर्ष की आयुवाले व्यक्ति को 1,95,550/- रुपये, 30 वर्ष की आयुवाले व्यक्ति को 1,94,160/- रुपये, 40 वर्ष की आयुवाले व्यक्ति को 1,85,710/- रुपये और 50 वर्ष की आयुवाले व्यक्ति को 1,58,225/- रुपये सुनिश्चित रूप से भुगतान किए जाएँगे।

उपरोक्त राशि के अतिरिक्त, (यदि योजना का अर्थशास्त्र अनुकूल रहा, जिसकी की शत प्रतिशत सम्भावना है) तो ‘निष्ठा आधिक्य राशि’ (लॉयल्टी एडीशन अमाउण्ट) के भुगतान की सम्भावना भी प्रकट की गई है। इस रकम का निर्धारण इसके भुगतान के समय ही हो सकेगा।

उल्लेखनीय बात यह है कि ‘निष्ठा आधिक्य राशि’ (लॉयल्टी एडीशन अमाउण्ट) के भुगतान का प्रावधान दोनों ही स्थितियों (मृत्यु दावा और परिपक्वता दावा) के लिए किया गया है।

याने, जैसा कि ऊपर बताया गया है - कम आयुवाले व्यक्ति को निवेशित राशि के दुगुने से भी अधिक का भुगतान मिलता दिखाई दे रहा है जबकि अधिक आयुवालों को कम से कम डेढ़ गुना भुगतान तो निश्चित रूप से मिलना ही है।

50,000/- रुपयों से अधिक रकम निवेश करनेवालों को अतिरिक्त लाभ दिए जाने का प्रावधान किया गया है।

50,000/- रुपयों से 99,000/- रुपये तक निवेश करनेवालों को, सुनिश्चित परिवक्वता बीमा राशि (ग्यारण्टीड मेच्यूरिटी सम अश्योर्ड) की रकम की 1.25 प्रतिशत रकम तथा 1,00,000/- रुपयों से अधिक की रकम निवेश करनेवालों को सुनिश्चित परिवक्वता बीमा राशि (ग्यारण्टीड मेच्यूरिटी सम अश्योर्ड) की रकम की 3 प्रतिशत रकम अतिरिक्त रूप से भुगतान की जाएगी। याने, अधिक निवेश कीजिए और अधिक प्राप्तियाँ लीजिए।

पॉलिसी का एक वर्ष पूरा होने के इसे अभ्यर्पित (सरेण्डर या बन्द) भी किया जा सकता है। उस दशा में, निवेशित प्रीमीयम की 90 प्रतिशत रकम, अभ्यर्पित मूल्य (सरेण्डर वेल्यू) के रूप में मिलेगी।

इसी प्रकार इस पॉलिसी पर ऋण (पॉलिसी लोन) भी लिया जा सकता है। इस ऋण की अधिकतम रकम, उपरोल्लेखित अभ्यर्पण मूल्य (सरेण्डर वेल्यू) की 70 प्रतिशत होगी। इस ऋण राशि पर 10.25 प्रतिशत वार्षिक की दर से ब्याज लिया जाएगा जिसकी गणना अर्ध्दवार्षिक आधार पर होगी और यदि निर्धारति अवधि में ब्याज की रकम का भुगतान नहीं किया गया तो, उस ब्याज राशि पर इसी दर से चक्रवृद्धि ब्याज लगेगा।

इस पॉलिसी को, चालू वित्तीय वर्ष की सीमा में, पिछली तारीखों से भी शुरु किया जा सकता है। अर्थात्, यदि कोई व्यक्ति 31 मार्च 2012 को यह पॉलिसी ले रहा है तो वह इसका प्रारम्भ दिनांक 01 अप्रेल 2011 निर्धारित कर सकता है। किन्तु, ऐसा करने पर उसे, प्रीमीयम की रकम पर, 10 प्रतिशत वार्षिक की साधारण दर से ब्याज भुगतान करना पड़ेगा। किन्तु तब, 09 वर्षों में ही पॉलिसी के 10 वर्ष पूरे हो जाएँगे और पॉलिसीधारक एक वर्ष पूर्व ही सुनिश्चित परिवक्वता बीमा राशि (ग्यारण्टीड मेच्यूरिटी सम अश्योर्ड) तथा निष्ठा आधिक्य (लॉयल्टी एडीशन) की रकम प्राप्त कर लेगा। किन्तु ऐसा करने पर हानि यह होगी कि प्रीमीयम तो 10 वर्षों की चुकाई जाएगी जबकि जोखिम सुरक्षा 9 वर्षों तक ही उपलब्ध होगी।

आवश्यकता होने पर पॉलिसीधारक, विधिवत सूचना देकर अपनी इस पॉलिसी को, किसी संस्था के पक्ष में समनुदेशित (असाइन) भी कर सकेगा। अर्थात् किसी संस्था से वित्तीय सुविधा लेने के लिए इसे गिरवी भी रखा जा सकेगा।

कर छूट - इस पॉलिसी के लिए निवेशित रकम पर, आय कर की धारा 80 सी के अन्तर्गत कर-छूट प्राप्त होगी और इससे मिलनेवाली पूरी रकम, आय कर से मुक्त होगी। अर्थात्, यदि कोई व्यक्ति 30 प्रतिशत की दर से आय कर चुका रहा है तो उसे, दोनों बार मिलनेवाली आयकर छूट की गणना के बाद, निवेशित रकम का ढाई गुना तक लाभ होता नजर आता है।

पहली नजर में यह पॉलिसी, निवेशकों को समग्र रूप से न केवल लाभदायक अपितु कर नियोजन हेतु अपनाए जानेवाले अन्य माध्यमों की अपेक्षा अधिक आकर्षक अनुभव होती है।

मैंने अपने स्तर पर इसे सरलता से प्रस्तुत करने की भरसक कोशिश की है। इसके बाद भी यदि आपकी कोई जिज्ञासा हो तो आपके लिए सहायक और उपयोगी होकर मुझे आत्मीय प्रसन्नता होगी। मैं ई-मेल तथा मोबाइल नम्बर 098270 61799 पर समान रूप से, सहजता से उपलब्ध हूँ।

जीवन अंकुर : सम्भवतः दुनिया में प्रथम और एक मात्र

अपने बच्चों की उच्च शिक्षा और सुदृढ़ भविष्य की सुनिश्चितता के लिए चिन्तित पालकों के लिए, भारतीय जीवन बीमा निगम आज, 23 जनवरी 2012 को, एक रामबाण बीमा पॉलिसी बाजार में पेश कर रहा है। इस अनूठी पॉलिसी का नाम है - जीवन अंकुर।

बीमा अभिकर्ता के रूप में मेरा बाईसवाँ वर्ष चल रहा है और अपने अब तक के ज्ञान, सूचनाओं और विश्वास के आधार पर कहने का साहस कर रहा हूँ कि ऐसी बीमा पॉलिसी दुनिया में किसी और बीमा कम्पनी के पास नहीं है। भारतीय जीवन बीमा निगम सहित तमाम बीमा कम्पनियों की तमाम बीमा पॉलिसियों में, पॉलिसीधारक की मृत्यु के बाद, पॉलिसी में नामित व्यक्ति को दावा राशि का भुगतान करने के बाद पॉलिसी समाप्त हो जाती है। किन्तु ‘जीवन अंकुर’ में पहली बार यह प्रावधान किया गया है कि पॉलिसीधारक की मृत्यु के बाद, नामित को पॉलिसी की रकम का भुगतान जारी रहने के दौरान यदि नामित व्यक्ति की भी मृत्यु हो जाए तो, स्वर्गवासी पॉलिसीधारक के विधिसम्मत उत्तराधिकारी को दावे की रकम का भुगतान किया जाए।

यह पॉलिसी, बच्चों की आर्थिक सुरक्षा के लिए अभिकल्पित (डिजाइन) की गई है। इसमें, बीमा सुरक्षा पिता/माता को प्रदान की जाती है जबकि भुगतान बच्चे को किया जाता है। पॉलिसी में नामित (नामिनी) के रूप में बच्चे का नामांकन अनिवार्य किया गया है।18 से 50 वर्ष की आयुवाले समस्त माता-पिता, अपने, 17 वर्ष तक की आयुवाले बच्चे/बच्चों के लिए यह पॉलिसी ले सकते हैं। पॉलिसी (और किश्त भुगतान) की न्यूनतम अवधि 8 वर्ष तथा अधिकतम अवधि 25 वर्ष है। न्यूनतम अवधि का निर्धारण, 18 में से बच्चे की वर्तमान आयु कम करके किया जाता है। उदाहरणार्थ यदि किसी बच्चे की आयु 3 वर्ष है तो पॉलिसी (और किश्त भुगतान) अवधि 15 वर्ष हो सकती है। ग्राहक चाहे तो यह अवधि कम की जा सकेगी किन्तु यह अवधि 8 वर्ष से कम नहीं होगी। इसे यूँ भी समझा जा सकता है कि यदि कोई पिता अपने 17 वर्षीय बच्चे के लिए यह पॉलिसी लेना चाहता है तो उसे 8 वर्ष के लिए ही यह पॉलिसी मिल सकेगी। यहाँ 18 में से बच्चे की आयु (17 वर्ष) करने पर एक वर्ष की अवधि की सुविधा पिता को नहीं मिल सकेगी। इसी प्रकार, यदि कोई बच्चा अभी पहले ही वर्ष में है तो उसका पिता अधिकतम 25 वर्ष की अवधि के लिए यह पॉलिसी ले सकता है किन्तु यदि वह चाहे तो इससे कम की अवधि भी तय कर सकता है किन्तु यह अवधि 8 वर्ष से कम नहीं होगी। जाहिर है कि बच्चे की अधिकतम आयु 25 वर्ष होते-होते पॉलिसी परिपक्व हो जाएगी।

पॉलिसी अवधि के दौरान पात्र पिता/माता के जीवन पर बीमा धन के बराबर जोखिम सुरक्षा उपलब्ध रहेगी। पॉलिसी अवधि पूरी होने पर, पॉलिसीधारक को बीमा धन की रकम तथा पॉलिसी अवधि के लिए घोषित निष्ठा आधिक्य (लॉयल्टी एडीशन) की रकम का भुगतान कर दिया जाएगा।

किन्तु पॉलिसी अवधि पूरी होने से पहले ही यदि पॉलिसीधारक की मृत्यु हो जाती है तो बीमा धन की रकम का भुगतान नामित (नामिनी) बच्चे को तत्काल किया जाएगा। यदि मृत्यु दुर्घटना से हुई है तो मूल बीमा धन के बराबर रकम का अतिरिक्त भुगतान भी किया जाएगा।

यहीं से पॉलिसी की उल्लेखनीय विशेषताएँ शुरु होती हैं।

पॉलिसीधारक की मृत्यु के बाद उपरोक्तानुसार भुगतान कर देने के बाद, पॉलिसीधारक की मृत्यु के बाद आनेवाली, पॉलिसी की वार्षिक तारीख से पॉलिसी परिपक्व होने से पहले वर्ष तक की, पॉलिसी की वार्षिक तारीख पर, प्रति वर्ष, बीमा धन की दस प्रतिशत रकम का भुगतान, नामित बच्चे को किया जाता रहेगा और पॉलिसी परिपक्वता दिनांक को सम्पूर्ण बीमा धन तथा पॉलिसी अवधि के निष्ठा आधिक्य (लॉयल्टी एडीशन) की रकम का भुगतान, नामित बच्चे को एक बार फिर किया जाएगा।

पॉलिसी पूरी होने से पहले यदि नामित बच्चे की मृत्यु हो जाए तो पॉलिसीधारक अपने दूसरे बच्चे को अथवा अन्य किसी व्यक्ति को नामित (नामिनी) बना सकता है जो, पॉलिसीधारक की मृत्यु के बाद उपरोक्तानुसार रकम प्राप्त करने का अधिकारी होगा। पॉलिसीधारक की मृत्यु के बाद, पॉलिसी में उल्लेखित बीमा धन की रकम प्राप्त करने के बाद और प्रति पॉलिसी वर्ष पर, बीमा धन की दस प्रतिशत रकम प्राप्त करना शुरु करने के बाद यदि नामित बच्चे अथवा नामित अन्य व्यक्ति की भी मृत्यु हो जाए तो पॉलिसीधारक के विधिसम्मत उत्तराधिकारी को शेष अवधि के लिए उल्लेखित वार्षिक किश्तों की रकम तथा परिपक्वता पर बीमा धन और निष्ठा आधिक्य (लॉयल्टी एडीशन) की रकम का भुगतान किया जाएगा। याने, पॉलिसीधारक की मृत्यु के बाद, पॉलिसी में नामित बच्चा जीवित रहे तो वह लाभान्वित होगा और दुर्भाग्य से वह भी जीवित न रह पाया तो पॉलिसीधारक के विधिसम्मत उत्तराधिकारी को शेष सारी रकम का भुगतान सुनिश्चित रूप से मिलेगा ही मिलेगा। यही व्यवस्था, इस पॉलिसी को दुनिया की सारी बीमा कम्पनियों की तमाम पॉलिसियों से अलग बनाती है।

इसे उदाहरण से इस प्रकार समझा जा सकता है -

अपने तीन वर्षीय बेटे के लिए मैंने एक लाख रुपयों की यह पॉलिसी ली। मेरी इच्छा रही कि जब मेरा बेटा, 17 वर्ष की उम्र में बारहवी पास कर उच्च शिक्षा के लिए किसी कॉलेज का दरवाजा खटखटाए तब उसके लिए मेरे पास यह रकम उपलब्ध हो। इसलिए मैंने पॉलिसी की अवधि 14 वर्ष तय की। 14 वर्षों बाद मुझे मूल बीमाधन एक लाख रुपये तथा 14 वर्षों की, निष्ठा आधिक्य (लॉयल्टी एडीशन) की रकम (अनुमानित 60 हजार रुपये) मिल जाएगी।

यदि इन 14 वर्षों के दौरान मेरी मृत्यु हो जाती है तो मूल बीमाधन की रकम एक लाख रुपयों का भुगतान मेरे बेटे को हो जाएगा। यदि मेरी मृत्यु दुर्घटना से होती है तो एक लाख रुपयों का अतिरिक्त भुगतान (याने कुल दो लाख रुपये) मेरे बेटे को कर दिया जाएगा। मान लें कि पॉलिसी लेने के चार वर्षों बाद मेरी मृत्यु हुई। याने पॉलिसी के 10 वर्ष बाकी रहे। चूँकि मेरी मृत्यु हो चुकी है इसलिए प्रीमीयम तो बन्द हो ही जाएगी किन्तु मेरी मृत्यु के बाद आनेवाली, पॉलिसी की प्रत्येक वार्षिक तारीख पर मेरे बेटे को 10 हजार रुपयों का भुगतान मिलेगा और जिस दिन पॉलिसी पूरी होगी उस दिन मूल बीमाधन एक लाख रुपये तथा 14 वर्षों की, निष्ठा आधिक्य (लॉयल्टी एडीशन) की रकम (जो मैंने 60 हजार अनुमानित बताई है) का भुगतान मेरे बेटे को किया जाएगा।

किन्तु, पॉलिसी अवधि पूरी होने से पहले और पॉलिसी की प्रत्येक वार्षिक तारीख को उपरोक्तानुसार भुगतान लेते हुए यदि मेरे बेटे की भी मृत्यु हो जाती है तो शेष वर्षों के लिए, मेरे कानूनी वारिस को, पॉलिसी की प्रत्येक वार्षिक तारीख को दस हजार रुपयों का भुगतान मिलेगा और पॉलिसी पूरी होने की तारीख पर उपरोक्तानुसार लगभग 1 लाख 60 हजार रुपयों का भुगतान मिलेगा।

पॉलिसी पूरी होने से पहले, मेरे जीते जी यदि मेरे बेटे की मृत्यु हो जाए तो मैं अपने किसी अन्य बच्चे को या अपने किसी रिश्तेदार को नामित (नामिनी) बना सकता हूँ जो मेरे बेटे के अनुसार ही, उपरोक्तानुसार समूचा भुगतान प्राप्त करने का अधिकारी होगा और पॉलिसी पूरी होने से पहले उसकी मृत्यु हो जाने की दशा में मेरा कानूनी वारिस उपरोक्तानुसार भुगतान प्राप्त कर सकेगा।

इस पॉलिसी के लिए न्यूनतम बीमाधन एक लाख रुपये है। अधिकतम की कोई सीमा नहीं है किन्तु वह आपकी आय और आयु से सम्बद्ध होगी। किश्त भुगतान वार्षिक, छःमाही, तिमाही, मासिक (वेतन बचत योजना और ई सी एस) आधार पर किया जा सकता है। चुकाई गई किश्तों की रकम पर आय कर की छूट मिलेगी और पॉलिसी से प्राप्त होनेवाली रकम पूरी तरह आयकर से मुक्त होगी।

हाँ, भारतीय जीवन बीमा निगम के ग्राहकों को पहली बार अपनी किश्त के अतिरिक्त ‘सेवा शुल्क’ चुकाना पड़ेगा। सेवा शुल्क की दर इस समय 10.3 प्रतिशत है। इस पर भा. जी. बी. नि. का कोई नियन्त्रण नहीं है क्यों कि इसे बढ़ाना, कम करना, आगे जारी रखना न रखना - सब कुछ केन्द्र सरकार के नियन्त्रण में है।

यदि आपकी आयु 50 वर्ष के भीतर है और आपके बच्चे/बच्चों की आयु 17 वर्ष से कम है तो अपनी आर्थिक क्षमतानुसार यह पॉलिसी लेने पर विचार अवश्य कीजिए।

आपकी कोई जिज्ञासा हो तो अवश्य सूचित कीजिएगा। ब्लॉग पर तो मैं उपलब्ध हूँ ही। आप चाहें तो ई-मेल पर अथवा मोबाइल नम्बर 098270 61799 पर भी मुझसे पूछताछ कर सकते हैं।

यूलिप पॉलिसियाँ: जन्नत की हकीकत


यूलिप पॉलिसियों पर ‘सेबी’ और ‘इरडा’( भारतीय बीमा विनिमायक एवम् विकास प्राधिकरण अर्थात् आई आर डी ए) के बीच मचे द्वन्द्व में कौन सही है और कौन गलत, इससे परे हटकर, यूलिप पॉलिसियों की संरचना और इनकी सामाजिक-आर्थिक भूमिका पर विचार करने का यह ठीक प्रसंग और अवसर है।


बीमा क्षेत्र में निजी कम्पनियों के आगमन से पहले यूलिप पॉलिसियाँ इतनी प्रचारित और चर्चित नहीं थीं। तब केवल भारतीय यूनिट ट्रस्ट ही ‘यूलिप’ नाम से अपनी एक योजना बेचा करता था। किन्तु बीमा क्षेत्र में आई निजी कम्पनियों ने समूचा परिदृश्य ही बदल दिया। इन कम्पनियों ने भारतीय जीवन बीमा निगम द्वारा बेची जा रही पारम्परिक जीवन बीमा योजनाओं को परे धकेल पर यूलिप पॉलिसियों का बोलबाला कायम कर दिया। ‘यूलिप’ में निवेशित राशि दो भागों में बँटती है। एक भाग होता है जीवन बीमा प्रीमीयम वाला जो नाम मात्र का होता है। शेष बड़ा भाग स्‍टॉक मार्केट में निवेश किया जाता है। मोटे तौर पर ‘यूलिप’ पूरी तरह से स्‍टॉक मार्केट आधारित और केन्द्रित होती हैं। इन पॉलिसियों के इसी ‘चरित्र’ के आधार पर सेबी ने इन पर प्रतिबन्ध लगाया।


इन पॉलिसियों के निवेशित राशि पर बाजार की जोखिम सदैव हावी रहती है जिसे ग्राहक वहन करता है, बीमा कम्पनियों की कोई जवाबदारी नहीं रहती। वे तो ग्राहक से पैसा लेकर उसे उसकी ओर से बाजार में लगा देती हैं। किन्तु कम्पनियाँ यह काम मुत में नहीं करतीं। इस काम के लिए वे फण्ड प्रबन्धन शुल्क, पॉलिसी प्रबन्धन शुल्क, फण्ड आबण्टन शुल्क जैसे विभिन्न शुल्क ग्राहक से वसूल करती हैं। इसके अतिरिक्त एजेण्ट को दिया जाने वाला कमीशन और निवेशित रकम को एक फण्ड से दूसरे फण्ड में स्थानान्तरित करने (स्विच ओव्हर) का शुल्क भी ग्राहक की जेब से ही जाता है। इनमें से कुछ शुल्कों की दर तो प्रति पॉलिसी के आधार पर होती है और कुछ की दर फण्ड की रकम के प्रतिशत के मान से। अधिकांश शुल्कों की रकम प्रथम वर्ष में सर्वाधिक, दूसरे और तीसरे वर्ष में उससे तनिक कम तथा चैथे वर्ष से लेकर शेष पॉलिसी अवधि तक उससे भी कम (अर्थात् सबसे कम) होती है। इसे यूँ समझा जा सकता है कि दस हजार रुपये निवेश करनेवाले ग्राहक की रकम में से पहले वर्ष लगभग तीन हजार रुपये काट लिए जाते हैं और शेष सात हजार रुपये ही निवेश के लिए उपलब्ध रहते हैं। ग्राहक दस हजार की गणित में रहता है जबकि वास्तविकता सात हजार की रह जाती है। जाहिर है कि ग्राहक की रकम में से प्रथम तीन वर्षों में सर्वाधिक कटौती होती है।


यूलिप पॉलिसियों के आक्रामक विपणन प्रचार के कारण, पॉलिसी शर्तों के मुताबिक न्यूनतम रकम निवेश करनेवाले औसत मध्यमवर्गीय लोग सर्वाधिक आकर्षित होते हैं। बीमा कम्पनियों के आँकड़े ही बता देंगे कि दस-दस हजार रुपये वाले निवेशक करोड़ों में और लाखों रुपये वाले निवेशक लाखों में होंगे। बीमा कम्पनियाँ जो आँकड़े प्रचारित करती हैं, वे लाखों के निवेशवाले होते हैं। दस-दस हजार रुपये लगानेवाला औसत मध्यमवर्गीय ग्राहक मान लेता है कि उसे बड़े ग्राहक के आनुपातिक लाभ मिलेंगे। वह रातों रात लखपति/करोड़पति बनने का सपना पाल लेता है। उस समय उसे पता ही नहीं होता कि विभिन्न शुल्कों के नाम पर उसके दस हजार रुपयों में से जितनी रकम काटी जाएगी, उतनी ही रकम एक लाख रुपये लगानेवाले ग्राहक से भी काटी जाएगी। इसके अतिरिक्त प्रति वर्ष बीमा प्रीमीयम भी काटी जाएगी जो निवेशक की बढ़ती उम्र के कारण प्रति वर्ष बढ़ती जाएगी। याने, स्‍टॉक मार्केट में लगाने के लिए छोटे निवेशक की रकम कम और बड़े निवेशक की रकम अधिक उपलब्ध रहेगी। इसी पेंच के कारण छोटा निवेशक सदैव मात खाता रहता है। बीमा एजेण्ट भी ग्राहकों को यह पेंच पूरी तरह नहीं समझाते। शायद वे खुद भी नहीं जानते हों। इस प्रकार यूलिप पॉलिसियाँ ‘पैसा पैसे को खींचता है’ पाली लोकोक्ति को ही साबित करती हैं।


किसी भी पॉलिसी को तीन वर्ष बाद बन्द कर ग्राहक अपना पैसा वापस ले सकता है। बीमा एजेण्ट इस स्थिति को अतिरिक्त आकर्षण के रूप में प्रस्तुत करते हैं। ग्राहक को लगता है कि उसे तो कुल तीन वर्ष तक ही रकम जमा करनी है। तीन वर्ष पूरे होते ही जब वह अपनी रकम लेने पहुँचता है तो उसके पैरों से जमीन खिसक जाती है जब उसे मालूम होता है कि उसे उसकी मूल रकम भी नहीं नहीं मिल पा रही है। प्रथम तीन वर्षों की शुल्क कटौती इतनी अधिक होती है कि ग्राहक की मूल पूँजी भी उसे मिल जाए तो गनीमत। वस्तुतः यूलिप पॉलिसियों का पूर्ण लाभ लेने के लिए ग्राहक को 6 से 9 वर्ष की अवधि का धैर्य रखना चाहिए। किन्तु इन पॉलिसियों की बिक्री ही तीन वर्षों की अवधि बताकर की जाती है। जबकि यूलिप पॉलिसियों का आधारभूत ‘फण्डा’ होता है - अपेक्षित लाभ लेने के लिए अधिक रकम, अधिक समय तक रखें और धैर्यपूर्वक प्रतीक्षा करें।


बीमा कम्पनियों को और सरकार को यूलिप पॉलिसियाँ सदैव ही अनुकूल रहती हैं। चूँकि सारी जोखिम ग्राहक ही वहन करता है सो कम्पनियाँ बेफिक्र रहती हैं। वे अपना स्थापना खर्च (अधिकारियों/कर्मचारियों के भारी भरकम पेकेज की रकम, वेतन-भत्ते) निकालने के बाद वाला लाभांश ही ग्राहक को देती हैं। इसे यूँ भी कहा जा सकता है कि इन कम्पनियों के अधिकारियों/कर्मचारियों के लाखों के पेकेज का भुगतान दस-दस हजार रुपये लगानेवाले छोटे निवेशक करते हैं। सरकार भी इन पाॅलिसियों को भरपूर प्रोत्साहित करती है क्यों कि इन पॉलिसियों का पैसा स्टाॅक मार्केट में लगता है और हम देख रहे हैं कि 1991 से लागू की गई ‘एलपीजी’ वाली हमारी आर्थिक नीतियाँ केवल बाजार को पोषित-पल्लवित कर रही हैं और बाजार पर ही निर्भर हैं। गोया, ‘धनवान अधिक धनवान और गरीब अधिक गरीब’ की अवधारण के तहत पूरे देश को बाजार में बदलने की सरकारी नीतियों का खर्चा देश के छोटे निवेशकों से वसूल किया जा रहा है।


यूलिप पॉलिसियों के लाभ-हानि का आकलन करने पर स्थिति बहुत उत्साहित करनेवाली नहीं लगती। इनके छोटे निवेशकों को लाभ कम और नुकसान अधिक मिलते दिखाई देते हैं। ये लोगों को रोतों रात लखपति बनने का सपना दिखाकर उन्हें लालची, सट्टेबाज और अकर्मण्य बनाती दिखती हैं। इनका सबसे बड़ा नुकसान यह है कि ये बीमा की मूलभूत अवधारण को ही निरस्त करती हैं जो कि किसी भी बीमा कम्पनी की प्रारम्भिक, मुख्य और एकमात्र गतिविधि होनी चाहिए। तीन वर्ष बाद अपनी रकम निकालने के लालच में ग्राहक बीमा सुरक्षा से वंचित हो जाता है। जब वह नई पॉलिसी लेता है तो उसकी उम्र बढ़ जाने के कारण उसकी बीमा प्रीमीयम भी बढ़ जाती है और तीन साल बाद पॉलिसी बन्द करने के क्रम के चलते एक स्थिति यह आ जाती है कि ग्राहक को बीमा मिलना ही सम्भव नहीं रह जाता।


तीन वर्ष बाद पॉलिसी बन्द कराने की सुविधा का उपयोग बीमा कम्पनियाँ प्रायः ही अपने पक्ष में करती रहती हैं। उनके पास पूरा रेकार्ड रहता है कि किस ग्राहक की पॉलिसी को तीन वर्ष पूरे हो रहे हैं। वे अपने एजेण्टों को ऐसे ग्राहकों के पास भेज कर उन्हें प्रेरित करती हैं कि ग्राहक अपनी मौजूदा पॉलिसी बन्द कर यही पैसा किसी नई यूलिप योजना में लगा दे। पॉलिसी की संरचना और चरित्र से अनजान ग्राहक अपने एजेण्ट पर भरोसा कर वैसा ही कर लेता है। ऐसे में कम्पनी को न तो नया ग्राहक मिला और न ही नया निवेश किन्तु उसकी बिक्री के आँकड़े बढ़ गए और एजेण्ट को पूरा कमीशन मिल गया। ग्राहक को तो पता ही नहीं चलता कि वह इस खेल में आर्थिक मोहरे के रूप में प्रयुक्त कर लिया गया है। बीमा क्षेत्रों में इसे ‘रिसायकलिंग’ (पुनर्निवेश) कहा जाता है। यदि इन कम्पनियों से आँकड़े लिए जाएँ तो मालूम पड़ेगा कि अस्सी प्रतिशत यूलिप पॉलिसियाँ इस प्रकार ‘रिसायकल’ (पुनर्निवेशित)कर दी गई हैं।


यूलिप पॉलिसियों की बिक्री के लिए बीमा कम्पनियाँ केवल इरडा के अधीन ही रहें या उन्हें सेबी से भी पंजीयन लेना पड़ेगा, इससे परे हटकर इन पॉलिसियों के सामाजिक प्रभाव और लोगों को बीमित किए जाने की मूल अवधारणा के परिप्रेक्ष्य में अवश्य ही विशद् विवेचन किया जाना चाहिए।
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आपकी बीमा जिज्ञासाओं/समस्याओं का समाधान उपलब्ध कराने हेतु मैं प्रस्तुत हूँ। यदि अपनी जिज्ञासा/समस्या को सार्वजनिक न करना चाहें तो मुझे bairagivishnu@gmail.com पर मेल कर दें। आप चाहेंगे तो आपकी पहचान पूर्णतः गुप्त रखी जाएगी। यदि पालिसी नम्बर देंगे तो अधिकाधिक सुनिश्चित समाधान प्रस्तुत करने में सहायता मिलेगी।


यदि कोई कृपालु इस सामग्री का उपयोग करें तो कृपया इस ब्लाग का सन्दर्भ अवश्य दें । यदि कोई इसे मुद्रित स्वरूप प्रदान करें तो कृपया सम्बन्धित प्रकाशन की एक प्रति मुझे अवश्य भेजें । मेरा पता है - विष्णु बैरागी, पोस्ट बाक्स नम्बर - 19, रतलाम (मध्य प्रदेश) 457001.

बच्चों की शिक्षा/ विवाह के लिए बीमा पॉलिसी


शिक्षा आज के सर्वाधिक मँहगी आवश्यकताओं में से एक है। परिवार में सन्तान के आते ही उसकी उच्च शिक्षा अथवा (कन्या जन्म के मामले में उसके) विवाह की चिन्ता सताने लगती है। ऐसे में, भारतीय जीवन बीमा निगम की ‘शिक्षा/विवाह बन्दोबस्ती पॉलिसी’ (तालिका 90) पिता/माता को इस चिन्ता से मुक्त करने में सहायक होती है। भारतीय जीवन बीमा निगम की यह पॉलिसी उन लोगों के लिये ‘आदर्श पॉलिसी’ है जो अपनी सन्तान की शिक्षा अथवा विवाह के लिये एक सुनिश्चित समय पर सुनिश्चित आर्थिक व्यवस्था करना चाहते हैं।

पॉलिसी अवधि के दौरान पॉलिसीधारक के जीवन पर बीमा धन के बराबर रिस्क कवरेज उपलब्ध रहता है और दुर्घटना-मृत्यु की स्थिति में यह कवरेज बीमा धन से दुगुना होता है । पॉलिसी अवधि पूरी होने पर पॉलिसीधारक को मूल बीमा धन की राशि तथा पॉलिसी अवधि की बोनस राशि (तथा अन्तिम-अतिरिक्त बोनस राशि, यदि कोई देय हो तो) का भुगतान किया जाता है ।

पॉलिसी अवधि के दौरान यदि दुर्भाग्यवश पॉलिसीधारक की मृत्यु हो जाए तो -


1. सामान्य मृत्यु की दशा में नामित व्यक्ति को तत्काल तो कोई भुगतान नहीं मिलेगा किन्तु पॉलिसी की अवधि पूरी होने के दिनांक को उपरोक्त वर्णित समस्त धन राशि (अर्थात् मूल बीमा धन की रकम तथा सम्पूर्ण पॉलिसी अवधि की बोनस राशि तथा अन्तिम-अतिरिक्त बोनस राशि (यदि कोई देय हो तो) का भुगतान नामित व्यक्ति को मिलेगा ।

2. दुर्घटना मृत्यु की दशा में मूल बीमा धन के बराबर राशि का भुगतान नामित व्यक्ति को तत्काल किया जाएगा तथा पॉलिसी अवधि पूरी होने पर उपरोक्त वर्णित समस्त रकम नामित व्यक्ति को पुनः भुगतान की जाएगी ।


अर्थात्, पॉलिसी अवधि पूरी होने से पहले, पॉलिसीधारक की अकस्मात मृत्यु के बाद उसकी सन्तान की शिक्षा/विवाह के लिये पॉलिसीधारक द्वारा निर्धारित की गई अवधि पर एक सुनिश्चित रकम उपलब्ध कराने की सुनिश्चित व्यवस्था यह पॉलिसी उपलब्ध कराती है ।

उदाहरण - 27 वर्षीय ‘श्रीमान् क’ आज एक बिटिया के बाप बने हैं। उनका अनुमान है कि उसके 23वें वर्ष में वे उसका विवाह कर देंगे। इस हेतु वे 23 वर्ष की अवधि के लिए 5 लाख रुपये बीमाधन की यह पॉलिसी लेते हैं। इसकी वार्षिक प्रीमीयम होगी रुपये 20,088/- अर्थात् वे 23 वर्षों तक, 20,088/- रुपये प्रति वर्ष चुकाएँगे। पॉलिसी अवधि पूरी होने पर उन्हें परिपक्वता राशि रुपये 13,37,000 (अनुमानित) का भुगतान मिलेगा। इस राशि में मूल बीमाधन की रकम रुपये 5 लाख, 23 वर्षों के बोनस की अनुमानित रकम रुपये 5,52,000 तथा अन्तिम-अतिरिक्त बोनस की अनुमानित रकम रुपये 2,85,000 शामिल है। (बोनस की गणना, भारतीय जीवन बीमा निगम द्वारा वर्ष 2007-08 के लिए घोषित बोनस दरों के आधार पर की गई है।)


‘श्रीमान् क’ को, किश्तों की रकम पर आय कर अधिनियम की धारा 80 सी के अन्तर्गत आय कर छूट मिलेगी तथा परिपक्वता पर मिलने वाली सम्पूर्ण राशि, आय कर अधिनियिम की धारा 10 (10) (डी) के अन्तर्गत आय कर से मुक्त होगी।


इस 23 वर्षों की अवधि के दौरान ‘श्रीमान् क’ के जीवन पर सामान्य मृत्यु की दशा में 5 लाख रुपयों का तथा दुर्घटना मृत्यु की दशा में 10 लाख रुपयों का रिस्क कवरेज उपलब्ध रहेगा। अर्थात् 23 वर्ष की अवधि पूरी होने से पहले यदि, परिवार के दुर्भाग्य से ‘श्रीमान् क’ की मृत्यु हो गई तो -


(1) सामान्य मृत्यु होने पर, ‘श्रीमान् क’ के नामित व्यक्ति को तत्काल कोई भुगतान नहीं मिलेगा। चूँकि बीमित व्यक्ति (अर्थात् ‘श्रीमान् क’) की मृत्यु हो चुकी है सो प्रीमीयम जमा कराने का कोई प्रश्न ही नहीं उठता। किन्तु शेष अवधि के लिए पॉलिसी पूरी तरह प्रभावी मानी जाएगी (अर्थात्, उसे बोनस की पात्रता मिलती रहेगी) और निर्धारित परिपक्वता दिनांक को, ‘श्रीमान् क’ के नामित व्यक्ति को उपरोल्लेखित राशि (अनुमानित 13 लाख 37 हजार रुपये) का भुगतान किया जाएगा।


(2) यदि ‘श्रीमान् क’ की मृत्यु किसी दुर्घटना के कारण हुई है तो मूल बीमा धन (रुपये 5 लाख) के बराबर की रकम का भुगतान, ‘श्रीमान् क’ के नामित व्यक्ति को तुरन्त कर दिया जाएगा और पॉलिसी की निर्धारित परिपक्वता दिनांक को, ‘श्रीमान् क’ के नामित व्यक्ति को उपरोल्लेखित राशि (अनुमानित 13 लाख 37 हजार रुपये) का भुगतान फिर से किया जाएगा।


विशेषता -


इस पॉलिसी का भुगतान या तो (परिपक्वता पर) स्वयम् पॉलिसीधारक को मिलेगा या फिर (पॉलिसीधारक की मृत्यु हो जाने की दशा में) उसके नामित व्यक्ति को मिलेगा।


सामान्य मृत्यु के बाद तत्काल भुगतान न मिलने से, बीमा से मिलने वाली रकम के अनुचति उपयोग (यथा मृत्यु-भोज जैसी उत्तर क्रियाओं में) होने की आशंका नहीं रह पाती है।


भुगतान सन्तान को न मिलने से भी, उसके अनुचित उपयोग की आशंक स्वतः नष्ट हो जाती है।


सन्तान के विवाह के लिए अवधि का अनुमान ही लगाया जा सकता है। यदि बीमा पुत्री का हो और पॉलिसी परिपक्वता से पहले ही उसका विवाह हो जाए तो, विवाहोपरान्त, पॉलिसी की परिपक्वता रकम पर पुत्री का ससुराल पक्ष अधिकार जता सकता है। किन्तु इस पॉलिसी में बीमा चूँकि पिता अथवा माता का होता है, सन्तान का नहीं, इसलिए, इस पॉलिसी की परिपक्वता राशि पर, पुत्री के ससुराल पक्ष द्वारा अधिकार जताने की आशंकाएँ भी स्वतः ही नष्ट हो जाती हैं।


उच्च शिक्षा में सहायक -
बच्चों की उच्च शिक्षा हेतु सुनिश्चित आर्थिक व्यवस्थाएँ इस पॉलिसी के माध्यम से की जा सकती हैं।


आयु के 17वें वर्ष में बच्चा, उच्च शिक्षा के दरवाजे पर खड़ा होता है। आज के चलन के अनुसार उसे अगले 6 वर्ष तो पढ़ना ही है - बी।ई. (अथवा ऐसे ही किसी स्नातक पाठ्यक्रम के लिए) 4 वर्ष और एम. बी. ए. के लिए 2 वर्ष। ऐसे मामलों में व्यक्ति को एक-एक लाख रुपये बीमा धन की 6 पॉलिसियाँ लेनी चाहिए (क्षमता तथा आवश्यकतानुसार अधिक बीमा धन की पॉलिसियाँ भी ली जा सकती हैं) जिनकी अवधि क्रमशः 17 वर्ष, 18 वर्ष, 19 वर्ष, 20 वर्ष, 21 वर्ष और 22 वर्ष होंगी।


17 वर्ष पूरे होने पर लगभग 1 लाख 71 हजार रुपये, 18 वर्ष पूरे होने पर लगभग 1 लाख 73 हजार रुपये, 19 वर्ष पूरे होने पर लगभग 1 लाख 78 हजार रुपये 20 वर्ष पूरे होने पर लगभग 1 लाख 78 हजार 500 रुपये, 21 वर्ष पूरे होने पर लगभग 1 लाख 83 हजार रुपये और 22 वर्ष पूरे होने पर लगभग 1 लाख 85 हजार 500 रुपये मिलेंगे। (अधिक बीमा धन की पॉलिसियाँ लेने पर यह रकम उसी अनुपात में अधिक मिलेगी।) अर्थात् बच्चे की शिक्षा के लिए न केवल प्रति वर्ष रकम उपलब्ध रहेगी अपितु प्रति वर्ष यह बढ़ती ही जाएगी।


जैसा कि पहले बताया जा चुका है, पॉलिसीधारक रहे या न रहे, रकम की यह उपलब्धता सुनिश्चित है।


उपरोक्तानुसार पॉलिसियाँ लेने पर पॉलिसीधारक को पहले 17 वर्षों तक 6 पॉलिसियों की प्रीमीयम चुकानी पड़ेगी। उसके बाद प्रति वर्ष, जैसे-जैसे एक-एक पॉलिसी पूरी होती जाएगी, प्रीमीयम की रकम कम होती जाएगी। अर्थात् 17 वर्षों के बाद मिलने वाली रकम में जहाँ प्रति वर्ष वृद्धि होगी वहीं प्रीमीयम भुगतान का वजन प्रति वर्ष कम होता जाएगा।


इसी के समानान्तर, 17वें वर्ष से, जैसे-जैसे पॉलिसी पूरी होती जाएगी, पॉलिसीधारक का रिस्क कवरेज भी प्रति वर्ष कम होता जाएगा।


पॉलिसी से सम्बन्धित कुछ महत्वपूर्ण बातें -


(1) 18 वर्ष से 60 वर्ष तक की आयु के व्यक्ति यह पॉलिसी ले सकते हैं।


(2) पॉलिसी की न्यूनतम अवधि 5 वर्ष तथा अधिकतम अवधि 25 वर्ष है। किन्तु परिपक्वता के समय पॉलिसीधारक की अधिकतम आयु 70 वर्ष तक होनी चाहिए। अर्थात् 60 वर्ष के व्यक्ति को यह पॉलिसी अधिकतम 10 वर्ष की अवधि के लिए मिल सकेगी।


(3) न्यूनतम बीमा धन रुपये 50,000। उसके बाद रुपये 5000 के गुणांक में। अधिकतम बीमाधन का निर्धारण व्यक्ति की आयु तथा आय के आधार पर होगा।


(4) दुर्घटना हित लाभ -‘निगम’ की समस्त पॉलिसियों सहित, अधिकतम 50 लाख रुपये।


(5) किश्त भुगतान विधि - वार्षिक, अर्द्ध वार्षिक, तिमाही, मासिक तथा वेतन बचत योजना।


(6) पॉलिसी पर ‘पॉलिसी ऋण’ लिया जा सकता है।


(7) पॉलिसी समनुदेशित की जा सकती है।


जिन परिवारों में बच्चे अभी एक वर्ष के नहीं हुए हैं उन्हें यह पॉलिसी लेने पर अवश्य ही विचार करना चाहिए।

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आपकी बीमा जिज्ञासाओं/समस्याओं का समाधान उपलब्ध कराने हेतु मैं प्रस्तुत हूँ। यदि अपनी जिज्ञासा/समस्या को सार्वजनिक न करना चाहें तो मुझे bairagivishnu@gmail.com पर मेल कर दें। आप चाहेंगे तो आपकी पहचान पूर्णतः गुप्त रखी जाएगी। यदि पालिसी नम्बर देंगे तो अधिकाधिक सुनिश्चित समाधान प्रस्तुत करने में सहायता मिलेगी।


यदि कोई कृपालु इस सामग्री का उपयोग करें तो कृपया इस ब्लाग का सन्दर्भ अवश्य दें । यदि कोई इसे मुद्रित स्वरूप प्रदान करें तो कृपया सम्बन्धित प्रकाशन की एक प्रति मुझे अवश्य भेजें । मेरा पता है - विष्णु बैरागी, पोस्ट बाक्स नम्बर - 19, रतलाम (मध्य प्रदेश) 457001.

'वर्षा' आ गई फागुन में : इसे सहेज लीजिए

‘जीवन वर्षा’
भारतीय जीवन बीमा निगम की नई योजना (पालिसी)

कल, 16 फरवरी को, भारतीय जीवन बीमा निगम (एल. आई. सी.) एक बार फिर अपने स्थापित, जग-जाहिर और पारम्परिक आत्म विश्वास का परिचय देते हुए अपनी नई पालिसी ‘जीवन वर्षा’ बाजार में प्रस्तुत कर रहा है। मन्दी की उथल-पुथल से त्रस्त इस ‘भीषण विकट आर्थिक समय’ में एल. आई. सी. एक बार फिर सुनिश्चित लाभ (ग्यारण्टीड एडीशन) देने वाली पालिसी प्रस्तुत कर, देश के असंख्य मझोले निवेशकों को ‘बीमा सुरक्षा और सुनिश्चित लाभ’ एक साथ उपलब्ध कराने का ‘अविश्वसनीय कारनामा’ ही कर रही है।

‘जीवन वर्षा’ (तालिका 196) की महत्वपूर्ण बातें इस प्रकार हैं -

- यह एल. आई. सी. की ऐसी पहली ‘धन वापसी योजना’ (मनी बेक पालिसी) है जिसमें तीन-तीन वर्षों के अन्तराल पर धन वापसी का प्रावधान है। अन्यथा, एल. आई. सी. की अब तक उपलब्ध ‘धन वापसी योजनाओं’ (मनी बेक पालिसियों) में चार-चार अथवा पाँच-पाँच वर्षों के बाद ‘धन वापसी’ का प्रावधान है।

- यह योजना सीमित अवधि, 31 मार्च 2009 तक के लिए ही उपलब्ध है।
- यह योजना, 15 वर्ष (पूर्ण) से 66 वर्ष की आयु समूह के लोगों के लिए है।
- परिपक्वता आयु अधिकतम 75 वर्ष।
- योजना दो अवधियों (9 वर्ष तथा 12 वर्ष)के लिए उपलब्ध है।

- प्रीमीयम भुगतान अवधि - 9 वर्ष। यह अवधि दोनों पालिसी अवधियों के लिए समान है। अर्थात् 12 वर्ष की पालिसी अवधि का विकल्प लेने पर भी किश्त भुगतान 9 वर्ष तक ही करना है। 9 वर्ष पालिसी अवधि विकल्प में तो किश्त भुगतान अवधि 9 वर्ष है ही।

सुनिश्चित लाभ (ग्यारण्टीड एडीशन)

(अ) 9 वर्ष पालिसी अवधि वाली योजना के लिए 65 रुपये प्रति वर्ष प्रति हजार। तथा

(ब) 12 वर्ष पालिसी अवधि वाली योजना के लिए 70 रुपये प्रति वर्ष प्रति हजार।

- इसके अतिरिक्त, परिपक्वता भुगतान के साथ ‘निष्ठा आधिक्य’ (लायल्टी एडीशन) भुगतान

का भी प्रावधान।



योजना के लाभ -
(1) 9 वर्ष पालिसी अवधि वाली योजना में, पालिसी के -

- 3 वर्ष पूरे होने पर बीमा धन की 15 प्रतिशत राशि का भुगतान।

- 6 वर्ष पूरे होने पर बीमा धन की 25 प्रतिशत राशि का भुगतान।

- 9 वर्ष पूरे होने पर (अर्थात् परिपक्वता के समय) बीमाधन की शेष 60 प्रतिशत राशि के साथ सुनिश्चित लाभ की राशि तथा निष्ठा आधिक्य की राशि का भुगतान।

(2) 12 वर्ष पालिसी अवधि वाली योजना में, पालिसी के -

- 3 वर्ष पूरे होने पर बीमा धन की 10 प्रतिशत राशि का भुगतान।

- 6 वर्ष पूरे होने पर बीमा धन की 20 प्रतिशत राशि का भुगतान।

- 9 वर्ष पूरे होने पर बीमा धन की 30 प्रतिशत राशि का भुगतान।

- 12 वर्ष पूरे होने पर (अर्थात् परिपक्वता के समय) बीमा धन की शेष 40 प्रतिशत राशि के साथ, सुनिश्चित लाभ की राशि तथा निष्ठा आधिक्य की राशि का भुगतान।



बीमा सुरक्षा

-पालिसी प्रारम्भ दिनांक से, पालिसी के अन्तिम वर्ष से पहले वाले वर्ष तक की अवधि में मृत्य होने पर - बीमा धन की रकम तथा मृत्यु के समय तक की पालिसी अवधि के सुनिश्चित लाभ की रकम का भुगतान।

- पालिसी के अन्तिम वर्ष में (परिपक्वता दिनांक से पहले) मृत्यु होने की दशा में बीमा धन की रकम तथा सुनिश्चित लाभ की रकम तथा निष्ठा आधिक्य की रकम का भुगतान।

विशेष - मृत्यु दावे की रकम में से, 3-3 वर्षों के अन्तराल में किए गए भुगतान की रकम कम नहीं की जाएगी। यह प्रावधान, एल. आई. सी. की पहले से चली आ रही मनी बेक पाॅलिसियों में भी उपलब्ध है।

न्यूनतम बीमा धन - रुपये 50,000/-उसके बाद रुपये 5,000/- के गुणक में।
अधिकतम बीमा धन - कोई सीमा नहीं। (किन्तु प्रस्तावक की आयु और सकल आय के आधार पर निर्धारित अनुपात के अनुसार।)

प्रीमीयम निर्धारण में उपलब्ध रियायतें

भुगतान विधि छूट -

-वार्षिक भुगतान विधि पर मूल प्रीमीयम दर पर 2 प्रतिशत की और अध्र्द वार्षिक भुगतान विधि पर मूल प्रीमीयम दर पर 1 प्रतिशत की छूट।

बीमा धन छूट -

95,000/- तक - कोई छूट नहीं।

1 लाख से 1,95,000/- तक - मूल प्रीमीयम दर पर 2 रुपये प्रति हजार।

2 लाख से 4,95,000/- तक - मूल प्रीमीयम दर पर 3.50 रुपये प्रति हजार।

5 लाख तथा अधिक पर - 5 रुपये प्रति हजार।

(बीमा एजेण्ट जब आपको उदाहरण देते हुए प्रीमीयम बताता है तो उसमें समस्त रियायतें देने के बाद ही रकम बताता है।)

किश्त भुगतान विधि - वार्षिक, अध्र्द वार्षिक और तिमाही।

आय कर प्रावधान -
- चुकाई गई प्रीमीयम की रकम पर, आय कर अधिनियम की धारा 80 (सी) के अन्तर्गत कर छूट मिलेगी।
- पालिसी से मिलने वाली समस्त रकम, आय कर की धारा 10 (10) (डी) के अन्तर्गत आय कर से पूर्णतः मुक्त रहेगी।

प्राप्तियों का ‘लाभ-प्रतिशत’
- 30 वर्ष की आयु वाले व्यक्ति के जीवन पर ली गई, 9 वर्ष अवधि वाली, रुपये 5 लाख बीमा धन की पालिसी पर, आय कर छूट न लेने की दशा में लगभग 9 प्रतिशत की दर से तथा आय कर छूट लेने की दशा में लगभग 17 प्रतिशत की दर से लाभ प्राप्ति अनुमानित है।



- उपरोक्तानुसार ही, 12 वर्ष अवधि का विकल्प लेने पर यह लाभ प्रतिशत, आय कर छूट न लेने की दशा में लगभग 10 प्रतिशत तथा आय कर छूट लेने की दशा में 23 प्रतिशत अनुमानित है।

- यदि मिलने वाली रकम पर आय कर की छूट को भी शरीक कर लिया जाए तो यह लाभ-प्रतिशत और अधिक हो जाता है।

मेरी सलाह -
यह पालिसी उन समस्त लोगों के लिए ‘बिल्ली के भाग से टूटा छींका’ है जो 55 वर्ष से अधिक आयु के हो चुके हैं। 62 पार कर चुके लोगों के लिए तो यह ‘मनी बेक सुविधा सहित, छप्पर फाड़ बीमा सुरक्षा वर्षा’ है।

एल.आई.सी. की वर्तमान मनी बेक पालिसियों में, परिपक्वता की अधिकतम आयु 70 वर्ष निर्धारित की हुई है। अर्थात् 46 वर्ष का व्यक्ति 25 वर्षीय मनी बेक पालिसी, 51 वर्ष आयु का व्यक्ति 20 वर्षीय मनी बेक पालिसी और 56 वर्षीय व्यक्ति 15 वर्षीय मनी बेक पालिसी नहीं ले सकता। 12 वर्ष अवधि वाली कोई मनी बेक पालिसी एल.आई.सी. के पास उपलब्ध है ही नहीं।
किन्तु ‘जीवन वर्षा’ पालिसी में परिपक्वता आयु 75 वर्ष तक कर दी गई है। अर्थात् यह पॅलिसी 66 वर्ष तक की आयु वाले लोगों के लिए उपलब्ध है। वे 9 वर्ष अवधि वाली ‘जीवन वर्षा’ ले सकते हैं और 63 वर्ष की आयु वाले तो 12 वर्ष अवधि वाली ‘जीवन वर्षा’ ले सकते हैं।

जाहिर है कि ‘उच्च जोखिम क्षेत्र’ (हाई रिस्क झोन) में जी रहे जो वरिष्ठजन बीमा सुरक्षा लेने को उत्सुक हैं, उनके लिए तो यह ‘लपक लेने वाला प्रतीक्षित सुनहरा मौका’ ही है।

ऐसे लोगों को तो यह पालिसी, अपनी भुगतान क्षमता के अनुरूप, ‘बिना विचारे’ ही ले लेना चाहिए

- आर्थिक परिदृश्य पर छाया मन्दी का प्रभाव जल्दी दूर होता अनुभव नहीं हो रहा है। सरकार बार-बार भरोसा दिला रही है और अर्थ विशेषज्ञ चेतावनियाँ दे रहे हैं। बैंकों की ब्याज दरें कम होने की आशंका चारों ओर पसरी हुई है। ऐसे में ‘ग्यारण्टीड रिटर्न’ अपने आप में सबसे बड़ा आकर्षण है। कहा जा सकता है कि ‘जीवन वर्षा’ पालिसी लेकर, मन्दी के खतरे से बेफिक्र होकर, टाँगे पसार कर सोया जा सकता है।

- ‘जीवन आस्था’ के समय जो दो बातें मैं ने कही थीं, वे दानों ही दुहरा रहा हूँ। - यह योजना भले ही 31 मार्च तक उपलब्ध है किन्तु अन्तिम तारीख की प्रतीक्षा न करें। यदि यह योजना अनुकूल अनुभव होती है तो तत्काल ही खरीद लें।

- यथा सम्भव, 12 वर्ष अवधि की योजाना लें।

सदैव की तरह कृपया याद रखें - यह विवरण मुझे मिली अब तक की तानकारियों के आधार पर हैं। इन्‍हें भारतीय जीवन बीमा निगम की अधिकृत जानकारियां न समझें।

जीवन बीमा से जुड़ी कुछ छोटी-छोटी जानकारियाँ, गुरुवार को।

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इस ब्लाग पर, प्रत्येक गुरुवार को, जीवन बीमा से सम्बन्धित जानकारियाँ उपलब्ध कराई जा रही हैं। (इस स्थिति के अपवाद सम्भव हैं।) आपकी बीमा जिज्ञासाओं/समस्याओं का समाधान उपलब्ध कराने का यथा सम्भव प्रयास करूँगा। अपनी जिज्ञासा/समस्या को सार्वजनिक न करना चाहें तो मुझे bairagivishnu@gmail.com पर मेल कर दें। आप चाहेंगे तो आपकी पहचान पूर्णतः गुप्त रखी जाएगी। यदि पालिसी नम्बर देंगे तो अधिकाधिक सुनिश्चित समाधान प्रस्तुत करने में सहायता मिलेगी। यह सुविधा पूर्णतः निःशुल्क है।

यदि कोई कृपालु इस सामग्री का उपयोग करें तो कृपया इस ब्लाग का सन्दर्भ अवश्य दें । यदि कोई इसे मुद्रित स्वरूप प्रदान करें तो कृपया सम्बन्धित प्रकाशन की एक प्रति मुझे अवश्य भेजें । मेरा पता है - विष्णु बैरागी, पोस्ट बाक्स नम्बर - 19, रतलाम (मध्य प्रदेश) 457001.

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‘आस्था’ बिक रही है, तत्काल खरीद लें



‘जीवन - आस्था’



भारतीय जीवन बीमा निगम ने, 8 दिसम्बर को ‘जीवन आस्था’ नामकी नई योजना बाजार में प्रस्तुत की है । फिलहाल यह योजना कुल 45 दिनों के लिए उपलब्ध है - अर्थात् 21 जनवरी 2009 तक ।
मन्दी के दौर में यह आकर्षक योजना है । इसमें बोनस कम होने की कोई आशंका नहीं है और शेयर बाजार की ऊँच-नीच के प्रभाव की आशंका तो सपने में भी नहीं है । इसमें ‘सुनिश्चित लाभ’ (गारण्टीड एडीशन) का प्रावधान किया गया है और यही इसकी सबसे बड़ी विशेषता भी है और आकर्षण भी ।

यह योजना 13 से 60 वर्ष तक की आयु वर्ग के लिए है और न्यूनतम निवेश, मोटे तौर पर 25 हजार रुपये है । निवेश की रकम, आयु के आधार पर निर्धारित होती है सो कम आयु वालों के लिए यह राशि 25 हजार से कम और अधिक आयु वालों के लिए 25 हजार से तनिक अधिक हो सकती है ।

यह एकल (सिंगल) प्रीमीयम योजना है । अर्थात् निवेशक को एक बार ही भुगतान करना है-प्रति वर्ष नहीं ।

यह योजना दो अवधियों के लिए उपलब्ध है - 5 वर्ष और 10 वर्ष ।

‘सुनिश्चित लाभ’ की दर दोनों अवधियों के लिए अलग-अलग है - 5 वर्ष अवधि के लिए 90 रुपये प्रति हजार प्रति वर्ष तथा 10 वर्ष अवधि के लिए 100 रुपये प्रति हजार प्रति वर्ष ।

इसमें निवेश की गई रकम पर, आयकर अधिनियिम की धारा 80 (सी) के अन्तर्गत छूट मिलेगी जबकि परिवपक्वता राशि, आयकर अधिनियिम की धारा 10 (10)(सी) के अधीन आय कर मुक्त होगी । प्राप्तियों का आयकर मुक्त होना इसका बहुत बड़ा आकर्षण है ।

इसके साथ ही साथ, इसमें जीवन बीमा सुरक्षा भी उपलब्ध है । यह सुरक्षा (रिस्क कवर) प्रथम पालिसी वर्ष में न्यूनतम डेड़ लाख रुपये तथा शेष पालिसी अवधि में न्यूनतम 50 हजार रुपये है । परिपक्वता बीमा धन, न्यूनतम 25 हजार रुपये है । इसके अतिरिक्त, पालिसी की पूर्णता पर 'निष्‍‍ठा आधिक्य' (लायल्टी एडीशन) के भुगतान का भी प्रावधान है ।

इसकी प्राप्तियाँ, बाजार में वर्तमान में उपलब्ध किसी भी योजना से अधिक ही आकर्षक और लाभदायक अनुभव होती हैं । 5 वर्ष अवधि वाली पालिसी की परिपक्वता राशि, निवेशित राशि की ड्ययोड़ी से अधिक तथा 10 वर्ष अवधि वाली पालिसी में दुगुनी से अधिक होगी ।

इन सारी बातों को इन उदाहरणों से आसानी से समझा जा सकता है -


पहला उदाहरण
पालिसीधारक की आयु - 30 वर्ष ।

पालिसी अवधि - 10 वर्ष ।

मूल बीमा धन - रुपये 1,50,000

प्रीमीयम (निवेश की रकम) - रुपये 24,825/-

परिपक्वता राशि -

परिपक्वता बीमा धन - रुपये 25,000/-

सुनिश्चित लाभ - रुपये 25,000/-

लायल्टी एडीशन (सम्भावित) - रुपये 7,500/-

योग - रुपये 57,500/-

लाभांश की दर - 9 प्रतिशत ।

इसमें यदि आय कर की बचत का प्रभाव शामिल कर लें तो लाभांश की दर इस प्रकार होगी -
आयकर छूट 10 प्रतिशत पर - 10 प्रतिशत

आय कर छूट 20 प्रतिशत पर - 11 प्रतिशत

आय कर छूट 30 प्रतिशत पर - 13

दूसरा उदाहरण
पालिसीधारक की आयु - 30 वर्ष ।

पालिसी अवधि - 5 वर्ष ।

मूल बीमा धन - रुपये 1,50,000

प्रीमीयम (निवेश की रकम) - रुपये 26,205/-

परिपक्वता राशि -

परिपक्वता बीमा धन - रुपये 25,000/-

सुनिश्चित लाभ - रुपये 11,250/-

लायल्टी एडीशन (सम्भावित) - रुपये 3,750/-

योग - रुपये 40,000/-

लाभांश की दर - 9 प्रतिशत ।
इसमें यदि आय कर की बचत का प्रभाव शामिल कर लें तो लाभांश की दर इस प्रकार होगी -
आयकर छूट 10 प्रतिशत पर - 11 प्रतिशत

आयकर छूट 30 प्रतिशत पर - 17 प्रतिशत


इसके अतिरिक्त इस योजना में निम्नांकित सुविधाएँ भी उपलब्ध हैं -
- प्रथम पालिसी वर्ष पूर्ण होने पर सरेण्डर मूल्य प्राप्त किया जा सकता है जो निवेशित राशि का 90 प्रतिशत होगा ।

- प्रथम पालिसी वर्ष पूर्ण होने के पश्‍चात पालिसी पर लोन लिया जा सकता है ।

- पालिसी को तत्काल ही समनुदेशित किया जा सकता है अर्थात् गिरवी रखा जा सकता है ।

भारतीय जीवन बीमा निगम ने एक लम्बे समय से ‘सुनिश्चित लाभ’ (गारण्टीड एडीशन) वाली योजनाएं बन्द कर रखी थीं ।

मन्दी और शेयर बाजार के उतार-चढ़ाव से उपजे आर्थिक दहशत के इस वातावरण में ‘सुनिश्चित लाभ’ (गारण्टीड एडीशन) वाली यह योजना बाजार में उतार कर भारतीय जीवन बीमा निगम ने अपूर्व साहस का परिचय दिया है ।


मैं निम्नानुसार अनुशंसा करता हूं -
- इसे तत्काल खरीद लिया जाना चाहिए । ‘आय कर नियोजन’ से परे हटकर भी यह, बाजार में उपलब्ध अन्य समान योजनाओं से काफी बेहतर है ।

- सम्भव हो तो अपने परिवार के 13 से 40 वर्ष आयु वर्ग के सदस्यों के लिए खरीदेंगे तो अधिक लाभ होगा ।

- लोग ‘अल्पावधि निवेश’ को प्राथमिकता देते हैं किन्तु मेरी सलाह है कि इसे 10 वर्ष के लिए लें ।

- इसकी अन्तिम दिनांक की प्रतीक्षा न करें । तत्काल ही ले लें ।


मैं केवल परामर्श नहीं दे रहा हूं । मेरे छोटे बेटे तथागत (अवस्था 19 वर्ष) के लिए मैं यह पालिसी ले रहा हूं । अर्थात् आपको उसी खरीदी की सलाह दे रहा हूं जो खरीदी मैं खुद कर रहा हूं ।

(कृपया मेरी इस प्रस्तुति को भारतीय जीवन बीमा निगम की प्रस्‍‍तुति न समझें ।)


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